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रणनीति सबने बनाई, आज मतदाता करेंगे फैसला
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किसकी रणनीति असरदार आज मुहर लगाएंगे मतदाता
सहारनपुर। विधान परिषद सदस्य (शिक्षक एवं स्नातक) सीट पर भाजपा के साथ अन्य दलों ने भी अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए रात दिन रणनीति बनाकर काम किया है। किसकी रणनीति असरदार रही इसका फैसला मंगलवार को मतदाता मुहर लगाकर करेंगे।
एमएलसी स्नातक सीट पर जिले में 56949 मतदाता हैं, जबकि शिक्षक एमएलसी के लिए 3193 मतदाता हैं। एमएलसी स्नातक एवं शिक्षक सीट मेरठ और सहारनपुर मंडल को मिलाकर बनी है। उसमें सहारनपुर जिले के मतदाताओं की संख्या की अहम भूमिका रहेगी। यही वजह है कि भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जिले के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की भरसक कोशिश की है। जातिगत समीकरण तक साधे गए तो सामाजिक संगठनों का भी खूब सहारा लिया गया। वहीं, भाजपा ने तो बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंप दी। यह कार्यकर्ता लक्ष्य के साथ मोहल्ले दर मोहल्लों में घूमे और स्नातक तथा शिक्षक मतदाताओं से संपर्क करके अपने प्रत्याशी को वोट देने की अपील की गई। इसके अलावा मतदाता सम्मेलनों का भी आयोजन किया गया, जिसमें भाजपा के मंत्री, सांसद, क्षेत्रीय अध्यक्ष से लेकर पूर्व सांसद, विधायक और अन्य पदाधिकारियों ने महानगर के साथ देहात क्षेत्र में अनेक कार्यक्रम किए।
- इस बार उलझे हुए हैं समीकरण
एमएलसी स्नातक सीट पर लंबे समय तक हेम सिंह पुंडीर का कब्जा रहा। चूंकि वह सहारनपुर जनपद के रहने वाले हैं, जिस कारण पूर्व के चुनावों में अपने पैतृक जिले में अधिक से अधिक वोट हासिल करने की वजह से उन्हें जीत मिलती रही। अब समीकरण बदले हुए हैं तो, स्नातक सीट पर करीब एक लाख और शिक्षक सीट पर करीब 10 हजार वोटर बढ़े हैं। शिक्षक सीट पर करीब 35 हजार तो स्नातक सीट पर करीब तीन लाख मतदाता मतदाता सूची में शामिल हैं। वहीं, राजनीतिक दलों ने जितनी गंभीरता से चुनाव को लिया है, उससे नतीजों को लेकर स्पष्ट रुख नजर नहीं आ रहा है।
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सहारनपुर। विधान परिषद सदस्य (शिक्षक एवं स्नातक) सीट पर भाजपा के साथ अन्य दलों ने भी अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए रात दिन रणनीति बनाकर काम किया है। किसकी रणनीति असरदार रही इसका फैसला मंगलवार को मतदाता मुहर लगाकर करेंगे।
एमएलसी स्नातक सीट पर जिले में 56949 मतदाता हैं, जबकि शिक्षक एमएलसी के लिए 3193 मतदाता हैं। एमएलसी स्नातक एवं शिक्षक सीट मेरठ और सहारनपुर मंडल को मिलाकर बनी है। उसमें सहारनपुर जिले के मतदाताओं की संख्या की अहम भूमिका रहेगी। यही वजह है कि भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जिले के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की भरसक कोशिश की है। जातिगत समीकरण तक साधे गए तो सामाजिक संगठनों का भी खूब सहारा लिया गया। वहीं, भाजपा ने तो बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंप दी। यह कार्यकर्ता लक्ष्य के साथ मोहल्ले दर मोहल्लों में घूमे और स्नातक तथा शिक्षक मतदाताओं से संपर्क करके अपने प्रत्याशी को वोट देने की अपील की गई। इसके अलावा मतदाता सम्मेलनों का भी आयोजन किया गया, जिसमें भाजपा के मंत्री, सांसद, क्षेत्रीय अध्यक्ष से लेकर पूर्व सांसद, विधायक और अन्य पदाधिकारियों ने महानगर के साथ देहात क्षेत्र में अनेक कार्यक्रम किए।
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- इस बार उलझे हुए हैं समीकरण
एमएलसी स्नातक सीट पर लंबे समय तक हेम सिंह पुंडीर का कब्जा रहा। चूंकि वह सहारनपुर जनपद के रहने वाले हैं, जिस कारण पूर्व के चुनावों में अपने पैतृक जिले में अधिक से अधिक वोट हासिल करने की वजह से उन्हें जीत मिलती रही। अब समीकरण बदले हुए हैं तो, स्नातक सीट पर करीब एक लाख और शिक्षक सीट पर करीब 10 हजार वोटर बढ़े हैं। शिक्षक सीट पर करीब 35 हजार तो स्नातक सीट पर करीब तीन लाख मतदाता मतदाता सूची में शामिल हैं। वहीं, राजनीतिक दलों ने जितनी गंभीरता से चुनाव को लिया है, उससे नतीजों को लेकर स्पष्ट रुख नजर नहीं आ रहा है।
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