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तिरपड़ी में कैंसर, ग्रामीणों में दहशत
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नकुड में गले के कैंसर से पीडित पाल्ला राम
- फोटो : SAHARANPUR
नकुड़/ सहारनपुर। गांव तिरपड़ी में कैंसर सहित अन्य बीमारियां पांव पसार रही हैं। छह महीने में सात लोगों की कैंसर से मौत हो गई है, कई लोग अब भी कैंसर की चपेट में हैं, जिनका अलग अलग अस्पताल में उपचार चल रहा है। बीमारियों का प्रमुख कारण ग्रामीणों द्वारा प्रदूषण बताया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग से लेकर अन्य विभाग इस तरफ से आंख मूंदे बैठे हैं। गांव का तालाब गंदगी से अटा हुआ है और हैंडपंपों से भी दूषित पानी निकल रहा है। इस वजह से लोगों में रोष बना हुआ है।
गांव में यह समस्या नई नहीं है, बल्कि करीब छह वर्ष से बनी हुई है। स्वच्छ पेयजल का संकट है, जिसके लिए ग्रामीण पानी की टंकी बनवाने की मांग करते आए हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। गांव तिरपड़ी निवासी भूमि विकास बैंक के पूर्व चेयरमैन चौधरी कालूराम, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य धनीराम तिरपड़ी, बिरम सिंह व रामपाल सिंह आदि ने बताया कि गत छह माह के दौरान गांव के जिंदा व उसकी पत्नी रोशनी, छोटा, श्यामपाल, गोविंद, रमेश व असगर आदि की कैंसर से मौत हो चुकी है। इसी तरह बीते करीब छह साल में कैंसर और गंभीर बीमारियों से मरने वालों की संख्या 50 से ज्यादा हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा गांव के पाल्लाराम और नजीर सहित कई लोग कैंसर व अन्य घातक बीमारी से पीड़ित हैं तथा इनका इलाज चंडीगढ़ से चल रहा है। जबकि डाक्टरों के जवाब देने के बाद कैंसर से पीड़ित नजीर अहमद घर में ही मौत से जूझ रहा है।
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ग्रामीण बोले, कहां हैं तालाबों की सफाई कराने वाले
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के दोनों तालाब गंदगी से अटे पड़े हैं। गांव में लगे सरकारी हैंडपंपों का पानी भी दूषित हो चुका है। गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है। दोनों तालाबों की सफाई कराई जानी जरूरी है। गांव में स्वच्छ पेयजल हेतु पानी की टंकी के निर्माण की प्रशासन से मांग की है। गांव निवासी चौधरी बुधसिंह व चौधरी रतनसिंह मुखिया का कहना है कि 2015 में भी कई लोगों की कैंसर से मौत हुई थी। तब तत्कालीन सांसद हुकुम सिंह भी गांव में आए थे। ग्रामीणों की मांग पर स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए उन्होंने भी पानी की टंकी बनवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक टंकी नहीं बन सकी है।
ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में करीब 45 सरकारी हैंडपंप हैं। योजना में वह 14 हैंडपंपों को रिबोर कराकर गहरा करा चुके है। जनप्रतिनिधियों से अनेकों बार गांव में टंकी लगवाने की मांग कर चुके है। लेकिन आश्वासन के अलावा अभी तक कुछ हासिल नहीं हुआ है।
मुख्य चिकित्साधिकारी बीएस सोढी का कहना है कि गांव में टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। बीमारों को उचित उपचार दिलाया जाएगा। कैंसर किस कारण से हुआ है, उसकी जांच भी कराएंगे। पानी के नमूनों की जांच कराई जाएगी। हालांकि प्रदूषित पानी की वजह से कैंसर नहीं होता है, उसके दूसरे अन्य कई कारण हो सकते हैं।
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गांव में यह समस्या नई नहीं है, बल्कि करीब छह वर्ष से बनी हुई है। स्वच्छ पेयजल का संकट है, जिसके लिए ग्रामीण पानी की टंकी बनवाने की मांग करते आए हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। गांव तिरपड़ी निवासी भूमि विकास बैंक के पूर्व चेयरमैन चौधरी कालूराम, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य धनीराम तिरपड़ी, बिरम सिंह व रामपाल सिंह आदि ने बताया कि गत छह माह के दौरान गांव के जिंदा व उसकी पत्नी रोशनी, छोटा, श्यामपाल, गोविंद, रमेश व असगर आदि की कैंसर से मौत हो चुकी है। इसी तरह बीते करीब छह साल में कैंसर और गंभीर बीमारियों से मरने वालों की संख्या 50 से ज्यादा हो चुकी है।
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उन्होंने बताया कि इसके अलावा गांव के पाल्लाराम और नजीर सहित कई लोग कैंसर व अन्य घातक बीमारी से पीड़ित हैं तथा इनका इलाज चंडीगढ़ से चल रहा है। जबकि डाक्टरों के जवाब देने के बाद कैंसर से पीड़ित नजीर अहमद घर में ही मौत से जूझ रहा है।
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ग्रामीण बोले, कहां हैं तालाबों की सफाई कराने वाले
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के दोनों तालाब गंदगी से अटे पड़े हैं। गांव में लगे सरकारी हैंडपंपों का पानी भी दूषित हो चुका है। गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं है। दोनों तालाबों की सफाई कराई जानी जरूरी है। गांव में स्वच्छ पेयजल हेतु पानी की टंकी के निर्माण की प्रशासन से मांग की है। गांव निवासी चौधरी बुधसिंह व चौधरी रतनसिंह मुखिया का कहना है कि 2015 में भी कई लोगों की कैंसर से मौत हुई थी। तब तत्कालीन सांसद हुकुम सिंह भी गांव में आए थे। ग्रामीणों की मांग पर स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए उन्होंने भी पानी की टंकी बनवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक टंकी नहीं बन सकी है।
ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में करीब 45 सरकारी हैंडपंप हैं। योजना में वह 14 हैंडपंपों को रिबोर कराकर गहरा करा चुके है। जनप्रतिनिधियों से अनेकों बार गांव में टंकी लगवाने की मांग कर चुके है। लेकिन आश्वासन के अलावा अभी तक कुछ हासिल नहीं हुआ है।
मुख्य चिकित्साधिकारी बीएस सोढी का कहना है कि गांव में टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। बीमारों को उचित उपचार दिलाया जाएगा। कैंसर किस कारण से हुआ है, उसकी जांच भी कराएंगे। पानी के नमूनों की जांच कराई जाएगी। हालांकि प्रदूषित पानी की वजह से कैंसर नहीं होता है, उसके दूसरे अन्य कई कारण हो सकते हैं।

नकुड में कैंसर से पीडित नजीर अहमद- फोटो : SAHARANPUR

नकुड के गांव तिरपड़ी में हैंडपंप से निकलने वाले पानी से पीला हुआ फर्श- फोटो : SAHARANPUR