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कुदरत की मार से किसान हुए बर्बाद: करीब डेढ़ करोड़ का हुआ नुकसान, जिले के 13 गांवों पर बरपा कहर, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Mon, 25 Oct 2021 07:21 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Mon, 25 Oct 2021 07:21 PM IST
सार

जिले में हुई बारिश और ओलावृष्टि से किसानों का भारी नुकसान हुआ है। बताया गया कि सहारनपुर में ओलावृष्टि से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं ओलावृष्टि का ज्यादा असर गांवों में रहा है।

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UP News: crops worth 1.5 crore farmers have been ruined in 13 villages due to rain and hailstorm in Saharanpur district
जिले में बर्बाद हुई फसल का जायजा लेते अधिकारी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में बारिश और ओलावृष्टि ने कहर बरपाया है। ओलावृष्टि ने तहसील बेहट क्षेत्र के यमुना तटवर्ती इलाके के 13 गांवों में धान और अन्य फसलों को बर्बाद कर दिया। सबसे अधिक नुकसान धान की फसल को हुआ। अनुमान है कि करीब 2500 बीघा धान की फसल चौपट हो गई। इससे करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान हुआ है, क्योंकि एक बीघा में औसतन तीन से चार क्विंटल धान निकलता है। इस लिहाज से करीब 7500 क्विंटल धान तैयार होता है। मोटे धान का भाव 1950 रुपये के हिसाब से करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान किसानों को हुआ है।  

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रविवार को शाम के समय ओलावृष्टि के बाद बरसात हुई। इससे खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल गिर गई और ओलावृष्टि की दो से तीन इंच मोटी परत से ढक गई। सबसे अधिक नुकसान शेखपुरा, मझाड़ी, मीरपुर कदीम, नुनियारी, जोधेबांस, धौलरा, अराजी जोड़ियो, नानौली, अलाउद्दीनपुर, टटौहल, बहरामपुर कांसेपुर, फैजाबाद व शेरपुर पेलो गांव में हुआ। यहां अभी 50 फीसदी धान की पकी फसल खेतों में खड़ी थी। इनके अलावा पठलोकर, ताल्हापुर हथौली, रहणा व शाहपुर बांस गांव में हल्की ओलावृष्टि हुई। इससे फसल को कम नुकसान है। 
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उड़द, सरसों व गन्ने की फसलें भी प्रभावित हुई
ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों में धान के अलावा सरसों, उड़द और गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। गन्ने की फसल को ओलावृष्टि ने तहस-नहस कर दिया। सरसों और उड़द की फसल भी लगभग चौपट हो गई है। वहीं, धान की फसल तैयार करने में प्रति बीघा तीन से हजार चार की लागत आती है। ऐसे में किसानों की लागत भी डूब गई। इससे किसान कर्ज के बोझ के नीचे दब गया है। 
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किसानों की पीड़ा
बेबस और लाचार किसानों को प्राकृतिक आपदा ने बर्बाद करके रख दिया। सोचा था धान की फसल बेचकर बेटी के हाथ पीले कर दूंगा, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। सब कुछ खत्म कर दिया। - बलवीर सिंह शेखपुरा

धान की फसल बर्बाद हो गई। अब चिंता यह है कि कैसे मंडी के आढ़तियों का कर्ज चुकाएंगे और बैंक का कर्ज कहां से देंगे। खाद, बीज व कीटनाशक वाले का उधार रहा अलग। वह भी तकाजा करेंगे। - जगपाल, नुनियारी

मई माह में लड़की की शादी की थी। शादी का कुछ कर्ज बाकी रह गया था। धान की फसल बेचकर बकाया कर्ज देने का वादा किया था। अब धान की फसल ही नहीं रही तो कर्ज कहां से दे पाऊंगा। - ऋषिपाल, शेखपुरा

45 बीघा जमीन ठेके पर ली है थी। ठेके के पैसे भी देने हैं और फसल में जो लागत लगी थी, वह पैसा अनाज मंडी के आढ़तियों से लिया था। सब कुछ बर्बाद हो गया। बस चिंता यहीं खाए जा रही है, कि कर्ज कहां से चुकाऊंगा।  - शब्बीर चौकीदार, नानौली

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समय से खरीद होती तो बच जाती फसल
ओलावृष्टि से धान की फसल बर्बाद होने के लिए किसान सरकार को भी जिम्मेदार मान रहे है। किसानों का कहना है कि हरियाणा की मंडी में उनके धान की खरीद नहीं की जा रही, जबकि साढ़ौली कदीम ब्लाक क्षेत्र में क्रय केंद्र भी नहीं है। फसल खेतों में तैयार होने के बावजूद भी वह उसकी कटाई और बिक्री नहीं कर पाए। 

गांव दर गांव नुकसान का हाल 
शेखपुरा में करीब 1200 बीघा धान का रकबा ओलावृष्टि में बर्बाद हुआ है। इनमें बलवीर की 29 बीघा, ऋषिपाल की 28 बीघा, समय सिंह की 20, पाल्ला की 20, अशोक शर्मा व उसके भाई श्याम कुमार की 60 बीघा, जयकुमार की 10 बीघा, साधुराम की 10  बीघा फसल शामिल है।

नानौली में पदम प्रकाश शर्मा की 14 बीघा, सुशील शर्मा की 10 बीघा, बबलू की 12, इनाम की 25, जाहिद 20, अमित की 20, शब्बीर की 21, नसीम राव की 12, सहीराम सात बीघा फसल आदि की फसलें नष्ट हो गई। 

नुनियारी में डॉ. बिरम पाल की 30 बीघा, वेदपाल की 100 बीघा, ईश्वर पाल की 20, मांगेराम की 35, प्रदीप कुमार और उसके भाई की 70, जगमाल की 14, नंदकिशोर की 10, चरण सिंह 12,  अशोक की 10 बीघा आदि की फसल नष्ट हुई है। 

टटौहल व धौलरा में ओमपाल की चार, विक्रम की 15 बीघा, लोटन की 15, विश्वास की 10, संजय की 20, बिजेंद्र  की 10, ब्रजपाल की 15, शिवचरण की 20, राजेंद्र की 10, मंजीत कुमार की 15, प्रमोद की 17 और बिट्टू की 10 बीघा फसल आदि की फसलें नष्ट हुई है। 

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शेरपुर पेलो में बुद्ध सिंह की 30, जनेश्वर की 20, मंगू की 10, वहीद की 20, ऋषिपाल की 20, राजू की 10, राजू की 10, रघुवीर की 10, मोल्हू की पांच, गुड्डू की 10, जगराम की 30, मेहर सिंह 10 बीघा फसल आदि की फसलें चौपट हुई है। 

फैजाबाद में तासीन की 20, अफजल की 50, श्याम लाल गुप्ता की 20, अरशद की 30, इलम चंद की 25, सूबेद्दीन की 15 बीघा आदि की फसलें नष्ट हुई हैं। 

अराजी जोड़ियो में मांगेराम की 20, प्रमोद की 10, चमेला की 20, कृष्ण की 20 बीघा, सुशील की 50, प्रदीप की 20 बीघा,  राजकुमार की 25, सोलंकी की 45, जगदीश की 45, सोमपाल की 25, तेल्लू की 30 बीघा आदि की फसलें नष्ट हुई है। 

बहरामपुर में ओमप्रकाश की आठ, मगन पाल की 12, सिताब सिंह की 13, जनेश्वर की नौ बीघा, राहुल कुमार की छह बीघा, कटार सिंह की नौ, दीपक की 12 बीघा आदि की फसलें बर्बाद हुई है। 

प्रशासनिक टीम ने लिया जायजा
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) रजनीश मिश्र और एसडीएम दीप्ति देव ने ओलावृष्टि से प्रभावित नुनियारी, टटौहल, नानौली आदि तहसील क्षेत्र के गांवों में जाकर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया। मौजूद राजस्व टीम से नुकसान का सर्वे कराया। एसडीएम ने बताया तीन गांवों में हुए नुकसान का सर्वे कराया जा चुका है। अभी सर्वे चल रहा है। सर्वे पूरा होने पर शासन को मुआवजे के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी।

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