UP: 356 दिन से गांव-गांव जाकर ये अलख जगा रहे स्वामी दीपांकर, समूचे भारत में भिक्षा यात्रा निकालने का है लक्ष्य
Meerut News : स्वामी दीपांकर का कहना है कि हिंदुओं को एकसूत्र में पिरोना ही भिक्षा यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। सरल भाषा में समाज को यह समझाना है कि हम हिंदू हैं और हम किसी भी जातियों में विभाजित होकर अपना अस्तित्व समाप्त क्यों कर रहे हैं।
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ये सन्यासी एक साल से भिक्षा यात्रा पर हैं। ये पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में गांव-गांव घूमकर आटा, चावल और पैसे की भीख नहीं मांगते हैं। बल्कि इनकी यात्रा का उद्देश्य हिंदुओं को एकसूत्र में पिरोना है। इस यात्रा के माध्यम से स्वामी दीपांकर जगह-जगह हिंदुओं के बीच पहुंचकर भिक्षा स्वरूप उन्हें जातीय बंधन से मुक्त होने का संकल्प मांगते हैं। एक सनातनी होने का प्रण दिलाते हैं। बृहस्पतिवार को इस यात्रा का प्रथम पड़ाव देवबंद स्थित महाकालेश्वर ज्ञान आश्रम में पूरा होगा।
स्वामी दीपांकर का कहना है कि हिंदुओं को एकसूत्र में पिरोना ही भिक्षा यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। सरल भाषा में समाज को यह समझाना है कि हम हिंदू हैं और हम किसी भी जातियों में विभाजित होकर अपना अस्तित्व समाप्त क्यों कर रहे हैं। हिंदू एकजुट होगा तो ही राष्ट्र सुदृढ़ और समृद्ध बनेगा। अभियान का दूसरा उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर करना है, क्योंकि यदि युवा नशा मुक्त, जुझारू और सक्रिय होंगे तो समाज व देश उन्नति की राह पर चलेगा।
स्वामी दीपांकर ने बताया कि इस एक साल की भिक्षा यात्रा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 49 लाख लोग इस अभियान से जुड़े हैं। यात्रा का पहला चरण 23 नवंबर को पूरा हो रहा है। अब इस यात्रा को देशव्यापी बनाया जाएगा।
जातियों में बांटना हिंदुओं के साथ धोखा
स्वामी दीपांकर कहते हैं कि आज कांग्रेस और दूसरे कई दल हिंदुओं को जातियों में बांटकर धोखा कर रहे हैं। 1951 के संसद के औपचारिक भाषण में सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, डॉ. भीमराव आंबेडकर और पंडित जवाहर लाल नेहरु ने कहा था कि देश में जातिगत जनगणना की जरुरत नहीं है, लेकिन आज राहुल गांधी और नीतीश कुमार जैसे नेता हिंदुओं को जातियों में बांटने का काम कर रहे हैं।
गुरु से मिली प्रेरणा तो शुरू किया अभियान
10 दिसंबर 1976 को मुजफ्फरनगर में जन्मे स्वामी दीपांकर देवबंद में देवीकुंड रोड स्थित महाकालेश्वर ज्ञान आश्रम के महंत स्व. स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के शिष्य हैं। स्वामी दीपांकर बताते हैं कि वर्ष 1998 में वे देवबंद अपने गुरुजी के पास आए और यहां उनके सानिध्य में साधना और शिक्षा-दीक्षा पूरी की। हिंदू समाज को एक करने की प्रेरणा उन्हें अपने गुरु से ही मिली। आध्यात्मिक ज्ञान से अपनी पहचान बनाने वाले स्वामी दीपांकर की हिंदुओं को एकजुट करने की सोच के चलते ये भिक्षा यात्रा शुरू की गई है।
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कई गांवों में लगाए जाति रहित समाज के बोर्ड
वह बताते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बिजनौर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, बुलंदशहर, रामपुर, हाथरस, मुरादाबाद के अलावा उत्तराखंड और हरियाणा के कई बड़े शहरों में सैकड़ों गांवों में उनकी भिक्षा यात्रा को हिंदू समाज का भरपूर समर्थन मिला है। कई गांवों में तो बाहर बोर्ड लगा दिए हैं कि यह गांव जातियों में बंटे लोगों का नहीं सनातनी हिंदुओं का है।
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