सहारनपुर: 100 करोड़ की टैक्स चोरी मामले में लखनऊ एसआईटी करेगी जांच, होंगे बड़े खुलासे
- लखनऊ एसआईटी करेगी टैक्स चोरी की जांच
- प्रमुख सचिव (गृह) के निर्देश पर जांच स्थानांतरित की गई
- सुनियोजित तरीके से की गई टैक्स चोरी, जांच में होंगे खुलासे
विस्तार
सहारनपुर में देहात कोतवाली क्षेत्र के टपरी स्थित द कोऑपरेटिव कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शराब फैक्टरी में पकड़ी गई करीब 100 करोड़ की टैक्स चोरी की जांच अब लखनऊ एसआईटी करेगी। जिसके बारे में डीआईजी एसआईटी की तरफ से शुक्रवार रात ही सहारनपुर जिले के अधिकारियों को आदेश प्राप्त हुआ।
वहीं, शुक्रवार को स्थानीय पुलिस की एसआईटी गठित की गई थी, लेकिन इसके बाद ही शासन स्तर से जांच लखनऊ एसआईटी स्थानांतरित करने का आदेश हो गया। शराब फैक्टरी में सुनियोजित तरीके से की गई टैक्स चोरी में बड़ा खेल उजागर हो सकता है। इसी वजह से जांच को शासन स्तर से स्थानांतरित किया गया है। आईपीएस देव रंजन तिवारी के नेतृत्व में टीम जांच करेगी। लखनऊ एसआईटी रविवार को सहारनपुर पहुंचकर जांच करेगी। टीम एफआईआर के आधार पर जांच शुरू करेगी और शराब फैक्टरी में भी जाएगी।
फैक्टरी से निकाला जा रहा है स्टॉक
एसटीएफ के छापे के बाद ही फैक्टरी में शराब उत्पादन बंद कर दिया गया था। मगर, वहां रखे स्टॉक को ट्रकों के जरिए निकाला जा रहा है, जबकि विभागीय सूत्र बताते हैं कि लखनऊ एसआईटी के प्रभारी आईपीएस देव रंजन तिवारी ने स्थानीय अधिकारियों से इस संबंध में बात करके फैक्टरी में बाहरी और स्टाफ के लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए कहा है। हालांकि, कार्यालय की चॉबी एसटीएफ के पास ही है। अमर उजाला टीम शनिवार को फैक्टरी में गई तो वहां से ट्रकों के जरिए स्टॉक को निकाला जा रहा था।
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यह है पूरा मामला
देहात कोतवाली क्षेत्र के टपरी स्थित द कोऑपरेटिव कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शराब फैक्टरी में एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह और मेरठ एसटीएफ के सीओ बृजेश सिंह ने टैक्स चोरी पकड़ी थी। आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि करीब एक वर्ष से टैक्स चोरी की जा रही थी, जो करीब 100 करोड़ रुपये तक हो सकती है। मामले में सहायक आयुक्त आबकारी (प्रवर्तन) मेरठ मोहम्मद आरिफ जमील की तरफ से देहात कोतवाली में दो रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिनमें आबकारी अधिकारी, फैक्टरी मालिक और पदाधिकारियों सहित कई आरोपी शामिल हैं। इनमें से आठ आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज चुकी है।
सफेदपोश के संरक्षण की भी संभावना
मामले में सफेदपोश लोगों के शामिल होने की बातें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में अभी कई और नाम उजागर हो सकते हैं और कई की गर्दन फंसना लगभग तय है। इसको लेकर अभी अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं, विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कभी भी आरोपी आबकारी निरीक्षक अरविंद कुमार वर्मा और सहायक आबकारी आयुक्त जगराम पाल और फैक्टरी मालिक प्रणव अनेजा की गिरफ्तारी हो सकती है।
अब लखनऊ एसआईटी इस मामले की जांच करेगी। शासन स्तर से जांच को स्थानांतरित किया गया है। - राजेश कुमार, एसपी सिटी
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