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भाजपा को रोकने के लिए हाथी पर सवार हुए मुस्लिम
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:13 AM IST
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मतदान के लिए लाइन में लगी महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में केन्द्र और राज्य की सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी को निकाय चुनाव में रोकने के लिए मुस्लिम मतदाताओं ने अबकी बार हाथी का सहारा लिया। यही कारण है कि शहरी इलाके में कमजोर मानी जाने वाली बसपा इस चुनाव में पूरी मजबूती के साथ भाजपा के सामने खड़ी हो गई है।
नगर निगम के अलावा देवबंद पालिका सहित अन्य निकायों में बसपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। इसके पीछे सीधा गणित बसपा के बेस वोट दलितों को मिले मुसलमानों का साथ है। पूरे चुनाव में मुस्लिमों को रिझाने में जुटी रही समाजवादी पार्टी इस मामले में सबसे ज्यादा पिछड़ गई।
जबकि निकाय चुनाव को कयादत की लड़ाई की दुहाई दे रहे पूर्व विधायक इमरान मसूद भी नगर निगम क्षेत्र में बहुत कमाल नहीं कर पाए हैं। हालांकि मुस्लिम मत एकतरफा नहीं है और इसमें बिखराव रहा है।
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बसपा के मजबूत गढ़ सहारनपुर में लंबे समय से दलित-मुस्लिम गठजोड़ की संभावना तलाशी जा रही थी। मगर, मजबूत मुस्लिम चेहरा नहीं होने के कारण यह संभावना पूरी तरह जमीन पर नहीं आ रही थी। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद बसपा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद को पार्टी में शामिल किया।
इसके अलावा पूर्व सांसद मंसूर अली खान भी बसपा में आ गए। मुस्लिम चेहरा मिलने के बाद दलित-मुस्लिम गठजोड़ के फार्मूले को बसपा ने सहारनपुर में लागू किया। हालांकि पहले काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद को प्रत्याशी बनाया, मगर चुनाव से ऐन पहले हाजी फजलुर्रहमान पर पार्टी ने दांव खेला है। इससे दलितों के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता बसपा में पाले में खड़े हुए।
सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार हुए नगर निगम चुनाव में बसपा मुस्लिम मतदाताओ की मदद से मजबूती से चुनाव लड़ी। हालांकि मुस्लिम मतदाताओं के साथ दलितों के साथ का फार्मूला कितना सफल होगा यह तो एक दिसंबर को भी सामने आएगा।
मगर, बसपा के फार्मूले ने जरुर मुसलमानों के सामने नया विकल्प खड़ा किया है। यहां बता दें कि काजी रशीद मसूद और उनके भतीजे इमरान मसूद के राजनीतिक सफर अलग होने के बाद से ही लगातार मुस्लिम कयादत की लड़ाई चल रही है। लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने चार लाख से ज्यादा मत प्राप्त कर खुद को साबित किया था।
हालांकि इसके ठीक बाद सहारनपुर नगर के उपचुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की और कांग्रेस को अपनी जमानत बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी थी। ऐसे में निकाय चुनाव के जरिए लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले नेताओं के लिए इससे कई संकेत मिल सकते हैं।
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नगर निगम के अलावा देवबंद पालिका सहित अन्य निकायों में बसपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। इसके पीछे सीधा गणित बसपा के बेस वोट दलितों को मिले मुसलमानों का साथ है। पूरे चुनाव में मुस्लिमों को रिझाने में जुटी रही समाजवादी पार्टी इस मामले में सबसे ज्यादा पिछड़ गई।
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जबकि निकाय चुनाव को कयादत की लड़ाई की दुहाई दे रहे पूर्व विधायक इमरान मसूद भी नगर निगम क्षेत्र में बहुत कमाल नहीं कर पाए हैं। हालांकि मुस्लिम मत एकतरफा नहीं है और इसमें बिखराव रहा है।
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बसपा के मजबूत गढ़ सहारनपुर में लंबे समय से दलित-मुस्लिम गठजोड़ की संभावना तलाशी जा रही थी। मगर, मजबूत मुस्लिम चेहरा नहीं होने के कारण यह संभावना पूरी तरह जमीन पर नहीं आ रही थी। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद बसपा ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद को पार्टी में शामिल किया।
इसके अलावा पूर्व सांसद मंसूर अली खान भी बसपा में आ गए। मुस्लिम चेहरा मिलने के बाद दलित-मुस्लिम गठजोड़ के फार्मूले को बसपा ने सहारनपुर में लागू किया। हालांकि पहले काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद को प्रत्याशी बनाया, मगर चुनाव से ऐन पहले हाजी फजलुर्रहमान पर पार्टी ने दांव खेला है। इससे दलितों के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता बसपा में पाले में खड़े हुए।
सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार हुए नगर निगम चुनाव में बसपा मुस्लिम मतदाताओ की मदद से मजबूती से चुनाव लड़ी। हालांकि मुस्लिम मतदाताओं के साथ दलितों के साथ का फार्मूला कितना सफल होगा यह तो एक दिसंबर को भी सामने आएगा।
मगर, बसपा के फार्मूले ने जरुर मुसलमानों के सामने नया विकल्प खड़ा किया है। यहां बता दें कि काजी रशीद मसूद और उनके भतीजे इमरान मसूद के राजनीतिक सफर अलग होने के बाद से ही लगातार मुस्लिम कयादत की लड़ाई चल रही है। लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने चार लाख से ज्यादा मत प्राप्त कर खुद को साबित किया था।
हालांकि इसके ठीक बाद सहारनपुर नगर के उपचुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की और कांग्रेस को अपनी जमानत बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी थी। ऐसे में निकाय चुनाव के जरिए लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले नेताओं के लिए इससे कई संकेत मिल सकते हैं।