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दवा न डॉक्टर, कैंसर के मरीजों को मिलती है सिर्फ सलाह
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सहारनपुर। हर वर्ष विश्व कैंसर दिवस और राष्ट्रीय कैंसर दिवस मनाए जाते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में कैंसर के इलाज की व्यवस्था लचर है। सहारनपुर मंडल मुख्यालय होने के बावजूद जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज तक में कैंसर के इलाज के लिए न तो चिकित्सक हैं और न ही दवा। केवल मरीजों की काउंसिलिंग और जांच की जाती है। कैंसर की पुष्टि होने पर मरीज को रेफर कर उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन, बढ़ता वायु प्रदूषण, मिलावटी खाद्य पदार्थ और फल व सब्जियों के उत्पादन में केमिकलयुक्त कीटनाशक का प्रयोग कैंसर की प्रमुख वजह है। सहारनपुर जैसे छोटे शहरों और देहात क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता का अभाव है, वहां कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में हर साल 180 से 200 लोग कैंसर के लक्षणों को लेकर काउंसिलिंग कराने पहुंच रहे हैं। कैंसर की पुष्टि हो जाने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। रेफर करने की वजह एसबीडी जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर और दवाएं उपलब्ध नहीं होना है।
कैंसर की रोकथाम को व्यवस्था
तंबाकू को कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में जिला अस्पताल में तंबाकू मुक्त परामर्श केंद्र स्थापित है। बीते कई साल से डॉ. बुशरा अंसारी यहां पहुंचने वाले लोगों की काउंसिलिंग करती हैं और तंबाकू उत्पाद छुड़ाने के लिए जरूरी दवाएं देती हैं। डॉ. बुशरा ने बताया कि अब लोगों में जागरूकता आ रही है।
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कैंसर से बचाव के तरीके
- तंबाकू से बने उत्पादों और शराब का सेवन न करें।
- लाल मीट न खाएं और नियमित व्यायाम करें।
- डिब्बों में बंद रेडीमेड खाना न खाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम करें और सफाई का ध्यान रखें।
बढ़ रहे हैं ब्रेस्ट और योनि कैंसर के मामले
सहारनपुर। महिलाओं में ब्रेस्ट और योनि कैंसर की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। चिकित्सकों का मानना है कि देरी से बच्चे पैदा करना या बच्चे न होना, पीरियड्स (माहवारी) का गड़बड़ाना भी कैंसर की वजह बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतें। यदि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से जांच कराती रहें। तो बीमारी का समय से पता चलने पर इलाज संभव है। पहली या दूसरी स्टेज में पता चलने पर कैंसर को सर्जरी या रेडियोलॉजी व कीमोथैरेपी से जड़ से खत्म किया जा सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
- ब्रेस्ट में गांठ का होना।
- ब्रेस्ट से रक्त या किसी तरल पदार्थ का निकलना।
- ब्रेस्ट की बनावट में बदलाव आना।
- इन महिलाओं को अधिक खतरा
- 30 साल की उम्र के बाद बच्चा होना।
- जिन महिलाओं केे बच्चे नहीं होते।
- 12 साल से पहले पीरियड होना या 55 साल के बाद भी पीरियड होते रहना।
- बच्चों को स्तनपान नहीं कराना।
कैंसर का विशेषज्ञ चिकित्सक और इलाज की सुविधा जिले में नहीं है। फिजिशियन देख लेते हैं और सलाह देते हैं। इसके बाद मरीज को रेफर किया जाता है। -- शिवांका गौड़, नोडल अधिकारी
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तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन, बढ़ता वायु प्रदूषण, मिलावटी खाद्य पदार्थ और फल व सब्जियों के उत्पादन में केमिकलयुक्त कीटनाशक का प्रयोग कैंसर की प्रमुख वजह है। सहारनपुर जैसे छोटे शहरों और देहात क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता का अभाव है, वहां कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में हर साल 180 से 200 लोग कैंसर के लक्षणों को लेकर काउंसिलिंग कराने पहुंच रहे हैं। कैंसर की पुष्टि हो जाने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। रेफर करने की वजह एसबीडी जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज में कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर और दवाएं उपलब्ध नहीं होना है।
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कैंसर की रोकथाम को व्यवस्था
तंबाकू को कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में जिला अस्पताल में तंबाकू मुक्त परामर्श केंद्र स्थापित है। बीते कई साल से डॉ. बुशरा अंसारी यहां पहुंचने वाले लोगों की काउंसिलिंग करती हैं और तंबाकू उत्पाद छुड़ाने के लिए जरूरी दवाएं देती हैं। डॉ. बुशरा ने बताया कि अब लोगों में जागरूकता आ रही है।
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कैंसर से बचाव के तरीके
- तंबाकू से बने उत्पादों और शराब का सेवन न करें।
- लाल मीट न खाएं और नियमित व्यायाम करें।
- डिब्बों में बंद रेडीमेड खाना न खाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम करें और सफाई का ध्यान रखें।
बढ़ रहे हैं ब्रेस्ट और योनि कैंसर के मामले
सहारनपुर। महिलाओं में ब्रेस्ट और योनि कैंसर की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। चिकित्सकों का मानना है कि देरी से बच्चे पैदा करना या बच्चे न होना, पीरियड्स (माहवारी) का गड़बड़ाना भी कैंसर की वजह बन सकता है। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतें। यदि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से जांच कराती रहें। तो बीमारी का समय से पता चलने पर इलाज संभव है। पहली या दूसरी स्टेज में पता चलने पर कैंसर को सर्जरी या रेडियोलॉजी व कीमोथैरेपी से जड़ से खत्म किया जा सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
- ब्रेस्ट में गांठ का होना।
- ब्रेस्ट से रक्त या किसी तरल पदार्थ का निकलना।
- ब्रेस्ट की बनावट में बदलाव आना।
- इन महिलाओं को अधिक खतरा
- 30 साल की उम्र के बाद बच्चा होना।
- जिन महिलाओं केे बच्चे नहीं होते।
- 12 साल से पहले पीरियड होना या 55 साल के बाद भी पीरियड होते रहना।
- बच्चों को स्तनपान नहीं कराना।
कैंसर का विशेषज्ञ चिकित्सक और इलाज की सुविधा जिले में नहीं है। फिजिशियन देख लेते हैं और सलाह देते हैं। इसके बाद मरीज को रेफर किया जाता है। -- शिवांका गौड़, नोडल अधिकारी