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कृतज्ञता का भाव बढ़ाता है रोजा
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कृतज्ञता का भाव बढ़ाता है रोजा
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा रमजान का सबसे बड़ा लक्ष्य व्यक्ति को भौतिकवाद से निकालकर आध्यात्मिकता के पथ पर अग्रसर करना है। रोजा इंसान के अंदर कृतज्ञता का भाव बढ़ाता है। थोड़े समय के लिए जब वह अपना खाना-पीना छोड़ देता है तो उसे यह अहसास होता है कि जीवन खुदा की देन है। रमजान में रोजेदार को ज्यादा से ज्यादा समय खुदा की इबादत में लगाना चाहिए और अपने आपसे यह भी वादा करना चाहिए कि वह अपने जीवन को आध्यात्मिक बनाएगा। साथ ही वह समाज का एक उपयोगी सदस्य बनेगा।
सवाल- बिजनौर निवासी डॉ. रिजवान ने पूछा कि क्या रोजे की हालत में बुखार का नापने के लिए थर्मामीटर लगाया जा सकता है। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब- रोजे की हालत में तापमान मालूम करने के लिए थर्मामीटर लगा सकते हैं। थर्मामीटर के जरिए कोई चीज हलक के अंदर नहीं जाती है। इससे रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल- रायपुर निवासी मशकूर ने पूछा कि नाबालिग बच्चा अगर रोजा रखकर तोड़ दे या उसके माता-पिता रहम की वजह से रोजा समय से पहले खुलवा दें तो क्या इस रोजे की कजा अदा करना जरूरी है।
जवाब- शरीयत के अनुसार नाबालिग बच्चे ने खुदा रोजा तोड़ा हो या उससे तुड़वाया गया हो तो दोनों सूरतों में उस नाबालिग बच्चे पर कजा की अदाएगी वाजिब नहीं है।
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सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा रमजान का सबसे बड़ा लक्ष्य व्यक्ति को भौतिकवाद से निकालकर आध्यात्मिकता के पथ पर अग्रसर करना है। रोजा इंसान के अंदर कृतज्ञता का भाव बढ़ाता है। थोड़े समय के लिए जब वह अपना खाना-पीना छोड़ देता है तो उसे यह अहसास होता है कि जीवन खुदा की देन है। रमजान में रोजेदार को ज्यादा से ज्यादा समय खुदा की इबादत में लगाना चाहिए और अपने आपसे यह भी वादा करना चाहिए कि वह अपने जीवन को आध्यात्मिक बनाएगा। साथ ही वह समाज का एक उपयोगी सदस्य बनेगा।
सवाल- बिजनौर निवासी डॉ. रिजवान ने पूछा कि क्या रोजे की हालत में बुखार का नापने के लिए थर्मामीटर लगाया जा सकता है। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब- रोजे की हालत में तापमान मालूम करने के लिए थर्मामीटर लगा सकते हैं। थर्मामीटर के जरिए कोई चीज हलक के अंदर नहीं जाती है। इससे रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल- रायपुर निवासी मशकूर ने पूछा कि नाबालिग बच्चा अगर रोजा रखकर तोड़ दे या उसके माता-पिता रहम की वजह से रोजा समय से पहले खुलवा दें तो क्या इस रोजे की कजा अदा करना जरूरी है।
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जवाब- शरीयत के अनुसार नाबालिग बच्चे ने खुदा रोजा तोड़ा हो या उससे तुड़वाया गया हो तो दोनों सूरतों में उस नाबालिग बच्चे पर कजा की अदाएगी वाजिब नहीं है।
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