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गर्म होता मौसम.. अग्निकांडों का खतरा... रहें सावधान

Wed, 20 Apr 2022 11:18 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Apr 2022 11:18 PM IST
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Firefighters everywhere, extinguishing resources limited
सहारनपुर। चढ़ता पारा और तेज हवा, एक छोटी सी चिंगारी पल भर मेहनत से तैयार की गई फसल और संपत्ति को राख बना दे रही है। आग भड़काने के इंतजाम तो हर तरफ हैं लेकिन आग बुझाने के संसाधन सीमित है। आग लगने की सर्वाधिक घटनाएं बेहट और मिर्जापुर के घाड़ क्षेत्र में हुई है। बीते एक सप्ताह में ही यहां चार बड़ी घटनाएं हो चुकी है।
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जनपद का क्षेत्रफल करीब 3,689 वर्ग किलोमीटर है, जिममें एक नगर निगम, चार नगर पालिका और छह नगर पंचायतें हैं। कुल 11 ब्लाक क्षेत्रों में 884 ग्राम पंचायतें हैं। बेहट तहसील में शिवालिक का वन क्षेत्र और घाड क्षेत्र है। जनसंख्या करीब 39,79,403 है। जिले में गेहूं का कुल रकबा 1,14,829 हेक्टेयर है। वर्ष 2021 में ही आग लगने की 270 घटनाएं हुईं। वर्ष 2022 में अब 61 अग्निकांड हो चुके हैं।
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सड़कों में दब गए अधिकांश फायर हाइड्रेंट
जिले में लगभग 60 फायर हाइड्रेंट लगे हैं। अब अंबाला रोड फायर स्टेशन और बेहट रोड फायर स्टेशन पर भी फायर हाइड्रेंट हैं। कई जगहों पर फायर हाइड्रेंट सड़कों के निर्माण दब गए, जिन्हें दमकल विभाग ने अब दुरुस्त कराना शुरू कर दिया है।
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बेहट में नहीं फायर स्टेशन
बेहट तहसील में फायर स्टेशन की मांग कई दशक पुरानी है, मगर अभी तक फायर स्टेशन नहीं बना है। यहां शिवालिक वन और घाड क्षेत्र है, जहां आग लगने की अधिक घटनाएं होती है। यहां पर केवल एक गाड़ी फायर ब्रिगेड की रहती है।
दमकल विभाग के संसाधन
जिले में एक फायर स्टेशन चार यूनिट का है, जबकि तहसील स्तर पर दो दो यूनिट का है। शहर में अंबाला रोड फायर स्टेशन पर एक बड़ी और एक छोटी गाड़ी, बेहट रोड फायर स्टेशन पर एक बड़ी गाड़ी है। देवबंद में दो छोटी और एक बड़ी गाड़ी है। सरसावा में एक छोटी और एक बड़ी गाड़ी है। बेहट तहसील के लिए आवंटित दमकल गाड़ी एक मिर्जापुर में दूसरी बेहट रहती है। संकरी गलियों में आग लगने पर वाटर मिस्ट (छोटे वाहन) को भेजा जाता है।

सीढ़ी है, हाइड्रोलिक ट्राली की मांग
बहुमंजिला इमारतों में लगी आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक ट्राली की मांग की गई है, जबकि 35 फिट लंबी सीड़ी दमकल विभाग के पास है।
दावा, शहर में 10 और देहात में 20 से 25 मिनट पहुंच जाती है गाड़ी
नागरिकों को समय-समय पर आग से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है। जिले में 250 से अधिक घटनाएं हर वर्ष होती हैं। शहर में 10 मिनट में गाड़ी मौके पर पहुंच जाती है, जबकि आउटर देहात क्षेत्रों मे 20 से 25 मिनट लग जाते हैं।-----तेजवीर सिंह, सीएफओ
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