सहारनपुर। गन्ना, धान, गेहूं जैसी परंपरागत खेती में लगातार हो रहे कम मुनाफे के चलते जनपद के किसान कृषि विविधिकरण को अपना रहे हैं। इसके चलते किसानों का रुख औषधीय फसलों की खेती की ओर हो रहा है। तुलसी, एलोवेरा, ब्राह्मी, अश्वगंधा, रूसा, सतावर आदि औषधीय फसलों की खेती को अपना रहे हैं। जनपद में 80 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में इसकी खेती हो रही है।
नगदी फसल होने और बाजार की उपलब्धता के चलते जनपद के किसानों को औषधीय खेती भा रही है। जिले में एलोवेरा की खेती करीब 40 हेक्टेयर, तुलसी की लगभग 20 हेक्टेयर, ब्राह्मी की आठ हेक्टेयर, अश्वगंधा की 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रही है। इसके अलावा सतावर, रूसा और लेमन ग्रास की खेती भी हो रही है। एलोवेरा का उपयोग सौदर्य प्रसाधन बनाने से लेकर कई रोगों के उपचार में भी किया जाता है। इसको फरवरी, मार्च के महीने में रोपा जाता है। इसकी पत्तियों को एक साल में करीब तीन बार काटकर औषधीय दवाईयों के निर्माताओं को बेचा जाता है। इसका उत्पादन सात से आठ क्विंटल प्रति बीघा की दर से होता है। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि तुलसी की रोपाई अगस्त और फरवरी में होती है। करीब चार महीने में तुलसी की पत्तियों को तोड़कर बाजार में बेचा जाता है। इसके अलावा पत्तियों को सुखाकर भी बेचा जाता है। इसके अलावा लेमन ग्रास, ब्राह्मी, अश्वगंधा और रूसा आदि की खेती भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि जनपद के गंगोह, देवबंद, मुजफ्फराबाद और साढ़ौली कदीम आदि विकास खंडों में औषधीय फसलों की खेती की जा रही है। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि बाजार की नजदीक उपलब्धता और अच्छे उत्पादन एवं रेट के चलते किसानों का रुख औषधीय फसलों की खेती की ओर हो रहा है।