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तीन मौतों से अहाड़ी गांव में मातम
अमर उजाला / ब्यूरो/ सहारनपुर
Updated Mon, 05 Dec 2016 12:16 AM IST
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चिलकाना के अहाड़ी गांव में आत्महत्या करने वाले रतन के बेटों से जानकारी लेते सीओ सदर।
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर/चिलकाना। एक परिवार के तीन सदस्यों के आत्म हत्या करने की घटना ने पूरे गांव अहाड़ी को हिलाकर रख दिया। इस घटना से एक ओर जहां परिवार और गांव में कोहराम मच गया, वहीं प्रशासन में हड़कंप मचा है।
सूचना मिलते ही सीओ और अन्य अधिकारी गांव पहुंचे, मगर तब तक शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। किसान पर किस बैंक और किस साहूकार का कर्ज था। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस भी इसकी जांच में जुट गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक किसान रतन के परिवार पास 15 बीघा जमीन है और यही आजीविका का एकमात्र साधन है। महंगाई के लगातार बढ़ने और फसलों का उचित मूल्य न मिलने की वजह से परिवार की आर्थिक हालत तंग होती चली गई। ऐसे में कई साल से रतन के सामने परिवार के पालन पोषण की चुनौती बनी हुई थी। शादी के बाद से बड़ा बेटा धन सिंह अलग रहने लगा था, जबकि छोटे बेटे पिंटू को वह अपने साथ ही रखते थे।
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घटना के बाद छोटे बेटे पिंटू ने पुलिस को बताया कि उनके पिता पर बैंक और साहूकार का करीब पांच लाख रुपये कर्ज था, जिसे लेकर घर में टेंशन का माहौल रहता था। साथ ही छोटी बेटी भी 26 साल की हो गई थी, जिसकी शादी की भी चिंता उन्हें खाए जा रही थी।
पिछले दिनों रतन ने चार बीघा जमीन बेचकर एक साहूकार का कर्ज उतारा था। इसके बाद से रतन और टेंशन में आ गए थे। बताया कि शनिवार को घटना से पहले उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि उनके पिता इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। घटना का पता चलते ही गांव के लोग उनके घर जमा हो गए। सुबह होते ही पुलिस को सूचना दिए बगैर तीनों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि बाद में पुलिस को सूचना मिली। सीओ बृजेश कुमार सिंह फोरेंसिक टीम के साथ गांव पहुंचे और परिजन तथा ग्रामीणों से जानकारी ली।
हर गांव और हर गली में फैला सूदखोरों का जाल
सहारनपुर। कर्ज में डूबे परिवार के तीन सदस्यों ने आत्म हत्या कर ली। कर्ज बैंक और एक साहूकार का बताया जा रहा है। अब यह साहूकार कौन है यह भी बड़ा सवाल है। दरअसल, पिछले करीब एक दशक से प्रत्येक गांव और गली में सूदखोर सक्रिय हुए हैं, जो लोगों को दस से 50 हजार रुपये तक का कर्ज भोले-भाले लोगों को देकर उनसे डबल वसूली करते हैं। ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं, जब कर्ज में डूबे लोगों ने खुद को बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई।
शहर से लेकर देहात तक सूदखोरों के एजेंट सक्रिय हैं। यह लोग अशिक्षित लोगों या महिलाओं को अपना ग्राहक बनाते हैँ। दस हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक किसी भी व्यक्ति को आसानी से मोटे ब्याज पर देते हैं। इसके बाद हर माह किस्त की वसूली करते हैं। आम आदमी ने एक बार कर्ज ले लिया तो फिर वह किस्त चुकाते-चुकाते थक जाता है, मगर कर्ज नहीं उतरता। वर्तमान में भी लगभग प्रत्येक गांव में कई लोग ऐसे हैं, जो कर्ज में डूबे होने से टेंशन में हैं।
शहर में भी कई ऐसे लोग प्रशासन से सूदखोरों की शिकायत कर चुके हैं। अब यह सूदखोर वैैैध हैं या अवैध यह जांच का विषय है। साथ ही यह सूदखोर किस हिसाब से ब्याज वसूलते हैं, यह भी जांच का विषय है। पिछले कुछ दिन से एक गांव की सैकड़ों महिलाएं ऐसे ही सूदखोरों की मनमानी से परेशान होकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर चुकी हैं।
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सूचना मिलते ही सीओ और अन्य अधिकारी गांव पहुंचे, मगर तब तक शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। किसान पर किस बैंक और किस साहूकार का कर्ज था। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस भी इसकी जांच में जुट गई है।
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ग्रामीणों के मुताबिक किसान रतन के परिवार पास 15 बीघा जमीन है और यही आजीविका का एकमात्र साधन है। महंगाई के लगातार बढ़ने और फसलों का उचित मूल्य न मिलने की वजह से परिवार की आर्थिक हालत तंग होती चली गई। ऐसे में कई साल से रतन के सामने परिवार के पालन पोषण की चुनौती बनी हुई थी। शादी के बाद से बड़ा बेटा धन सिंह अलग रहने लगा था, जबकि छोटे बेटे पिंटू को वह अपने साथ ही रखते थे।
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घटना के बाद छोटे बेटे पिंटू ने पुलिस को बताया कि उनके पिता पर बैंक और साहूकार का करीब पांच लाख रुपये कर्ज था, जिसे लेकर घर में टेंशन का माहौल रहता था। साथ ही छोटी बेटी भी 26 साल की हो गई थी, जिसकी शादी की भी चिंता उन्हें खाए जा रही थी।
पिछले दिनों रतन ने चार बीघा जमीन बेचकर एक साहूकार का कर्ज उतारा था। इसके बाद से रतन और टेंशन में आ गए थे। बताया कि शनिवार को घटना से पहले उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि उनके पिता इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। घटना का पता चलते ही गांव के लोग उनके घर जमा हो गए। सुबह होते ही पुलिस को सूचना दिए बगैर तीनों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि बाद में पुलिस को सूचना मिली। सीओ बृजेश कुमार सिंह फोरेंसिक टीम के साथ गांव पहुंचे और परिजन तथा ग्रामीणों से जानकारी ली।
हर गांव और हर गली में फैला सूदखोरों का जाल
सहारनपुर। कर्ज में डूबे परिवार के तीन सदस्यों ने आत्म हत्या कर ली। कर्ज बैंक और एक साहूकार का बताया जा रहा है। अब यह साहूकार कौन है यह भी बड़ा सवाल है। दरअसल, पिछले करीब एक दशक से प्रत्येक गांव और गली में सूदखोर सक्रिय हुए हैं, जो लोगों को दस से 50 हजार रुपये तक का कर्ज भोले-भाले लोगों को देकर उनसे डबल वसूली करते हैं। ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं, जब कर्ज में डूबे लोगों ने खुद को बचाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई।
शहर से लेकर देहात तक सूदखोरों के एजेंट सक्रिय हैं। यह लोग अशिक्षित लोगों या महिलाओं को अपना ग्राहक बनाते हैँ। दस हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक किसी भी व्यक्ति को आसानी से मोटे ब्याज पर देते हैं। इसके बाद हर माह किस्त की वसूली करते हैं। आम आदमी ने एक बार कर्ज ले लिया तो फिर वह किस्त चुकाते-चुकाते थक जाता है, मगर कर्ज नहीं उतरता। वर्तमान में भी लगभग प्रत्येक गांव में कई लोग ऐसे हैं, जो कर्ज में डूबे होने से टेंशन में हैं।
शहर में भी कई ऐसे लोग प्रशासन से सूदखोरों की शिकायत कर चुके हैं। अब यह सूदखोर वैैैध हैं या अवैध यह जांच का विषय है। साथ ही यह सूदखोर किस हिसाब से ब्याज वसूलते हैं, यह भी जांच का विषय है। पिछले कुछ दिन से एक गांव की सैकड़ों महिलाएं ऐसे ही सूदखोरों की मनमानी से परेशान होकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर चुकी हैं।