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कांग्रेस ने खोयी साख, इस बार रही खाली हाथ
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सहारनपुर। पिछले चुनाव में जनपद में दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने वाली कांग्रेस इस बार खाली हाथ रही। हालांकि गत चुनाव में कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन था। इसके चलते 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशियों ने बढ़िया प्रदर्शन किया था। चुनाव से पहले दोनों विधायकों और पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस के प्रदर्शन पर बड़ा असर पड़ा है।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बेहट विधानसभा सीट पर कांग्रेस के नरेश सैनी ने भाजपा के महावीर राणा को 25586 वोटों से हराया था। सहारनपुर देहात से कांग्रेस के मसूद अख्तर ने बसपा के जगपाल सिंह को 12324 वोटों से हराकर विजय हासिल की थी। नकुड़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस के इमरान मसूद मात्र 4057 वोटों से ही पराजित हुए थे। रामपुर मनिहारान से कांग्रेस के विश्वदयाल छोटन तीसरे स्थान और गंगोह से नोमान मसूद दूसरे स्थान पर रहे थे। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक इमरान मसूद और सहारनपुर देहात से विधायक मसूद अख्तर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। इसके अलावा बेहट से विधायक नरेश सैनी ने भाजपा का दामन थाम लिया। पिछले चुनाव में दो सीटों पर कब्जा करने वाली कांग्रेस इस बार न सिर्फ खाली हाथ रही बल्कि उसका कोई प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा पाया है। कांग्रेस ने सभी सातों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। माना जा रहा है कि कद्दावर नेताओं के पार्टी छोड़ने का असर कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ा है।
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वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बेहट विधानसभा सीट पर कांग्रेस के नरेश सैनी ने भाजपा के महावीर राणा को 25586 वोटों से हराया था। सहारनपुर देहात से कांग्रेस के मसूद अख्तर ने बसपा के जगपाल सिंह को 12324 वोटों से हराकर विजय हासिल की थी। नकुड़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस के इमरान मसूद मात्र 4057 वोटों से ही पराजित हुए थे। रामपुर मनिहारान से कांग्रेस के विश्वदयाल छोटन तीसरे स्थान और गंगोह से नोमान मसूद दूसरे स्थान पर रहे थे। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक इमरान मसूद और सहारनपुर देहात से विधायक मसूद अख्तर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। इसके अलावा बेहट से विधायक नरेश सैनी ने भाजपा का दामन थाम लिया। पिछले चुनाव में दो सीटों पर कब्जा करने वाली कांग्रेस इस बार न सिर्फ खाली हाथ रही बल्कि उसका कोई प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा पाया है। कांग्रेस ने सभी सातों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। माना जा रहा है कि कद्दावर नेताओं के पार्टी छोड़ने का असर कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ा है।
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