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गोद लिए गांव में बदहाली देखने पहुंचे कमिश्नर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:08 AM IST
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कमिश्नर के समक्ष लोगों को समझाते अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर मेंं कमिश्नर दीपक अग्रवाल बृहस्पतिवार को अपने गोद लिए गांव मल्हीपुर पहुंचे। उन्होंने सरकारी स्कूल परिसर में ग्रामीणों के साथ बैठक की। ग्रामीणों ने उन्हें अपनी आवास, शौचालय, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराया।
कमिश्नर के सामने ही लोगों के बीच कई बार नोकझोंक हुई। कमिश्नर ने ग्रामीणों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। अमर उजाला ने 16 जुलाई को कमिश्नर के गोद लिए गांव का लाइव किया था।
गांव में 30 से अधिक परिवार कच्चे मकानों में रहते मिले थे। गांव की सड़कें और नालियां भी बदहाल मिली थीं। 17 जुलाई के संस्करण में अमर उजाला ने गांव की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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कमिश्नर ने जल्द ही गांव का दौरा करने की बात कही थी। जिसके बाद बृहस्पतिवार यानी तीन अगस्त को कमिश्नर गांव पहुंचे। हालांकि उनका गांव पहुंचना पहले से तय था।
यही वजह है कि गांव में तीन दिन से सफाई व्यवस्था चल रही थी। खामियों को छुपाने का प्रयास किया गया। कमिश्नर के पहुंचने से पहले गांव में चूना आदि का छिड़काव कर दिया गया था।
गांव के सरकारी स्कूल में कमिश्नर के बैठने की व्यवस्था की गई थी। कमिश्नर ने स्कूल परिसर में ग्रामीणों के साथ बैठक की। ग्रामीणों ने उन्हें आवास, शौचालय, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से अवगत कराया।
जिन लोगों को अभी तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है उन्होंने भी अपना दर्द कमिश्नर के समक्ष बयां किया। कई बार लोगों यहां तक की महिलाओं के बीच कमिश्नर के सामने ही नोकझोंक हुई।
कमिश्नर ने खुद महिलाओं को रोका। कमिश्नर को बताया गया कि गांव में पांच वर्ष से कम आयु के 45 बच्चे कुपोषित हैं। मिड-डे मील में बार-बार कीड़े निकलने की शिकायत की गई।
रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज बनवाने की मांग की। कमिश्नर ने एक-एक ग्रामीण की समस्या को सुनने के बाद नोट किया और निस्तारण कराने का आश्वासन दिया।
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कमिश्नर के सामने ही लोगों के बीच कई बार नोकझोंक हुई। कमिश्नर ने ग्रामीणों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। अमर उजाला ने 16 जुलाई को कमिश्नर के गोद लिए गांव का लाइव किया था।
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गांव में 30 से अधिक परिवार कच्चे मकानों में रहते मिले थे। गांव की सड़कें और नालियां भी बदहाल मिली थीं। 17 जुलाई के संस्करण में अमर उजाला ने गांव की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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कमिश्नर ने जल्द ही गांव का दौरा करने की बात कही थी। जिसके बाद बृहस्पतिवार यानी तीन अगस्त को कमिश्नर गांव पहुंचे। हालांकि उनका गांव पहुंचना पहले से तय था।
यही वजह है कि गांव में तीन दिन से सफाई व्यवस्था चल रही थी। खामियों को छुपाने का प्रयास किया गया। कमिश्नर के पहुंचने से पहले गांव में चूना आदि का छिड़काव कर दिया गया था।
गांव के सरकारी स्कूल में कमिश्नर के बैठने की व्यवस्था की गई थी। कमिश्नर ने स्कूल परिसर में ग्रामीणों के साथ बैठक की। ग्रामीणों ने उन्हें आवास, शौचालय, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से अवगत कराया।
जिन लोगों को अभी तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है उन्होंने भी अपना दर्द कमिश्नर के समक्ष बयां किया। कई बार लोगों यहां तक की महिलाओं के बीच कमिश्नर के सामने ही नोकझोंक हुई।
कमिश्नर ने खुद महिलाओं को रोका। कमिश्नर को बताया गया कि गांव में पांच वर्ष से कम आयु के 45 बच्चे कुपोषित हैं। मिड-डे मील में बार-बार कीड़े निकलने की शिकायत की गई।
रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज बनवाने की मांग की। कमिश्नर ने एक-एक ग्रामीण की समस्या को सुनने के बाद नोट किया और निस्तारण कराने का आश्वासन दिया।