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अभी लंबी चलेगी सीबीआई की जांच
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सहारनपुर। खनन के पट्टों का अवैध नवीनीकरण और अवैध खनन को लेकर सीबीआई की जांच अभी लंबी चलेगी। क्योंकि सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद तमाम दस्तावेज जुटाए हैं, जिनसे यह पता लगाया जा रहा है कि पट्टों के नवीनीकरण की प्रक्रिया नियमानुसार क्यों नहीं हुई थी। वहीं, बसपा एमएलसी महमूद अली की तरफ से सीबीआई को दिए बयान में पट्टों के अवैध नवीनीकरण के आरोप को गलत बताया है।
सीबीआई की टीम बीते कई दिन से सहारनपुर में आई हुई है और सितंबर 2019 में दर्ज मामले की पड़ताल करने में जुटी है। इस मामले में बसपा एमएलसी महमूद अली, पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल के पुत्र वाजिद और दो पूर्व जिलाधिकारी सहित 12 लोग नामजद हुए थे। पूर्व में जब सीबीआई सहारनपुर इसी प्रकरण की छानबीन करने आई थी, तो खनिज विभाग से काफी दस्तावेज जुटाए गए थे। उन दस्तावेजों में उन सवालों के जवाब खंगाले जा रहे हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि खनन के पट्टों का नवीनीकरण किस आधार पर किया गया था। क्योंकि पूर्व में यहां जिलाधिकारी रहे पवन कुमार और अजय कुमार सिंह के समय में पट्टों का नवीनीकरण कराया गया था।
वहीं, बसपा के एमएलसी महमूद अली ने बुधवार को सीबीआई टीम के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया, साथ ही उन्होंने 24 बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा, जिसमें कहा कि वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली के तहत नीलामी प्रक्रिया से पट्टे दिए जाने का आदेश शासन दिया था, जबकि उनके पट्टों का पहला नवीनीकरण 2011 में लागू खनन नीति के अनुसार हुआ था।
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सीबीआई की टीम बीते कई दिन से सहारनपुर में आई हुई है और सितंबर 2019 में दर्ज मामले की पड़ताल करने में जुटी है। इस मामले में बसपा एमएलसी महमूद अली, पूर्व एमएलसी मोहम्मद इकबाल के पुत्र वाजिद और दो पूर्व जिलाधिकारी सहित 12 लोग नामजद हुए थे। पूर्व में जब सीबीआई सहारनपुर इसी प्रकरण की छानबीन करने आई थी, तो खनिज विभाग से काफी दस्तावेज जुटाए गए थे। उन दस्तावेजों में उन सवालों के जवाब खंगाले जा रहे हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि खनन के पट्टों का नवीनीकरण किस आधार पर किया गया था। क्योंकि पूर्व में यहां जिलाधिकारी रहे पवन कुमार और अजय कुमार सिंह के समय में पट्टों का नवीनीकरण कराया गया था।
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वहीं, बसपा के एमएलसी महमूद अली ने बुधवार को सीबीआई टीम के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया, साथ ही उन्होंने 24 बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा, जिसमें कहा कि वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली के तहत नीलामी प्रक्रिया से पट्टे दिए जाने का आदेश शासन दिया था, जबकि उनके पट्टों का पहला नवीनीकरण 2011 में लागू खनन नीति के अनुसार हुआ था।
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