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मूलभूत सविधाओं का टोटा, कैसे बनेंगे स्मार्ट विलेज
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सहारनपुर। गांवों को स्मार्ट बनाने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रधानों से अपील की है, मगर जिले के अनेक गांवों में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। शाकंभरी क्षेत्र के अनेक गांवों में मोबाइल का नेटवर्क नहीं है तो, ऐसे में इंटरनेट की बात बेमानी है। गंगोह के यमुना खादर के गांवों में आज भी रास्तों पर जलभराव और गंदगी के चलते राह दुश्वार है। संक्रामक इस क्षेत्र में हर साल कहर बरपाता हैं। ऐसे में स्मार्ट ग्राम का सपना देखना भी बेमानी होगी।
- कट जाता है मुख्यालय से गांवों का संपर्क
शाकंभरी क्षेत्र में शिवालिक तलहटी कई गांवों मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। कोठड़ी ग्राम समूह के मजरे गांव कोठड़ी चेतराम, दोस्त मोहम्मद, खुशीराम, तुलसी, परियान, धर्म सिंह, भिक्खू एवं रामपुर, बड़कलां, इंद्रपुर तालड़ा आदि कई गांव चारो तरफ से बरसाती नदियों से घिरे हैं। बरसात में इनका तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा रहता है। गर्मी में 300 से 400 फिट की गहराई पर लगे हैंडपंप भी जवाब दे जाते हैं। गला तर करने को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। टेलीकॉम नेटवर्क टावर न होने से फोन की सुविधा भी नहीं है। कई दिनों तक आपूर्ति ठप रहती है। रामपुर बड़कलां के पूर्व प्रधान भोपाल सिंह, प्रधान संजय चौधरी, कोठड़ी के पूर्व प्रधान चौधरी ताहिर, अंकित चौहान, राजकुमार राठौड़ आदि का कहना है कि उनकी कई पीढियां इन समस्याओं से जूझती आ रही हैं, लेकिन सुधार नहीं हो सका।
उपेक्षा का शिकार है खादर क्षेत्र
गंगोह यमुना खादर के करीब एक दर्जन गांवों की हालत बदहाल है। इन गांव हलवाना, नाई मजरा, दौलतपुर, बानूखेड़ी, बेगी, कुंडा खुर्द आदि गांव यमुना नदी से सटे यूपी की सीमा के आखिरी छोर पर बसे हैं। इन गांवों में आज तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इंटर तक की शिक्षा के लिए भी 15 से 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ग्रामीण मुस्तफा, अमिताभ गर्ग, अरविंद चौधरी, जनेश्वर प्रसाद आदि का कहना है आजादी के बाद से यह क्षेत्र जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार रहा हैं।
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दूषित पानी पीने को हैं मजबूर
देवबंद क्षेत्र में धर्मपुर व हुलासगढ़ मजरों से बनी 3000 की आबादी वाली ग्राम पंचायत भवनपुर में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। पढ़ाई के लिए बच्चों को छह किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का भी गांव में कोई प्रबंध नहीं है। हैंडपंपों का दूषित पानी ही पीना पड़ता है। इलाज के लिए ग्रामीणों को 12 किलोमीटर दूर देवबंद जाना पड़ता है।
आबादी के बीच गंदे पानी का जमाव
सहारनपुर। गांव नन्दी फिरोजपुर से एक जागरूक पाठक ने गांव में साफ सफाई की अव्यवस्था को लेकर फोटो अमर उजाला को भेजी। गांव में आबादी के बीच गंदे पानी का जमाव है। इससे मच्छरों का प्रकोप फैलता है तो बीमारी फैलने का भी खतरा है। यह आलम तब है, जबकि हाल में ही ग्राम पंचायतों का गठन हुआ और गांव दर गांव सैनिटाइजेशन और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने का अभियान तक चल रहा है।
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- कट जाता है मुख्यालय से गांवों का संपर्क
शाकंभरी क्षेत्र में शिवालिक तलहटी कई गांवों मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। कोठड़ी ग्राम समूह के मजरे गांव कोठड़ी चेतराम, दोस्त मोहम्मद, खुशीराम, तुलसी, परियान, धर्म सिंह, भिक्खू एवं रामपुर, बड़कलां, इंद्रपुर तालड़ा आदि कई गांव चारो तरफ से बरसाती नदियों से घिरे हैं। बरसात में इनका तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा रहता है। गर्मी में 300 से 400 फिट की गहराई पर लगे हैंडपंप भी जवाब दे जाते हैं। गला तर करने को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। टेलीकॉम नेटवर्क टावर न होने से फोन की सुविधा भी नहीं है। कई दिनों तक आपूर्ति ठप रहती है। रामपुर बड़कलां के पूर्व प्रधान भोपाल सिंह, प्रधान संजय चौधरी, कोठड़ी के पूर्व प्रधान चौधरी ताहिर, अंकित चौहान, राजकुमार राठौड़ आदि का कहना है कि उनकी कई पीढियां इन समस्याओं से जूझती आ रही हैं, लेकिन सुधार नहीं हो सका।
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उपेक्षा का शिकार है खादर क्षेत्र
गंगोह यमुना खादर के करीब एक दर्जन गांवों की हालत बदहाल है। इन गांव हलवाना, नाई मजरा, दौलतपुर, बानूखेड़ी, बेगी, कुंडा खुर्द आदि गांव यमुना नदी से सटे यूपी की सीमा के आखिरी छोर पर बसे हैं। इन गांवों में आज तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इंटर तक की शिक्षा के लिए भी 15 से 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ग्रामीण मुस्तफा, अमिताभ गर्ग, अरविंद चौधरी, जनेश्वर प्रसाद आदि का कहना है आजादी के बाद से यह क्षेत्र जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार रहा हैं।
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दूषित पानी पीने को हैं मजबूर
देवबंद क्षेत्र में धर्मपुर व हुलासगढ़ मजरों से बनी 3000 की आबादी वाली ग्राम पंचायत भवनपुर में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। पढ़ाई के लिए बच्चों को छह किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। स्वच्छ पेयजल आपूर्ति का भी गांव में कोई प्रबंध नहीं है। हैंडपंपों का दूषित पानी ही पीना पड़ता है। इलाज के लिए ग्रामीणों को 12 किलोमीटर दूर देवबंद जाना पड़ता है।
आबादी के बीच गंदे पानी का जमाव
सहारनपुर। गांव नन्दी फिरोजपुर से एक जागरूक पाठक ने गांव में साफ सफाई की अव्यवस्था को लेकर फोटो अमर उजाला को भेजी। गांव में आबादी के बीच गंदे पानी का जमाव है। इससे मच्छरों का प्रकोप फैलता है तो बीमारी फैलने का भी खतरा है। यह आलम तब है, जबकि हाल में ही ग्राम पंचायतों का गठन हुआ और गांव दर गांव सैनिटाइजेशन और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने का अभियान तक चल रहा है।