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चार हजार वर्ष पुरानी थी सकतपुर में खुदाई में मिली तांबे की चूडियां
Updated Wed, 28 Mar 2018 12:05 AM IST
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चार हजार वर्ष पुरानी थी सकतपुर में खुदाई में मिली तांबे की चूडियां
रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। सकतपुर में किए गए उत्खनन में मिली तांबे की चूड़ियों और अवशेष पूना लैब में जांच के बाद चार हजार वर्ष व दो हजार ईसा पूर्व के पाए गए हैं।
बता दें कि गांव सकतपुर में 23 फरवरी 2017 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षक डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व व पुरातत्वविद डा. अर्खित प्रधान की देखरेख में टीम ने करीब छह माह तक 20 ट्रेंचों पर करीब 141 दिन तक उत्खनन का कार्य किया गया था। इसमें पक्की मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, बर्तनों के अवशेष, तांबे की चूड़ियां, खिलौना गाड़ी के पहिए के अवशेष, मुष्टिका, पशु आकृति, पत्थर का सिल बट्टा, दाल के बीज, कोयला, विशाल काय जानवर का जबड़ा, मिट्टी के बर्तनों पर शानदार डिजाइन व सजावट वाले बर्तनों के अवशेष, दो पक्की व एक कच्ची भट्ठी तीन और पक्की भट्ठी ,तीन सिल बट्टे व पक्षी को गुलेल मारने में इस्तेमाल की जाने वाली शंवाग बॉल भी मिली थी। पुरातत्वविद उत्खनन में निकले सभी अवशेषों को अपने साथ आगरा ले गए थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षण डा. भुवन विक्रम ने फोन पर बताया कि गांव सकतपुर में निकले अवशेषों की जांच पूना लैब में पूरी हो चुकी है। जांच में पाया गया है कि मेरठ, सरसावा, बागपत आदि में मिले अवशेष समकालीन हैं। करीब चार हजार वर्ष व दो हजार ईसा पूर्व पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि उत्खनन में विशेष बात यह रही है कि एक स्थान पर तांबे की अनेकों चूडियां मिली थी जो जांच में चार हजार वर्ष पुरानी पाई गई हैं। अभी आगरा लैब में भी अवशेषों की जांच अंतिम चरण में है।
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रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। सकतपुर में किए गए उत्खनन में मिली तांबे की चूड़ियों और अवशेष पूना लैब में जांच के बाद चार हजार वर्ष व दो हजार ईसा पूर्व के पाए गए हैं।
बता दें कि गांव सकतपुर में 23 फरवरी 2017 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षक डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व व पुरातत्वविद डा. अर्खित प्रधान की देखरेख में टीम ने करीब छह माह तक 20 ट्रेंचों पर करीब 141 दिन तक उत्खनन का कार्य किया गया था। इसमें पक्की मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, बर्तनों के अवशेष, तांबे की चूड़ियां, खिलौना गाड़ी के पहिए के अवशेष, मुष्टिका, पशु आकृति, पत्थर का सिल बट्टा, दाल के बीज, कोयला, विशाल काय जानवर का जबड़ा, मिट्टी के बर्तनों पर शानदार डिजाइन व सजावट वाले बर्तनों के अवशेष, दो पक्की व एक कच्ची भट्ठी तीन और पक्की भट्ठी ,तीन सिल बट्टे व पक्षी को गुलेल मारने में इस्तेमाल की जाने वाली शंवाग बॉल भी मिली थी। पुरातत्वविद उत्खनन में निकले सभी अवशेषों को अपने साथ आगरा ले गए थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षण डा. भुवन विक्रम ने फोन पर बताया कि गांव सकतपुर में निकले अवशेषों की जांच पूना लैब में पूरी हो चुकी है। जांच में पाया गया है कि मेरठ, सरसावा, बागपत आदि में मिले अवशेष समकालीन हैं। करीब चार हजार वर्ष व दो हजार ईसा पूर्व पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि उत्खनन में विशेष बात यह रही है कि एक स्थान पर तांबे की अनेकों चूडियां मिली थी जो जांच में चार हजार वर्ष पुरानी पाई गई हैं। अभी आगरा लैब में भी अवशेषों की जांच अंतिम चरण में है।
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