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कभी नहीं बदलता परमात्मा से रिश्ता: विजय देव
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:33 AM IST
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कभी नहीं बदलता परमात्मा से रिश्ता : विजय देव
सहारनपुर। तेलीपुरा आर्य समाज का पांचवां वार्षिकोत्सव ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ। पहले दिन मंत्रोच्चारण के साथ हवन यज्ञ हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान प्रधान सुशील कुमार, अमित कुमार सैनी, मनीष कुमार और मांगेराम सैनी रहे। भजन उपदेशक प्रमोद कुमार आर्य ने भजनों के माध्यम से मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि संसार में हर रिश्ता बदल सकता है। एकमात्र परमात्मा का ऐसा रिश्ता है, जो कभी नहीं बदलता और न ही कभी परमात्मा हमें छोड़ते हैं। इसलिए हमें कभी परमात्मा की भक्ति नहीं भूलनी चाहिए। मनुष्य अपने दुख से दुखी नहीं बल्कि दूसरों के सुखी होने से दुखी होता है। इसलिए हमें हमेशा अपने कर्म अच्छे करते रहना चाहिए। ताकि हम शरीर और मन दोनों से खुश रहें। आचार्य विजय देव ने कहा कि जिस तरह गंदे पात्र में हम कभी खाने का सामान नहीं डाल सकते, उसी तरह जब तक हमारे मन से बुराईयां दूर नहीं होंगी, तब तक हम अच्छाइयों को नहीं अपना सकते। उन्होंने कहा एकमात्र आर्य समाज ऐसा है, जो लोगों को सतमार्ग पर ले जाता है। आर्य समाज के प्रधान सुशील कुमार, प्रेमचंद, राज कुमार, सुरेश कुमार, ब्रह्मदेव आर्य, सुरेंद्र सैनी, मोहन सिंह, नाथीराम, राम किशोरी सैनी, मनीराम सैनी, मुनेश आर्य, अंकित, कार्तिक आर्य, अनुज, दिनेश, राजू प्रजापति, दीपक कुमार, शुभम सैनी, प्रदीप आर्य आदि मौजूद रहे।
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सहारनपुर। तेलीपुरा आर्य समाज का पांचवां वार्षिकोत्सव ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ। पहले दिन मंत्रोच्चारण के साथ हवन यज्ञ हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान प्रधान सुशील कुमार, अमित कुमार सैनी, मनीष कुमार और मांगेराम सैनी रहे। भजन उपदेशक प्रमोद कुमार आर्य ने भजनों के माध्यम से मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि संसार में हर रिश्ता बदल सकता है। एकमात्र परमात्मा का ऐसा रिश्ता है, जो कभी नहीं बदलता और न ही कभी परमात्मा हमें छोड़ते हैं। इसलिए हमें कभी परमात्मा की भक्ति नहीं भूलनी चाहिए। मनुष्य अपने दुख से दुखी नहीं बल्कि दूसरों के सुखी होने से दुखी होता है। इसलिए हमें हमेशा अपने कर्म अच्छे करते रहना चाहिए। ताकि हम शरीर और मन दोनों से खुश रहें। आचार्य विजय देव ने कहा कि जिस तरह गंदे पात्र में हम कभी खाने का सामान नहीं डाल सकते, उसी तरह जब तक हमारे मन से बुराईयां दूर नहीं होंगी, तब तक हम अच्छाइयों को नहीं अपना सकते। उन्होंने कहा एकमात्र आर्य समाज ऐसा है, जो लोगों को सतमार्ग पर ले जाता है। आर्य समाज के प्रधान सुशील कुमार, प्रेमचंद, राज कुमार, सुरेश कुमार, ब्रह्मदेव आर्य, सुरेंद्र सैनी, मोहन सिंह, नाथीराम, राम किशोरी सैनी, मनीराम सैनी, मुनेश आर्य, अंकित, कार्तिक आर्य, अनुज, दिनेश, राजू प्रजापति, दीपक कुमार, शुभम सैनी, प्रदीप आर्य आदि मौजूद रहे।