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सहारनपुर: सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्णय पर जिला जज की अदालत ने लगाई मुहर, कलक्ट्रेट की मस्जिद को बताया अवैध

Thu, 03 Sep 2026 08:11 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Thu, 03 Sep 2026 08:11 PM IST
सार

बजरंग दल नेता विकास त्यागी ने शिकायत की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने मस्जिद को अवैध करार दिया था। जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट में याचिका दी गई, तो उन्होंने भी फैसले को यथावत रखा है।

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Saharanpur: District Judge's court upholds City Magistrate Court's decision, declares mosque illegal.
कलक्ट्रेट स्थित मस्जिद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मामले पर सुनवाई करते हुए जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भूमि केसर-ए-हिंद मतलब सरकार की है। अदालत ने मस्जिद पक्ष की ओर से दायर याचिका को निरस्त कर दिया।
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मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में याचिका दायर कर सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय के 16 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि सिटी मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा तथ्यों को दरकिनार करते हुए फैसला दिया गया है। मस्जिद पक्ष की ओर से कहा गया कि मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। ऐसे में मस्जिद वक्फ संपत्ति है। इसकी सुनवाई का अधिकार सुन्नी वक्फ सेंट्रल बोर्ड लखनऊ को है।
 
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उन्होंने दलील दी कि 1991 का वर्शिप एक्ट भी 15 अगस्त 1947 से पहले बने धार्मिक ढांचे की स्थिति को यथावत रखने की अनुमति देता है। साथ ही यह भी दलील रखी कि खेवट नंबर 10/1 आज भी रिकॉर्ड के मुताबिक वाहिद खान, याकूब खान के नाम है। यह संपत्ति आज भी उनके नाम चली आ रही है। संपत्ति 1947 से पहले की है। मस्जिद पक्ष की ओर से एक जनवरी 1911 के बिजली बिल, नगर पालिका परिषद में दर्ज नाम समेत अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया।
 
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शासकीय अधिवक्ताओं ने रखीं अपनी-अपनी दलील और साक्ष्य
शासकीय अधिवक्ता विनय चौहान और सहायक शासकीय अधिवक्ता अविनाश त्यागी ने पक्ष रखा। अदालत के सामने दलील दी कि बिजली के जिस बिल को अदालत के समक्ष रखा गया है। वह रविवार अवकाश वाले दिन का है। इसके साथ ही महानगर में 1922 में बिजली पहुंची थी। इसका वितरण 1928 से शुरू हुआ। बताया कि खसरा नंबर 539 रकबा 5.780 हेक्टेयर ग्राम पठानपुरा तहसील व जिला कचहरी कलक्ट्रेट स्थित है। फसली वर्ष 1296 जो 1888-89 होता है।

भूमि केसर-ए-हिंद के नाम है, साथ ही कलक्ट्रेट कचहरी भी दर्ज है। भूमि बाद में भारत सरकार को हस्तांतरित हो गई। पहले खसरा नंबर 383 और खेवट नंबर 31 था, जो बाद में बदलकर खसरा नंबर 539 हो गया है। 1324 और 1359 फसली वर्ष में भी कलक्ट्रेट-कचहरी दर्ज है। मस्जिद दर्ज होने के कोई प्रमाण नहीं है। खेवट में नाम दर्ज होने के मामले पर शासकीय अधिवक्ताओं ने दलील दी कि भूमि सरकारी है। वर्शिप एक्ट के मामले पर अधिवक्ताओं ने दलील रखते हुए कहा कि एक्ट के प्रावधानों के तहत यह प्रभावी नहीं है। कब्जा सरकारी भूमि पर किया गया है।
 

20 जुलाई 2026 को दाखिल हुई थी याचिका, महज 17 तारीखों में फैसला
जिला जज की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए 17 तारीखों में फैसला सुनाया है। मस्जिद पक्ष की ओर से 20 जुलाई 2026 को अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। इसके बाद अदालत ने नियमित सुनवाई करते हुए इस पर दो सितंबर को अपना अंतिम फैसला सुनाया।
 

निर्णय पढ़ने के बाद मस्जिद पक्ष आगे उठाएगा कदम
मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद ने बताया कि अभी ऑर्डर का अध्ययन नहीं किया है। ऑर्डर को देखने के बाद ही पक्ष आगे की कार्रवाई करेगा।
 

यह है मामला
बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को अवैध बताते हुए शिकायत की थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पीपी (अवैध अध्यासी अधिनियम) एक्ट के तहत वाद दायर हुआ। सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मामले पर सुनवाई करते हुए मस्जिद को अवैध करार दिया था। साथ ही 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
 

150 साल पुरानी होने का दावा साबित नहीं कर सका पक्ष
सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष ने दावा किया कि यह मस्जिद करीब 150 वर्ष पुरानी है, लेकिन अदालत के समक्ष इस दावे के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए उसे निर्धारित अवधि के भीतर हटाने का आदेश दिया था।

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