फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   How Is India’s Automobile Market Changing? Is the Dominance of Petrol Cars Coming to an End?

एक्सप्लेनर: कैसे बदल रहा भारत का ऑटोमोबाइल बाजार, क्या खत्म होने वाला है पेट्रोल वाली गाड़ियों का दबदबा?

Thu, 03 Sep 2026 04:47 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 03 Sep 2026 04:47 PM IST
विज्ञापन
सार
भारत के ऑटो बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। पेट्रोल-डीजल के साथ सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ रही है। जुलाई में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, वहीं पेट्रोल और वैकल्पिक ईंधनों के बीच अंतर घटकर सिर्फ 1.09 प्रतिशत अंक रह गया। आइए विस्तार से जानते हैं उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को।
loader
How Is India’s Automobile Market Changing? Is the Dominance of Petrol Cars Coming to an End?
ऑटोमोबाइल बाजार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में गाड़ी खरीदने वालों की पसंद में बदलाव हो रहा है। अब ग्राहक सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक जैसे विकल्प भी तेजी से चुन रहे हैं। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में हाल के महीनों में तेज उछाल देखने को मिला है।



ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का दायरा बढ़ता जा रहा है? वैकल्पिक ईंधन कैसे उपभोक्ताओं की पसंद बनते जा रहे हैं? क्या कहते हैं आंकड़े? उपभोक्ताओं की इस बदलती पसंद के पीछे की वजह क्या है?

कैसे बढ़ रही इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार?

इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग को समझने के लिए सबसे पहले पैसेंजर वाहनों के आंकड़ों पर नजर डालते हैं। वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश में 82,737 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण हुआ। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 43,710 था। यानी एक साल में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों के पंजीकरण में 89 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

इस बढ़त में टाटा मोटर्स सबसे आगे रही। अप्रैल से जून 2026 के दौरान कंपनी के 32,283 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण हुआ, जबकि एक साल पहले यह संख्या 15,794 थी। इसके बाद महिंद्रा का स्थान रहा, जिसके इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों के पंजीकरण 10,144 से बढ़कर 20,112 हो गए। वहीं, जेएसडब्ल्यू एमजी के 16,502 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 22 फीसदी ज्यादा है।

ईवी
ईवी - फोटो : Amar Ujala

जुलाई में इलेक्ट्रिक वाहनों ने बनाया नया रिकॉर्ड

पहली तिमाही की यह तेजी जुलाई में भी जारी रही। एफएडीए के मुताबिक, जुलाई 2026 में देश में कुल 3,27,901 इलेक्ट्रिक वाहन रिटेल हुए। यह किसी एक महीने में इलेक्ट्रिक वाहनों का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा। कुल वाहन रिटेल में ईवी की हिस्सेदारी करीब 12.7 फीसदी रही, जबकि जुलाई 2025 में यह 9.6 फीसदी थी।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़त सिर्फ कारों तक सीमित नहीं रही। जुलाई 2026 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 11.24 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले यह 7.65 फीसदी थी। तिपहिया वाहनों में इलेक्ट्रिक की हिस्सेदारी 65.08 फीसदी तक पहुंच गई। वहीं, कमर्शियल वाहनों में यह जुलाई 2025 के 1.65 फीसदी से बढ़कर 3.57 फीसदी हो गई।

वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी कैसे बढ़ी?

ईवी की बढ़ती बिक्री के साथ वाहन बाजार में पेट्रोल के अलावा दूसरे विकल्पों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। जुलाई 2026 में कुल वाहन रिटेल के ईंधन मिश्रण में पेट्रोल/एथेनॉल हिस्सेदारी 41.68 फीसदी रही। इसके बाद सीएनजी/एलपीजी की हिस्सेदारी 24.67 फीसदी, डीजल 17.73 फीसदी, हाइब्रिड 8.02 फीसदी और ईवी 7.90 फीसदी रही।

एक साल पहले यानी जुलाई 2025 में पेट्रोल/एथेनॉल की हिस्सेदारी 47.62 फीसदी थी, जो जुलाई 2026 में घटकर 41.68 फीसदी रह गई। इसके उलट सीएनजी/एलपीजी की हिस्सेदारी 21.38 फीसदी से बढ़कर 24.67 फीसदी और ईवी की हिस्सेदारी 5.14 फीसदी से बढ़कर 7.90 फीसदी हो गई। हाइब्रिड भी 7.89 फीसदी से बढ़कर 8.02 फीसदी हुआ। वहीं, डीजल की हिस्सेदारी 17.97 फीसदी से मामूली घटकर 17.73 फीसदी रही।

पेट्रोल और वैकल्पिक ईंधनों के बीच कितना रह गया अंतर?

इन आंकड़ों में सबसे दिलचस्प बदलाव पेट्रोल और दूसरे विकल्पों के बीच घटता अंतर है। जुलाई 2026 में सीएनजी/एलपीजी, हाइब्रिड और ईवी को एक साथ जोड़ने पर इनकी हिस्सेदारी 40.59 फीसदी हो जाती है। वहीं, पेट्रोल/एथेनॉल की हिस्सेदारी 41.68 फीसदी है। यानी दोनों के बीच अंतर सिर्फ 1.09 प्रतिशत अंक रह गया है।

जुलाई 2025 में यही अंतर 13.21 प्रतिशत का था। यानी एक साल में पेट्रोल और इन तीन वैकल्पिक विकल्पों के बीच का अंतर काफी तेजी से कम हुआ है। इससे पता चलता है कि वाहन बाजार में ग्राहकों की पसंद पहले की तुलना में ज्यादा विविध हो रही है।

कैसे मिल रही टक्कर?
कैसे मिल रही टक्कर? - फोटो : Amar Ujala

हाइब्रिड कैसे बना रहा जगह?

वैकल्पिक विकल्पों में हाइब्रिड भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। जुलाई 2025 में कुल वाहन रिटेल में हाइब्रिड की हिस्सेदारी 7.89 फीसदी थी, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 8.02 फीसदी हो गई।

हाइब्रिड वाहन में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल होता है। इसलिए यह उन ग्राहकों के लिए एक विकल्प बनता है जो इलेक्ट्रिक तकनीक का फायदा चाहते हैं, लेकिन पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन पर निर्भर नहीं होना चाहते।

दोपहिया और तिपहिया में बदलाव सबसे ज्यादा साफ

बदलती पसंद का असर दोपहिया और तिपहिया वाहनों में भी साफ दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 11.24 फीसदी रही, जबकि जुलाई 2025 में यह 7.65 फीसदी थी।

तिपहिया बाजार में बदलाव और ज्यादा स्पष्ट है। जुलाई 2026 में इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 65.08 फीसदी रही। यानी इस श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहन अब बेहद मजबूत विकल्प बन चुके हैं।

क्यों बदल रही पसंद?
क्यों बदल रही पसंद? - फोटो : Amar Ujala

उपभोक्ताओं की पसंद क्यों बदल रही है?

अब सवाल यह है कि आखिर ग्राहक पेट्रोल-डीजल से आगे दूसरे विकल्पों की ओर क्यों देख रहे हैं? इसके पीछे कोई एक कारण नहीं है। ईंधन की कीमत, गाड़ी का माइलेज, रोजाना चलने की दूरी, रखरखाव का खर्च, ईवी की बढ़ती उपलब्धता, चार्जिंग ढांचे का विस्तार और ई20 को लेकर बनी चिंताएं जैसे कई पहलू खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं।

पेट्रोल के दाम इस साल कैसे बढ़े?

राजधानी दिल्ली की बात करें तो 2026 की शुरुआत में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर था। अप्रैल के अंत तक यही कीमत बनी रही। इसके बाद मई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गई। यानी मई में ही इसमें ₹7.35 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद जून, जुलाई और अगस्त में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर पर बनी रही। सितंबर की शुरुआत में भी यही कीमत दर्ज है। पीपीएसी के रिकॉर्ड में जुलाई में भी दिल्ली का पेट्रोल मूल्य ₹102.12 प्रति लीटर दर्ज है।

पिछले साल से तुलना करें तो सितंबर 2025 में दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर था। अब यह ₹102.12 प्रति लीटर है। यानी एक साल में पेट्रोल करीब 7.8 फीसदी महंगा हुआ है।

कैसे है अंतर?
कैसे है अंतर? - फोटो : Amar Ujala

सीएनजी के दाम भी बढ़े, फिर भी चलाने का खर्च कम

दिल्ली में सीएनजी की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। अगस्त के अंत में सीएनजी की कीमत ₹83.09 प्रति किलो थी, जो 29 अगस्त के बाद बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गई। यानी इसमें ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। यह बढ़ोतरी आयातित एलएनजी की लागत बढ़ने के बीच हुई।

लेकिन ग्राहक के लिए सिर्फ ईंधन की कीमत मायने नहीं रखती, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उस ईंधन से गाड़ी कितनी दूरी तय करती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी पेट्रोल कार की औसत माइलेज 15 किलोमीटर प्रति लीटर है तो ₹102.12 प्रति लीटर की कीमत पर एक किलोमीटर चलाने में करीब ₹6.81 का पेट्रोल खर्च होगा। वहीं, अगर सीएनजी कार 20 किलोमीटर प्रति किलो की औसत माइलेज देती है तो ₹86.98 प्रति किलो की कीमत पर एक किलोमीटर का खर्च करीब ₹4.35 होगा।

यानी इस उदाहरण में सीएनजी से एक किलोमीटर पर करीब ₹2.46 की बचत होती है। 100 किलोमीटर चलाने पर यह अंतर करीब ₹246 और 1,000 किलोमीटर पर करीब ₹2,460 हो जाता है। हालांकि, वास्तविक खर्च गाड़ी के मॉडल, माइलेज, ट्रैफिक और ड्राइविंग के तरीके पर निर्भर करेगा।

यही वजह है कि सीएनजी की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रति किलोमीटर कम खर्च इसे पेट्रोल के मुकाबले ग्राहकों के लिए आकर्षक विकल्प बनाए रख सकता है।

ई20 को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

ईंधन की कीमत के अलावा पेट्रोल वाहनों के मामले में ई20 को लेकर बनी आशंकाएं भी चर्चा में हैं। ई20 यानी ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 फीसदी इथेनॉल मिलाया जाता है। इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने का उद्देश्य पेट्रोल में आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाना है।

हालांकि, ई20 के इस्तेमाल के बाद कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने, इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित होने और रबर पाइप तथा फ्यूल लाइन जैसे हिस्सों के जल्दी खराब होने की शिकायत की है। खास चिंता उन पुराने वाहनों को लेकर है, जिन्हें ई20 के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया था।

माइलेज को लेकर सरकार ने माना है कि कुछ वाहनों में ई20 इस्तेमाल करने पर 2 से 6 फीसदी तक माइलेज कम हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होती है। हालांकि, इसका असर हर वाहन में एक जैसा नहीं होगा।

ईवी पंजीकरण
ईवी पंजीकरण - फोटो : Amar Ujala

सीएनजी का नेटवर्क कितना बढ़ रहा है?

सीएनजी की बढ़ती मांग के साथ इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, सीएनजी स्टेशन स्थापित करना सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार का हिस्सा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने 307 भौगोलिक क्षेत्रों में सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विकास के लिए संस्थाओं को अधिकृत किया है। ये क्षेत्र करीब 733 जिलों और 34 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को कवर करते हैं और देश के लगभग 100 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र में फैले हैं। इसके तहत 2032 तक देशभर में 18,336 सीएनजी स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

ईवी को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां

ईवी की बढ़ती मांग के पीछे सरकारी नीतियों का भी योगदान है। फेम-दो योजना के तहत करीब 16.72 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को समर्थन मिला। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक चार्जिंग ढांचे के लिए भी सहायता दी गई।

इसके बाद सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना शुरू की। 10,900 करोड़ रुपये की इस योजना के तहत करीब 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। इसमें इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, ट्रक, बस और एंबुलेंस शामिल हैं।

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके चार्जर पर जीएसटी को 5 फीसदी रखा है। राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स में छूट देने की सलाह भी दी गई है। 7 अगस्त 2026 तक देश में 67,657 ईवी चार्जर स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है।

लंबी अवधि के आंकड़े भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, वाहन आंकड़ों में ईवी की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2019-20 में सिर्फ 0.71 फीसदी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 8.26 फीसदी हो गई। 26 जुलाई 2026 तक वाहन पोर्टल पर सभी श्रेणियों को मिलाकर 1,00,23,396 इलेक्ट्रिक वाहन दर्ज थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed