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जिस घर में माता पिता का सत्कार, वहां रहता है लक्ष्मी का वास: आचार्य
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जिस घर में माता पिता का सत्कार, वहां रहता है लक्ष्मी का वास: आचार्य
चिलकाना (सहारनपुर)। श्रीमद्देवी भागवत महापुराण कथा में कथा व्यास कुलदीप आचार्य ने तृतीय नवरात्र की देवी चंद्र घंटा के प्राकट्य के बारे में बताया और कहा की सब तीर्थ हमारे घर में ही है। माता पिता की सेवा करने से सब तीर्थों का पुण्य मिल जाता है। जहां माता पिता एवं बड़ों का सत्कार होता है, वहां भगवती लक्ष्मी के रूप में विराजमान रहती है।
सुल्तानपुर में चल रही श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा में कथा व्यास कुलदीप आचार्य ने मधु और कैटभ की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मधु कैटभ ने पृथ्वी पर चारो तरफ हाहाकार मचा दिया, तब मां भगवती को प्रकट होना पड़ा और उनका संहार किया। कथा व्यास आचार्य कुलदीप ने कहा कि जब-जब इस धरती पर अधर्म और पाप बढ़ता है, तब-तब ईश्वर किसी ना किसी रूप में अवतार लेकर मनुष्यों की रक्षा एवं धर्म की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मधु कैटभ हमारे जीवन में काम और अहंकार के रूप में आ जाते हैं, तभी हमें मां भगवती की आराधना करके जीवन को पतन की ओर जाने से बचाना चाहिये। मुख्य यजमान रूपेश अतिथि ब्रिजेश कुमार ने गणेशादि तथा नवग्रह की पूजा की। पूजा संजीव शास्त्री तथा आचार्य राहुल कृष्ण द्वारा कराई गई। आरती प्रधान तेजपाल सैनी तथा प्रधान संजय चौधरी द्वारा की गई। सीताराम सैनी, मनोज गुप्ता, पुन्नाराम, निशांक जैन, ऋषिपाल, सुंदर लाल सैनी, आशु सैनी आदि रहे।
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चिलकाना (सहारनपुर)। श्रीमद्देवी भागवत महापुराण कथा में कथा व्यास कुलदीप आचार्य ने तृतीय नवरात्र की देवी चंद्र घंटा के प्राकट्य के बारे में बताया और कहा की सब तीर्थ हमारे घर में ही है। माता पिता की सेवा करने से सब तीर्थों का पुण्य मिल जाता है। जहां माता पिता एवं बड़ों का सत्कार होता है, वहां भगवती लक्ष्मी के रूप में विराजमान रहती है।
सुल्तानपुर में चल रही श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा में कथा व्यास कुलदीप आचार्य ने मधु और कैटभ की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मधु कैटभ ने पृथ्वी पर चारो तरफ हाहाकार मचा दिया, तब मां भगवती को प्रकट होना पड़ा और उनका संहार किया। कथा व्यास आचार्य कुलदीप ने कहा कि जब-जब इस धरती पर अधर्म और पाप बढ़ता है, तब-तब ईश्वर किसी ना किसी रूप में अवतार लेकर मनुष्यों की रक्षा एवं धर्म की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मधु कैटभ हमारे जीवन में काम और अहंकार के रूप में आ जाते हैं, तभी हमें मां भगवती की आराधना करके जीवन को पतन की ओर जाने से बचाना चाहिये। मुख्य यजमान रूपेश अतिथि ब्रिजेश कुमार ने गणेशादि तथा नवग्रह की पूजा की। पूजा संजीव शास्त्री तथा आचार्य राहुल कृष्ण द्वारा कराई गई। आरती प्रधान तेजपाल सैनी तथा प्रधान संजय चौधरी द्वारा की गई। सीताराम सैनी, मनोज गुप्ता, पुन्नाराम, निशांक जैन, ऋषिपाल, सुंदर लाल सैनी, आशु सैनी आदि रहे।
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