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दारुल उलूम ने जर्मनी में अजान संबंधी फैसले की निंदा की
Updated Mon, 05 Feb 2018 01:12 AM IST
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दारुल उलूम ने जर्मनी में अजान संबंधी फैसले की निंदा की
देवबंद (सहारनपुर)। जर्मनी की एक अदालत के द्वारा मस्जिदों में लाउडस्पीकर पर अजान देने पर पाबंदी लगाए जाने के फैसले की देवबंदी उलमा ने कड़ी निंदा की। साथ ही नाराजगी का इजहार करते हुए मांग की है कि इस पाबंदी को तुरंत हटाया जाए।
दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने इस फैसले को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने कहा कि मस्जिद से करीब छह सौ मीटर की दूरी पर रहने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने अदालत में शिकायत की थी कि अजान के जरिये मुसलमान अपने मजहब का प्रचार करते हैं और अजान सुनने वालों को नमाज पढने पर मजबूर किया जाता है। जो ईसा मसीह के उपदेशों के खिलाफ है। अदालत ने उसकी शिकायत को कबूल करते हुए लाउडस्पीकर पर अजान देने पर पाबंदी लगा दी। यह सरासर गलत है। मुफ्ती शरीफ खान का कहना है कि अजान में खुदा की बड़ाई बयान की जाती है और मुसलमानों को याद दिलाया जाता है कि नमाज का वक्त हो गया है। इसके बाद लोग नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों की तरफ रुख करते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे धर्मों के लोगों का अजान से कोई वास्ता नहीं है इसलिए उनके धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी एक बहाना है।
ऑल इंडिया हज कमेटी में देवबंदी उलमा को शामिल किया जाए : शाह
देवबंद। ऑल इंडिया हज कमेटी बनाए जाने की घोषणा के बाद दारुल उलूम समेत दीनी इदारों के जिम्मेदारों ने इसका स्वागत किया है। उनका कहना है कि पूर्व जस्टिस सुहैल एजाज की अगुवाई में बनने वाली कमेटी में उलमा को भी शामिल किया जाना चाहिए।
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दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह ने कहा कि देवबंद में पिछले 46 वर्षों से दारुल उलूम से फारिग मौलाना सैय्यद हुसैन अहमद मदनी के शागिर्द और मुस्लिम फंड ट्रस्ट के महाप्रबंधक मौलाना हसीब सिद्दीकी हज यात्रा पर जाने वाले लोगों की खिदमत करते आ रहे हैं। उन्हें हज के कामों के बारे में जानकारी हैं। इसलिए हज से संबंधित कोई कमेटी बनाई जाती है तो उसमें मौलाना हसीब सिद्दीकी को शामिल कर उनके तुर्जबे से लाभ उठाया जा सकता है। इनके अलावा दारुल उलूम और दारुल उलूम वक्फ के उस्तादों और मुफ्तियों को भी सलाह मशविरा के लिए कमेटी में शामिल किया जाना चाहिए।
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देवबंद (सहारनपुर)। जर्मनी की एक अदालत के द्वारा मस्जिदों में लाउडस्पीकर पर अजान देने पर पाबंदी लगाए जाने के फैसले की देवबंदी उलमा ने कड़ी निंदा की। साथ ही नाराजगी का इजहार करते हुए मांग की है कि इस पाबंदी को तुरंत हटाया जाए।
दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने इस फैसले को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने कहा कि मस्जिद से करीब छह सौ मीटर की दूरी पर रहने वाले एक स्थानीय व्यक्ति ने अदालत में शिकायत की थी कि अजान के जरिये मुसलमान अपने मजहब का प्रचार करते हैं और अजान सुनने वालों को नमाज पढने पर मजबूर किया जाता है। जो ईसा मसीह के उपदेशों के खिलाफ है। अदालत ने उसकी शिकायत को कबूल करते हुए लाउडस्पीकर पर अजान देने पर पाबंदी लगा दी। यह सरासर गलत है। मुफ्ती शरीफ खान का कहना है कि अजान में खुदा की बड़ाई बयान की जाती है और मुसलमानों को याद दिलाया जाता है कि नमाज का वक्त हो गया है। इसके बाद लोग नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों की तरफ रुख करते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे धर्मों के लोगों का अजान से कोई वास्ता नहीं है इसलिए उनके धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी एक बहाना है।
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ऑल इंडिया हज कमेटी में देवबंदी उलमा को शामिल किया जाए : शाह
देवबंद। ऑल इंडिया हज कमेटी बनाए जाने की घोषणा के बाद दारुल उलूम समेत दीनी इदारों के जिम्मेदारों ने इसका स्वागत किया है। उनका कहना है कि पूर्व जस्टिस सुहैल एजाज की अगुवाई में बनने वाली कमेटी में उलमा को भी शामिल किया जाना चाहिए।
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दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह ने कहा कि देवबंद में पिछले 46 वर्षों से दारुल उलूम से फारिग मौलाना सैय्यद हुसैन अहमद मदनी के शागिर्द और मुस्लिम फंड ट्रस्ट के महाप्रबंधक मौलाना हसीब सिद्दीकी हज यात्रा पर जाने वाले लोगों की खिदमत करते आ रहे हैं। उन्हें हज के कामों के बारे में जानकारी हैं। इसलिए हज से संबंधित कोई कमेटी बनाई जाती है तो उसमें मौलाना हसीब सिद्दीकी को शामिल कर उनके तुर्जबे से लाभ उठाया जा सकता है। इनके अलावा दारुल उलूम और दारुल उलूम वक्फ के उस्तादों और मुफ्तियों को भी सलाह मशविरा के लिए कमेटी में शामिल किया जाना चाहिए।