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उम्र है कम, पर हैवी बाइक से भरते हैं फर्राटा

Fri, 14 Jun 2019 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2019 12:09 AM IST
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उम्र है कम, पर हैवी बाइक से भरते हैं फर्राटा
सहारनपुर। यातायात नियमों का पालन करने के प्रति लोग गंभीर नहीं है। किशोर और किशोरी को बिना गियर वाला वाहन चलाने का लाइसेंस मिलता है, लेकिन इसके विपरीत भारी भरकम बाइक और स्कूटर पर खतरे से भरी सवारी कर रहे हैं। आए दिन हादसे होे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हादसों को रोकने की दिशा मेें कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके लिए सीधे तौर पर यातायात पुलिस और इन बच्चों के अभिभावक जिम्मेदार हैं।
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हर वर्ष नवंबर महीना यातायात माह के रूप में मनाया जाता है। इस माह स्कूलों, विभिन्न संस्थाओं, व्यापारियों के संगठनों आदि के साथ यातायात पुलिस गोष्ठी कर लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करती है। इसके साथ ही नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से भी ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जाती है। खासकर स्कूलों में बच्चों, उनके शिक्षकों और अभिभावकों को बताया जाता है कि किशोरों द्वारा बिना गियर वाला वाहन चलाया जा सकता है। अगर बाइक और बड़े वाहन चलाएंगे तो यह सीधे यातायात नियमों का उल्लंघन होगा, लेकिन इसका कोई असर न तो बच्चों पर होता और न ही उनके अभिभावकों पर। यही वजह है कि महानगर में किशोर और किशोरियां बाइक और भारी दुपहिया वाहनों की सवारी करते हुए देखे जाते हैं। इतना ही नहीं, तेज रफ्तार से वाहन को दौड़ाते हैं, जिससे अन्य वाहनों चालकों के साथ दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही एक वाहन पर तीन-तीन सवारी बैठाना भी आम बात है। इनकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, लेकिन यातायात पुलिस द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं करने की वजह से बेरोकटोक किशोर और किशोरियां वाहन दौड़ा रहे हैं।
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- स्कूल प्रबंधन को भी जिम्मेदारी समझनी होगी
इन दिनों स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां चल रही है, लेकिन जब स्कूल खुलते हें तो किशोर बाइक पर स्कूल आते-जाते देखे जा सकते हैं। स्कूल प्रबंधन की ओर से इन पर अंकुश नहीं लगाया जाता है और यातायात पुलिस भी कार्रवाई नहीं करती है, जिस कारण किशोर एवं किशोरियां बड़े वाहन बेरोकटोक चलाते हैं।
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- होती है कार्रवाई, नहीं सुधर रहे लोग- तेज प्रताप
ट्रैफिक पुलिस प्रभारी तेज प्रताप सिंह का कहना है कि वाहन चेकिंग के दौरान किशोरों को बाइक और गियर वाला वाहन चलाने पर चालान किया जाता है। इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाए गए है। मगर, अभिभावक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते हैं और बच्चों को गियर वाले भारी वाहन थमा देते हैं। यह सिलसिला तभी रुक पाएगा, जब अभिभावक इस मामले को लेकर गंभीर होंगे।
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