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शहर में नदी की हालत पर पांवधोई विकास समिति ने जताई चिंता
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सहारनपुर। पांवधोई विकास समिति सदस्यों ने शनिवार को पांवधोई नदी का दौरा किया और शहरी क्षेत्र में नदी की हालत पर चिंता व्यक्त की। नदी की सफाई पर शीघ्र काम शुरू कराने की मांग को लेकर समिति सदस्य मंगलवार को महापौर संजीव वालिया और नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह से मिलने का निर्णय लिया। समिति सदस्यों ने जरूरत पड़ने पर जन जागरण अभियान चलाने की बात कही।
पांवधोई विकास समिति के उप सचिव पर्यावरणविद् डॉ. पीके शर्मा, कोषाध्यक्ष पर्यावरणविद् डॉ. एसके उपाध्याय, प्रचार मंत्री अमीर खान और सदस्य एसी पपनेजा शनिवार को पांवधोई नदी की हालत देखने पहुंचे। धोबीघाट से राकेश टाकिज तक नदी के भीतर जमा कचरा और पॉलिथीन देखकर उन्होंने चिंता व्यक्त की। पीके शर्मा ने बताया कि नदी की सफाई पर करीब एक साल से काम चल रहा है, मगर शहरी क्षेत्र में नदी पूरी तरह दूषित और गंदी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009-10 में चलाए गए अभियान में शहरी क्षेत्र में नदी से गंदगी पूरी तरह बाहर कर दी गई थी। जेसीबी लगाकर नदी से करीब चार फुट सिल्ट निकाली गई थी। सात से आठ हजार ट्रक सिल्ट नदी से निकाली गई थी, जिससे नदी का बहाव तेज हुआ था और नदी साफ भी हुई थी। उन्होंने बताया कि नदी के पुराने फोटो भी उनके पास हैं, जिसमें नदी कलकल बह रही है, मगर वर्तमान में हालत दयनीय है। डॉ. एसके उपाध्याय ने कहा कि नदी को पूर्व की तरह साफ करने के लिए हमें कड़े कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि समिति के सदस्य मंगलवार 11 जून को महापौर संजीव वालिया और नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह से मिलकर नदी की सफाई के लिए अतिशीघ्र अभियान चलाने की मांग करेंगे। जरूरत पड़ी तो नदी के आसपास बसे लोगों और व्यापारियों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगे।
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टायर जलाने बंद किए जाएं
नदी पर दो धोबीघाट बने हैं। कपड़ों को साफ करने के लिए धोबी नदी के तट पर भट्टियां चलाते हैं, जिनमें कपड़ों को उबाला जाता है। पांवधोई विकास समिति सदस्यों ने धोबीघाट का भी दौरा किया। स्थानीय निवासी पंकज मल्होत्रा, राज कुमार, अभिषेक गुप्ता और बालकिशन ने समिति सदस्यों को बताया कि कपड़े उबालने के लिए लकड़ी की जगह पुराने टायर जलाए जा रहे हैं। टायर जलाने से वायु प्रदूषण भी फैल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। यह भी बताया कि टायर जलने के बाद बनने वाली राख को भी नदी में बहा दिया जाता है। डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि वह धोबीघाट को खत्म कराने की मांग भी नगर निगम से करेंगे।
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नदी में डाला जा रहा केमिकलयुक्त पानी
डॉ, पीके शर्मा ने बताया कि उन्हें स्थानीय लोगों से जानकारी मिली है कि धोबी जिस केमिकल में कपड़ों को उबालते हैं, कपड़े उबालने के बाद वह केमिकलयुक्त पानी को नदी में डालते हैं, जिससे नदी के जलीय जीवों की जिंदगी को खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कपड़े साफ करने के इस्तेमाल में लाया जाने वाला केमिकल मछली आदि जलीय जीवों के लिए नुकसानदायक है।
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पांवधोई विकास समिति के उप सचिव पर्यावरणविद् डॉ. पीके शर्मा, कोषाध्यक्ष पर्यावरणविद् डॉ. एसके उपाध्याय, प्रचार मंत्री अमीर खान और सदस्य एसी पपनेजा शनिवार को पांवधोई नदी की हालत देखने पहुंचे। धोबीघाट से राकेश टाकिज तक नदी के भीतर जमा कचरा और पॉलिथीन देखकर उन्होंने चिंता व्यक्त की। पीके शर्मा ने बताया कि नदी की सफाई पर करीब एक साल से काम चल रहा है, मगर शहरी क्षेत्र में नदी पूरी तरह दूषित और गंदी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009-10 में चलाए गए अभियान में शहरी क्षेत्र में नदी से गंदगी पूरी तरह बाहर कर दी गई थी। जेसीबी लगाकर नदी से करीब चार फुट सिल्ट निकाली गई थी। सात से आठ हजार ट्रक सिल्ट नदी से निकाली गई थी, जिससे नदी का बहाव तेज हुआ था और नदी साफ भी हुई थी। उन्होंने बताया कि नदी के पुराने फोटो भी उनके पास हैं, जिसमें नदी कलकल बह रही है, मगर वर्तमान में हालत दयनीय है। डॉ. एसके उपाध्याय ने कहा कि नदी को पूर्व की तरह साफ करने के लिए हमें कड़े कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि समिति के सदस्य मंगलवार 11 जून को महापौर संजीव वालिया और नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह से मिलकर नदी की सफाई के लिए अतिशीघ्र अभियान चलाने की मांग करेंगे। जरूरत पड़ी तो नदी के आसपास बसे लोगों और व्यापारियों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगे।
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टायर जलाने बंद किए जाएं
नदी पर दो धोबीघाट बने हैं। कपड़ों को साफ करने के लिए धोबी नदी के तट पर भट्टियां चलाते हैं, जिनमें कपड़ों को उबाला जाता है। पांवधोई विकास समिति सदस्यों ने धोबीघाट का भी दौरा किया। स्थानीय निवासी पंकज मल्होत्रा, राज कुमार, अभिषेक गुप्ता और बालकिशन ने समिति सदस्यों को बताया कि कपड़े उबालने के लिए लकड़ी की जगह पुराने टायर जलाए जा रहे हैं। टायर जलाने से वायु प्रदूषण भी फैल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। यह भी बताया कि टायर जलने के बाद बनने वाली राख को भी नदी में बहा दिया जाता है। डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि वह धोबीघाट को खत्म कराने की मांग भी नगर निगम से करेंगे।
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नदी में डाला जा रहा केमिकलयुक्त पानी
डॉ, पीके शर्मा ने बताया कि उन्हें स्थानीय लोगों से जानकारी मिली है कि धोबी जिस केमिकल में कपड़ों को उबालते हैं, कपड़े उबालने के बाद वह केमिकलयुक्त पानी को नदी में डालते हैं, जिससे नदी के जलीय जीवों की जिंदगी को खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कपड़े साफ करने के इस्तेमाल में लाया जाने वाला केमिकल मछली आदि जलीय जीवों के लिए नुकसानदायक है।