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जीवनदायिनी नदियां ही बन गईं दर्जनों गांवों के लिए अभिशाप
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:23 AM IST
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बड़गांव (सहारनपुर)। देवबंद विधानसभा के बड़गांव क्षेत्र के लिए कभी जीवनदायिनी रहीं नदियां अब यहां के दर्जनों गांवों के लिए अभिशाप बनकर रह गई हैं। औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़े गए रसायनों से जहरीले हुए इन नदियों के पानी ने भूजल को भी प्रभावित कर डाला है। जिसके चलते इस क्षेत्र के लोग जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। साढ़े तीन सौ से अधिक की मौत हो चुकी है, लेकिन इस क्षेत्र के लोगों को पीने के लिए तो क्या सिंचाई तक के लिए उपयुक्त पानी मुहैया नहीं कराया जा सका है। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक सिर्फ आश्वासन ही देते रहे। इस बार लोगों ने पानी की समस्या को लेकर आर-पार की लड़ाई का निर्णय लिया है।
देवबंद विधान सभा के एक दर्जन से भी अधिक गांवों के निकट से बहने वाली प्रदूषित हिंडन नदी इन गांवों की आबादी के लिए लगातार मौत का सबब बन रही है। एक दशक में 350 से भी अधिक ग्रामीणों की मौत कैंसर, पीलिया, चर्मरोग, हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारियों से हो चुकी हैं। यही नहीं हिंडन में बहने वाले बदबूदार काले झाग युक्त जहरीले इस गंदे पानी ने करीब 120 फीट की गहराई तक भूजल स्तर को इतना प्रदूषित कर दिया है। लोगों के पीने योग्य तो क्या जानवरों के पीने लायक भी नहीं रह गया है। सिर्फ पीने के पानी की ही नहीं यहां के लोग सिंचाई के पानी के लिए भी परेशान हो चुके हैं। क्षेत्र के नल्हेड़ा रजबहे से जुड़े कई गांवों के किसानों को खेती करने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है, जबकि इन दोनों विकट समस्याओं को लेकर ग्रामीण और किसान तहसील दिवस से लेकर प्रदेश व केंद्र सरकार तक गुहार लगा चुके है, लेकिन वहां से भी कार्रवाई के नाम पर आज तक केवल आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला पाया है। पीड़ित क्षेत्रवासी तहसील दिवस में हैंडपंपों से निकलने वाले प्रदूषित पानी की बोतल दिखाते हुए कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि ने आज तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया है। आज भी बड़गांव क्षेत्रवासियों का मर्ज ज्यों का त्यों ही बना हुआ है।
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--। क्षेत्र के इन गांवों के लोग हैं हिंडन नदी से पीड़ित
क्षेत्र के ग्राम भगवानपुर, टपरी, सांवत खेड़ी, सहजी, कुतुबा माजरा, अंबेहटा चांद, शब्बीरपुर, महेशपुर, शिमलाना, धूमगढ़, जखवाला, चिराऊं, बहेड़ा, नूनाबड़ी, बेलड़ा, रतनहेड़ी, पीपलो, बड़ाबांस, नन्हेड़ा कलां, सिसौनी, रामनगर, बड़गांव, दल्हेड़ी सहित अनेकों कई गांव हिंडन के प्रदूषित हो चुके पानी से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
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--। एक ओर हिंडन, दूसरी ओर कृष्णा नदी
बड़गांव से प्रदूषित हिंडन नदी तीन किमी की दूरी पर और कृष्णा नदी पांच किमी की दूरी पर स्थित हैं। दोनों प्रदूषित नदियों के बीच में बसा बड़गांव क्षेत्र के गांवों का पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है, जिसे यहां के लोग पीने को मजबूर हैं। इन दोनों नदियों के प्रदूषित पानी की वजह से क्षेत्र में लगातार हो रही मौतों से परेशान होकर क्षेत्र की जनता श्ने बाबा मंगल गिरी व बाबा दर्शन सिंह के नेतृत्व में वर्ष 2014 में शिमलाना स्थित शिव मंदिर में नदी बचाओ आंदोलन के तहत भूख हड़ताल, आमरण अनशन किया था।
क्षेत्रीय विधायक एवं तत्कालीन मंत्री स्वर्गीय राजेंद्र सिंह राणा ने बाबा को नदी में बहने वाले पानी को ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर स्वच्छ कराने एवं नदी प्रभावित गांव में पीने के लिए पानी की टंकी लगवाने का आश्वासन देकर नौ दिन बाद जूस पिलाकर इस आमरण अनशन को समाप्त करा दिया था। एक वर्ष बाद भी कुछ नहीं हुआ तो बाबा मंगल गिरी ने 2015 में भगवानपुर स्थित औघड़नाथ मंदिर में फिर दो दिन धरना प्रदर्शन के बाद भूख हड़ताल शुरू कर दी थी यहां भी आठ दिन बाद तत्कालीन एडीएम ई दिनेश चंद्रा, एसडीएम रामपुर मनिहारन व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने अनशनकारी बाबा को कई तरह के आश्वासन देकर जूस पिलाते हुए अनशन समाप्त करा दिया था। लेकिन आज तक क्षेत्र वासियों के पानी का यह मर्ज ज्यों का त्यों बना हुआ है।
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--। नमूने लेकर जांच हुई, नहीं हुआ समाधान
प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2015 में सरकार द्वारा गठित एक समिति द्वारा हिंडन के प्रदूषित हो चुके पानी के नमूने लिए थे। वर्ष 2016 में एनजीटी की ओर से भी इस प्रदूषित नदी के गंदे पानी के नमूने भी लिए गए, लेकिन नदी का आज भी वह भयानक रूप देखा जा सकता है। एनजीटी ने भी सहारनपुर प्रशासन को इस बाबत खराब हैंडपंप उखाड़ने या फिर बंद करने के लिए पत्र लिखे हैं। वहीं दूसरी ओर 30 वर्षों से क्षेत्र के सबसे बड़े गांव जड़ौदा पांडा एवं उसके मजरे शेरपुरा, किशनपञुरा, लौटनी, जयपुर, घिसरपड़ी, बालूमाजरा, मौरा, उमरी मजबता, बडूली, नयागांव सहित दर्जनों गांव के किसान खेती करने के लिए पानी की मांग करते चले आ रहे हैं लेकिन आज तक इनकी मांग भी पूरी नहीं हो पाई है। पानी की विकट समस्याओं से जूझ रहे देवबंद विधान सभा क्षेत्र के मतदाता इस बार आर पार की लड़ाई की तैयारी में हैं।
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--। खेती के लिए पानी लेने की मांग पर
पानी को लेकर बनी संघर्ष समिति के सदस्य अरविन्द त्यागी का कहना है। कि क्षेत्र दर्जन भर गांव के किसान गत 30 वर्षों से नल्हेड़ा राजवाहे में लगातार पानी की मांग करते आ रहे है लेकिन आज तक किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधि ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है।
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प्रिंस त्यागी का कहना है कि सपा सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई देवबंद विधान सभा सीट उप चुनाव में बहिष्कार के चलते सत्तारूढ़ पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था। इसी प्रकार अब भाजपा के जनप्रतिनिधि भी क्षेत्रवासियों को ऐसे ही झूठे आश्वासनों की खुराक देते आ रहे हैं।
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--। अकाल मौत मर रहे हैं लोग
ग्राम प्रधान महेशपुर श्यामसिंह उर्फ पप्पू का कहना है कि नदी का जहरीला पानी क्षेत्र के निर्दोष लोगों पर कहर बरपा रहा है। करीब 350 से ज्यादा ग्रामीण अकाल मौत का ग्रास बन चुके हैं। जनप्रतिनिधि कई वर्षों से केवल आश्वासन देते आ रहे हैं।
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सांवतखेड़ी ग्राम प्रधान जंगपाल सिंह कहते हैं कि कई बार प्रदूषित नदी को लेकर क्षेत्र की जनता ने विभिन्न आंदोलन किए। बावजूद इसके सरकारी तंत्र सोया हुआ है। उन्होंने कहा कि अबकी बार क्षेत्र की जनता आर पार की लड़ाई के मूड में है।
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--। शीघ्र होगा समाधान
उधर देवबंद भाजपा विधायक कुंवर ब्रिजेश सिंह का कहना है उन्होंने पानी की समस्या का महत्वपूर्ण मुद्दा जोर शोर से प्रदेश सरकार के समक्ष रखा है शीघ्र ही बड़गांव क्षेत्रवासियों की इन समस्याओं का समाधान होने जा रहा है।
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देवबंद विधान सभा के एक दर्जन से भी अधिक गांवों के निकट से बहने वाली प्रदूषित हिंडन नदी इन गांवों की आबादी के लिए लगातार मौत का सबब बन रही है। एक दशक में 350 से भी अधिक ग्रामीणों की मौत कैंसर, पीलिया, चर्मरोग, हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारियों से हो चुकी हैं। यही नहीं हिंडन में बहने वाले बदबूदार काले झाग युक्त जहरीले इस गंदे पानी ने करीब 120 फीट की गहराई तक भूजल स्तर को इतना प्रदूषित कर दिया है। लोगों के पीने योग्य तो क्या जानवरों के पीने लायक भी नहीं रह गया है। सिर्फ पीने के पानी की ही नहीं यहां के लोग सिंचाई के पानी के लिए भी परेशान हो चुके हैं। क्षेत्र के नल्हेड़ा रजबहे से जुड़े कई गांवों के किसानों को खेती करने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है, जबकि इन दोनों विकट समस्याओं को लेकर ग्रामीण और किसान तहसील दिवस से लेकर प्रदेश व केंद्र सरकार तक गुहार लगा चुके है, लेकिन वहां से भी कार्रवाई के नाम पर आज तक केवल आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला पाया है। पीड़ित क्षेत्रवासी तहसील दिवस में हैंडपंपों से निकलने वाले प्रदूषित पानी की बोतल दिखाते हुए कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि ने आज तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया है। आज भी बड़गांव क्षेत्रवासियों का मर्ज ज्यों का त्यों ही बना हुआ है।
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--। क्षेत्र के इन गांवों के लोग हैं हिंडन नदी से पीड़ित
क्षेत्र के ग्राम भगवानपुर, टपरी, सांवत खेड़ी, सहजी, कुतुबा माजरा, अंबेहटा चांद, शब्बीरपुर, महेशपुर, शिमलाना, धूमगढ़, जखवाला, चिराऊं, बहेड़ा, नूनाबड़ी, बेलड़ा, रतनहेड़ी, पीपलो, बड़ाबांस, नन्हेड़ा कलां, सिसौनी, रामनगर, बड़गांव, दल्हेड़ी सहित अनेकों कई गांव हिंडन के प्रदूषित हो चुके पानी से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
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--। एक ओर हिंडन, दूसरी ओर कृष्णा नदी
बड़गांव से प्रदूषित हिंडन नदी तीन किमी की दूरी पर और कृष्णा नदी पांच किमी की दूरी पर स्थित हैं। दोनों प्रदूषित नदियों के बीच में बसा बड़गांव क्षेत्र के गांवों का पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है, जिसे यहां के लोग पीने को मजबूर हैं। इन दोनों नदियों के प्रदूषित पानी की वजह से क्षेत्र में लगातार हो रही मौतों से परेशान होकर क्षेत्र की जनता श्ने बाबा मंगल गिरी व बाबा दर्शन सिंह के नेतृत्व में वर्ष 2014 में शिमलाना स्थित शिव मंदिर में नदी बचाओ आंदोलन के तहत भूख हड़ताल, आमरण अनशन किया था।
क्षेत्रीय विधायक एवं तत्कालीन मंत्री स्वर्गीय राजेंद्र सिंह राणा ने बाबा को नदी में बहने वाले पानी को ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर स्वच्छ कराने एवं नदी प्रभावित गांव में पीने के लिए पानी की टंकी लगवाने का आश्वासन देकर नौ दिन बाद जूस पिलाकर इस आमरण अनशन को समाप्त करा दिया था। एक वर्ष बाद भी कुछ नहीं हुआ तो बाबा मंगल गिरी ने 2015 में भगवानपुर स्थित औघड़नाथ मंदिर में फिर दो दिन धरना प्रदर्शन के बाद भूख हड़ताल शुरू कर दी थी यहां भी आठ दिन बाद तत्कालीन एडीएम ई दिनेश चंद्रा, एसडीएम रामपुर मनिहारन व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने अनशनकारी बाबा को कई तरह के आश्वासन देकर जूस पिलाते हुए अनशन समाप्त करा दिया था। लेकिन आज तक क्षेत्र वासियों के पानी का यह मर्ज ज्यों का त्यों बना हुआ है।
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--। नमूने लेकर जांच हुई, नहीं हुआ समाधान
प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2015 में सरकार द्वारा गठित एक समिति द्वारा हिंडन के प्रदूषित हो चुके पानी के नमूने लिए थे। वर्ष 2016 में एनजीटी की ओर से भी इस प्रदूषित नदी के गंदे पानी के नमूने भी लिए गए, लेकिन नदी का आज भी वह भयानक रूप देखा जा सकता है। एनजीटी ने भी सहारनपुर प्रशासन को इस बाबत खराब हैंडपंप उखाड़ने या फिर बंद करने के लिए पत्र लिखे हैं। वहीं दूसरी ओर 30 वर्षों से क्षेत्र के सबसे बड़े गांव जड़ौदा पांडा एवं उसके मजरे शेरपुरा, किशनपञुरा, लौटनी, जयपुर, घिसरपड़ी, बालूमाजरा, मौरा, उमरी मजबता, बडूली, नयागांव सहित दर्जनों गांव के किसान खेती करने के लिए पानी की मांग करते चले आ रहे हैं लेकिन आज तक इनकी मांग भी पूरी नहीं हो पाई है। पानी की विकट समस्याओं से जूझ रहे देवबंद विधान सभा क्षेत्र के मतदाता इस बार आर पार की लड़ाई की तैयारी में हैं।
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--। खेती के लिए पानी लेने की मांग पर
पानी को लेकर बनी संघर्ष समिति के सदस्य अरविन्द त्यागी का कहना है। कि क्षेत्र दर्जन भर गांव के किसान गत 30 वर्षों से नल्हेड़ा राजवाहे में लगातार पानी की मांग करते आ रहे है लेकिन आज तक किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधि ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है।
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प्रिंस त्यागी का कहना है कि सपा सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई देवबंद विधान सभा सीट उप चुनाव में बहिष्कार के चलते सत्तारूढ़ पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था। इसी प्रकार अब भाजपा के जनप्रतिनिधि भी क्षेत्रवासियों को ऐसे ही झूठे आश्वासनों की खुराक देते आ रहे हैं।
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--। अकाल मौत मर रहे हैं लोग
ग्राम प्रधान महेशपुर श्यामसिंह उर्फ पप्पू का कहना है कि नदी का जहरीला पानी क्षेत्र के निर्दोष लोगों पर कहर बरपा रहा है। करीब 350 से ज्यादा ग्रामीण अकाल मौत का ग्रास बन चुके हैं। जनप्रतिनिधि कई वर्षों से केवल आश्वासन देते आ रहे हैं।
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सांवतखेड़ी ग्राम प्रधान जंगपाल सिंह कहते हैं कि कई बार प्रदूषित नदी को लेकर क्षेत्र की जनता ने विभिन्न आंदोलन किए। बावजूद इसके सरकारी तंत्र सोया हुआ है। उन्होंने कहा कि अबकी बार क्षेत्र की जनता आर पार की लड़ाई के मूड में है।
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--। शीघ्र होगा समाधान
उधर देवबंद भाजपा विधायक कुंवर ब्रिजेश सिंह का कहना है उन्होंने पानी की समस्या का महत्वपूर्ण मुद्दा जोर शोर से प्रदेश सरकार के समक्ष रखा है शीघ्र ही बड़गांव क्षेत्रवासियों की इन समस्याओं का समाधान होने जा रहा है।