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सहारनपुर में स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए कवायद तेज
Updated Sat, 11 Nov 2017 12:22 AM IST
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सहारनपुर। सहारनपुर में स्टेट यूनिवर्सिटी की मांग को राजभवन ने मानते हुए राज्य सरकार को यूनिवर्सिटी के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसे लेकर जनपदवासियों खासकर यूनिवर्सिटी के लिए संघर्ष करते आ रहे लोगों में उत्साह है। हालांकि राज्य सरकार यूनिवर्सिटी के लिए कब कार्रवाई शुरू करेगी यह अभी तय नहीं हो सका है।
उच्च शिक्षा के लिए सहारनपुर के युवाओं को पलायन करना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष दस से 15 हजार युवा दिल्ली, मेरठ, देहरादून और यमुनानगर जाकर पढ़ाई करते हैं। छात्रों की समस्याओं को देखते हुए करीब दो दशक पहले यूनिवर्सिटी के लिए आवाज उठी थी। महाराज सिंह डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केके शर्मा लगातार यूनिवर्सिटी के लिए आवाज उठाते रहे हैं। दो अगस्त 2017 को भी उन्होंने एक पत्र राज्यपाल राम नाईक को लिखा था। राजभवन ने अब डॉ. केके शर्मा के पत्र का संज्ञान लिया। इसके बाद राज्यपाल के निर्देश पर उनके विशेष कार्याधिकारी, पदेन सचिव चंद्रप्रकाश ने 31 अक्तूबर 2017 को अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर स्टेट यूनिवर्सिटी बनाए जाने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। पत्र की एक प्रतिलिपि डॉ. केके शर्मा को भी भेजी गई है, जिसके बाद से डॉ. शर्मा उत्साहित हैं।
सीसीएस यूनिवर्सिटी को मिलेगी राहत
डॉ. केके शर्मा ने बताया कि वर्तमान में सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ से करीब 900 कॉलेज संबद्ध हैं। यहां कई पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं समय से नहीं हो पाती हैं, जिसकी वजह से परिणाम भी लेट होते हैं। यदि सहारनपुर में अलग से यूनिवर्सिटी बन जाती है तो सीसीएस यूनिवर्सिटी से करीब ढाई सौ कॉलेजों का बोझ कम होगा।
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350 करोड़ रुपये देगी केंद्र सरकार
केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच वर्ष 2012 में एक समझौता हुआ था, जिसके तहत प्रदेश के नौ मंडलों आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर, इलाहाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, चित्रकूट धाम, सहारनपुर और देवी पाटन में स्टेट यूनिवर्सिटी बनाए जाने पर सहमति बनी थी। समझौते के तहत यूनिवर्सिटी के लिए जमीन राज्य सरकार मुहैया कराएगी, जबकि निर्माण पर 350 करोड़ रुपये केंद्र सरकार वहन करेगी।
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उच्च शिक्षा के लिए सहारनपुर के युवाओं को पलायन करना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष दस से 15 हजार युवा दिल्ली, मेरठ, देहरादून और यमुनानगर जाकर पढ़ाई करते हैं। छात्रों की समस्याओं को देखते हुए करीब दो दशक पहले यूनिवर्सिटी के लिए आवाज उठी थी। महाराज सिंह डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केके शर्मा लगातार यूनिवर्सिटी के लिए आवाज उठाते रहे हैं। दो अगस्त 2017 को भी उन्होंने एक पत्र राज्यपाल राम नाईक को लिखा था। राजभवन ने अब डॉ. केके शर्मा के पत्र का संज्ञान लिया। इसके बाद राज्यपाल के निर्देश पर उनके विशेष कार्याधिकारी, पदेन सचिव चंद्रप्रकाश ने 31 अक्तूबर 2017 को अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर स्टेट यूनिवर्सिटी बनाए जाने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। पत्र की एक प्रतिलिपि डॉ. केके शर्मा को भी भेजी गई है, जिसके बाद से डॉ. शर्मा उत्साहित हैं।
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सीसीएस यूनिवर्सिटी को मिलेगी राहत
डॉ. केके शर्मा ने बताया कि वर्तमान में सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ से करीब 900 कॉलेज संबद्ध हैं। यहां कई पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं समय से नहीं हो पाती हैं, जिसकी वजह से परिणाम भी लेट होते हैं। यदि सहारनपुर में अलग से यूनिवर्सिटी बन जाती है तो सीसीएस यूनिवर्सिटी से करीब ढाई सौ कॉलेजों का बोझ कम होगा।
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350 करोड़ रुपये देगी केंद्र सरकार
केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच वर्ष 2012 में एक समझौता हुआ था, जिसके तहत प्रदेश के नौ मंडलों आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर, इलाहाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, चित्रकूट धाम, सहारनपुर और देवी पाटन में स्टेट यूनिवर्सिटी बनाए जाने पर सहमति बनी थी। समझौते के तहत यूनिवर्सिटी के लिए जमीन राज्य सरकार मुहैया कराएगी, जबकि निर्माण पर 350 करोड़ रुपये केंद्र सरकार वहन करेगी।