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मासूम आंखों में नमी अच्छी नहीं लगती

Fri, 17 Nov 2017 12:22 AM IST
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:22 AM IST
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मासूम आंखों में नमी अच्छी नहीं लगती
सहारनपुर। साहित्यिक संस्था उर्दू मरकज द्वारा कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया गया।
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मोहल्ला लक्खीगेट स्थित एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत नात ए पाक से की गई। सर्वप्रथम अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि शाहिद जुबैरी व सगीर सागर ने शमा रोशन की। अध्यक्षता अकबर खां और संचालक खुर्रम सुल्तान ने किया। शायर फैयाज नदीम ने कहा कि इस तरह रहते हैं डर कर हम किसी के साथ में, आइना रखा हो जैसे पत्थरों के हाथ में। शाकिर नजर ने कहा कि खिलौनों की कभी जिद तो नहीं करते मेरे बच्चे, मगर मासूम आंखों में नमी अच्छी नहीं लगती। दानिश कमाल ने कहा कि तू जो वक्त का सूरज है, तो घर में उजियारा कर, ऊंचे घरों तक रोशनी ठहरे, यह तो कोई बात नहीं। असलम मोहसिन ने कहा कि जज्बा-ए-इश्क में कुछ ऐसा असर आ जाए, सिर्फ सोचू मैं उसे और वो नजर आ जाए। इनके अलावा इलियास सागर, अदील ताबिश, सिकंदर हयात, शमीम तहजीबी, हारून साबिर, फराज अहमद फराज, जमील मानवी, सैयद राशिद, खुर्रम सुल्तान ने भी अपने कलाम पेश किए। मो. अखलाक, जमील मानवी, नासिर जमान, मो. साहिल, मो. जिकरिया, मो. अरशद, सलाहुद्दीन, रिवाजन, उस्मान मौजूद रहे।
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