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पुराना आरक्षण अमान्य, नए सिरे से हो रहा रैपिड सर्वे
Updated Thu, 20 Jul 2017 12:11 AM IST
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पुराना आरक्षण अमान्य, नए सिरे से हो रहा रैपिड सर्वे
सहारनपुर। निकाय चुनाव की अधिसूचना अक्तूबर में जारी होने की संभावना जताई जा रही है, मगर नगर निगम अभी तक सीटों का आरक्षण तय नहीं कर सका है। नगर निगम पिछले रैपिड सर्वे और सीटों के आरक्षण को अमान्य कर अब नए सिरे से रैपिड सर्वे कराने में जुटा है, जिसकी चाल काफी धीमी है। इतना ही नहीं, सर्वे की मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से इस काम में अभी लंबा समय लगने की संभावना है।
सहारनपुर वर्ष 2009 में नगर निगम बना था। इन आठ साल में यहां मेयर के चुनाव नहीं हो सके हैं। निगम बनाने के दौरान शहर में जोड़े गए 32 गांवों पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। चूंकि निगम का दर्जा बसपा सरकार में मिला था। ऐसे में अन्य दलों का आरोप था कि बसपा ने दलित बाहुल्य गांवों को शामिल किया है, जिसके पीछे उसका मकसद मेयर की सीट पर कब्जा पाना है। इस खींचतान की वजह से नगर निगम का परिसीमन नहीं हो पा रहा था। सपा सरकार ने दिसंबर 2016 में शेखपुरा कदीम समेत 12 गांवों को नगर निगम में शामिल किया। मगर प्रदेश में भाजपा की सरकार आते ही उन गांवों को फिर से बाहर कर दिया गया। इसके बाद नगर निगम ने परिसीमन किया, जिसमें 70 वार्ड बनाए गए हैं। मगर बड़ी लापरवाही यह है कि नगर निगम अभी तक इन वार्डों पर आरक्षण तय नहीं कर सका है। यानी कौन सा वार्ड आरक्षित वर्ग के लिए रहेगा और कौन सा नहीं। आरक्षण तय करने के लिए निगम के पास एससी, एसटी, ओबीसी आदि की संख्या के सटीक आंकड़े होना जरूरी है, जिसके लिए अभी रैपिड सर्वे चल रहा है। रैपिड सर्वे के बाद डाटा लखनऊ जाएगा, जहां से स्वीकृत होने के बाद ही आरक्षण तय हो सकेगा। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में चल रहे रैपिड सर्वे की गति काफी धीमी है, क्योंकि इस काम में लगे कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्य भी है। इसके अलावा सर्वे की मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में इसमें अभी और समय लगेगा।
साढ़े तीन लाख थी आरक्षितों की संख्या
नगर निगम ने कुछ ही महीने पहले भी रैपिड सर्वे कराया था, जिसमें ओबीसी की आबादी करीब ढाई लाख बताई गई थी। एससी और एसटी का रैपिड सर्वे कई साल पहले का माना गया था, जिसमें उनकी संख्या करीब सवा लाख आंकी गई थी। यानी आरक्षित वर्ग की संख्या करीब तीन लाख 65 हजार थी, जबकि नगर की कुल संख्या करीब साढ़े दस लाख बताई गई थी। इसके बाद अपर नगरायुक्त ने आरक्षण भी तय कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि वह आरक्षण अमान्य कर दिया गया है। अब नए सिरे से रैपिड सर्वे कराया जा रहा है। उसके बाद आरक्षण तय होगा।
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सहारनपुर। निकाय चुनाव की अधिसूचना अक्तूबर में जारी होने की संभावना जताई जा रही है, मगर नगर निगम अभी तक सीटों का आरक्षण तय नहीं कर सका है। नगर निगम पिछले रैपिड सर्वे और सीटों के आरक्षण को अमान्य कर अब नए सिरे से रैपिड सर्वे कराने में जुटा है, जिसकी चाल काफी धीमी है। इतना ही नहीं, सर्वे की मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से इस काम में अभी लंबा समय लगने की संभावना है।
सहारनपुर वर्ष 2009 में नगर निगम बना था। इन आठ साल में यहां मेयर के चुनाव नहीं हो सके हैं। निगम बनाने के दौरान शहर में जोड़े गए 32 गांवों पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। चूंकि निगम का दर्जा बसपा सरकार में मिला था। ऐसे में अन्य दलों का आरोप था कि बसपा ने दलित बाहुल्य गांवों को शामिल किया है, जिसके पीछे उसका मकसद मेयर की सीट पर कब्जा पाना है। इस खींचतान की वजह से नगर निगम का परिसीमन नहीं हो पा रहा था। सपा सरकार ने दिसंबर 2016 में शेखपुरा कदीम समेत 12 गांवों को नगर निगम में शामिल किया। मगर प्रदेश में भाजपा की सरकार आते ही उन गांवों को फिर से बाहर कर दिया गया। इसके बाद नगर निगम ने परिसीमन किया, जिसमें 70 वार्ड बनाए गए हैं। मगर बड़ी लापरवाही यह है कि नगर निगम अभी तक इन वार्डों पर आरक्षण तय नहीं कर सका है। यानी कौन सा वार्ड आरक्षित वर्ग के लिए रहेगा और कौन सा नहीं। आरक्षण तय करने के लिए निगम के पास एससी, एसटी, ओबीसी आदि की संख्या के सटीक आंकड़े होना जरूरी है, जिसके लिए अभी रैपिड सर्वे चल रहा है। रैपिड सर्वे के बाद डाटा लखनऊ जाएगा, जहां से स्वीकृत होने के बाद ही आरक्षण तय हो सकेगा। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में चल रहे रैपिड सर्वे की गति काफी धीमी है, क्योंकि इस काम में लगे कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्य भी है। इसके अलावा सर्वे की मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में इसमें अभी और समय लगेगा।
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साढ़े तीन लाख थी आरक्षितों की संख्या
नगर निगम ने कुछ ही महीने पहले भी रैपिड सर्वे कराया था, जिसमें ओबीसी की आबादी करीब ढाई लाख बताई गई थी। एससी और एसटी का रैपिड सर्वे कई साल पहले का माना गया था, जिसमें उनकी संख्या करीब सवा लाख आंकी गई थी। यानी आरक्षित वर्ग की संख्या करीब तीन लाख 65 हजार थी, जबकि नगर की कुल संख्या करीब साढ़े दस लाख बताई गई थी। इसके बाद अपर नगरायुक्त ने आरक्षण भी तय कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि वह आरक्षण अमान्य कर दिया गया है। अब नए सिरे से रैपिड सर्वे कराया जा रहा है। उसके बाद आरक्षण तय होगा।
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