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UP: आजम खां, बेटे अब्दुल्ला और पत्नी को 7 साल की सजा, दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में रामपुर कोर्ट का बड़ा फैसला
Wed, 18 Oct 2023 05:11 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 18 Oct 2023 05:11 PM IST
सार
Azam Khan Birth Certificate Case: रामपुर एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सपा नेता आजम खां, अब्दुल्ला आजम और पत्नी तंजीन फात्मा को सात साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों को जेल भेजने का आदेश दिया।
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कोर्ट में पहुंचे आजम खां, अब्दुल्लाह आजम और तंजीन फात्मा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खां के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम उनके पिता आजम खां और उनकी मां डा. तंजीन फात्मा को सात सात साल की कैद और 50 हजार जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट के आदेश पर तीनों को सीधे जेल भेजा जाएगा।
इससे पहले, बुधवार को ही कोर्ट ने मामले में तीनों को दोषी करार दिया था। सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खां के दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया।
लघु उद्योग प्रकोष्ठ के तत्कालीन क्षेत्रीय संयोजक एवं भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो जन्म प्रमाणपत्र होने का मामला दर्ज कराया था, जिसमें सपा नेता आजम खां और उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फात्मा को भी आरोपी बनाया गया था।
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पुलिस ने विवेचना के बाद मामले में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। यह मामला एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में इन इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। बुधवार को कोर्ट ने इस मुकदमे पर फैसला सुनाया।
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इससे पहले, बुधवार को ही कोर्ट ने मामले में तीनों को दोषी करार दिया था। सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खां के दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया।
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लघु उद्योग प्रकोष्ठ के तत्कालीन क्षेत्रीय संयोजक एवं भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो जन्म प्रमाणपत्र होने का मामला दर्ज कराया था, जिसमें सपा नेता आजम खां और उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फात्मा को भी आरोपी बनाया गया था।
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पुलिस ने विवेचना के बाद मामले में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। यह मामला एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट में इन इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। बुधवार को कोर्ट ने इस मुकदमे पर फैसला सुनाया।
कोर्ट ने इस मामले में बुधवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अब्दुल्ला आजम, आजम खां और तंजीन फात्मा को सत-सात साल की कैद और 50 हजार जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
30 गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट का फैसला
सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में कोर्ट 30 गवाहों और उपलब्ध दस्तावेजी सुबूतों के आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। दोनों ओर से 15-15 गवाह सुनवाई के दौरान पेश किए गए। पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र का यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था। उस समय भाजपा लघु प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक व मौजूदा समय में शहर विधायक आकाश सक्सेना ने गंज थाने में तहरीर देकर मामला दर्ज कराया था।
सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में कोर्ट 30 गवाहों और उपलब्ध दस्तावेजी सुबूतों के आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। दोनों ओर से 15-15 गवाह सुनवाई के दौरान पेश किए गए। पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र का यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था। उस समय भाजपा लघु प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक व मौजूदा समय में शहर विधायक आकाश सक्सेना ने गंज थाने में तहरीर देकर मामला दर्ज कराया था।
आरोप था कि अब्दुल्ला ने अपने दो जन्म प्रमाणपत्र बनवाए है, जिनमें एक रामपुर नगरपालिका परिषद से, जबकि दूसरा प्रमाणपत्र लखनऊ नगर निगम से बनवाया। आरोप है कि उसका प्रयोग अब्दुल्ला आजम ने विधानसभा चुनाव के दौरान किया। पुलिस ने मामले की जांच कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से मुकदमे के वादी विधायक आकाश सक्सेना समेत 15 गवाहों के बयान दर्ज हुए, जबकि अब्दुल्ला आजम, आजम खां व डॉ. तंजीन फात्मा की ओर से अपने बचाव में 15 गवाहों के बयान कराए। इसके अलावा अभियोजन की ओर से विधि व्यवस्थाओं के साथ ही हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में पारित निर्णय का भी हवाला दिया गया है। इन 30 गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।