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श्रमिक की दिल्ली में सड़क हादसे में मौत
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डीह (रायबरेली)। थाना क्षेत्र के डेला गांव निवासी एक युवक की दिल्ली में अपने साथी को घर भेजने के लिए बस पर बैठाकर वापस आते समय सड़क हादसे में मौत हो गई। शुक्रवार की सुबह जब मृतक की पुत्री ने अपने पापा से बात करना चाही, तो दिल्ली पुलिस ने घटना की जानकारी दी। मौत की खबर सुनते ही घर में कोहराम मच गया। मृतक अपनी बेटी के विवाह के लिए रुपया कमाने दिल्ली गया था।
क्षेत्र के डेला गांव निवासी संजय कुमार अग्रहरि (38) पुत्र बजरंगीलाल दिल्ली में रहकर एक दुकान पर नौकरी करता था। अभी एक सप्ताह पहले वह घर से दिल्ली गया था। शुक्रवार की शाम को अपने साथी डीह निवासी सुनील तिवारी को घर भेजने के लिए कश्मीरी गेट पर बस में बैठाने गया था। अपने साथी को बस में बैठाकर वापस अपने कमरे को जाने के लिए हाईवे पार कर रहा था।
इसी दौरान अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दिया। इससे उसकी मौत हो गई। मौके पर पहुंची दिल्ली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक का मोबाइल फोन पुलिस के पास था। इसमें स्क्रीन पासवर्ड लॉक लगा होने के कारण मोबाइल खुल नहीं रहा था।
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सुबह मृतक की पुत्री गांव से अपने पापा का हाल चाल जानने के लिए फोन किया। फोन पुलिस ने उठाया और पुत्री से घटना की जानकारी दी। घटना की जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवारीजनों ने दिल्ली में रह रहे अपने रिश्तेदारों को अवगत कराया। रिस्तेदार शव का पीएम कराने के बाद पुलिस से लेकर जब शनिवार की सुबह गांव पहुंचे, तो घर में कोहराम मच गया।
पत्नी मंजू, पुत्रियों में विधि (19), निधि (16), एक पुत्र प्रियांशू (8) का रो-रोकर हाल बेहाल है। पत्नी रोते-रोते यही कह रही थी कि इस बार लॉकडाउन में तीन महीने से यही रहे। घर से अबकी यही कह कर गए कि बिटिया की शादी करनी है। कुछ रुपये इकट्ठा कर लें, फिर गांव में ही रहेंगे, लेकिन भगवान को यह मंजूर नहीं था।
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क्षेत्र के डेला गांव निवासी संजय कुमार अग्रहरि (38) पुत्र बजरंगीलाल दिल्ली में रहकर एक दुकान पर नौकरी करता था। अभी एक सप्ताह पहले वह घर से दिल्ली गया था। शुक्रवार की शाम को अपने साथी डीह निवासी सुनील तिवारी को घर भेजने के लिए कश्मीरी गेट पर बस में बैठाने गया था। अपने साथी को बस में बैठाकर वापस अपने कमरे को जाने के लिए हाईवे पार कर रहा था।
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इसी दौरान अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दिया। इससे उसकी मौत हो गई। मौके पर पहुंची दिल्ली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक का मोबाइल फोन पुलिस के पास था। इसमें स्क्रीन पासवर्ड लॉक लगा होने के कारण मोबाइल खुल नहीं रहा था।
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सुबह मृतक की पुत्री गांव से अपने पापा का हाल चाल जानने के लिए फोन किया। फोन पुलिस ने उठाया और पुत्री से घटना की जानकारी दी। घटना की जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवारीजनों ने दिल्ली में रह रहे अपने रिश्तेदारों को अवगत कराया। रिस्तेदार शव का पीएम कराने के बाद पुलिस से लेकर जब शनिवार की सुबह गांव पहुंचे, तो घर में कोहराम मच गया।
पत्नी मंजू, पुत्रियों में विधि (19), निधि (16), एक पुत्र प्रियांशू (8) का रो-रोकर हाल बेहाल है। पत्नी रोते-रोते यही कह रही थी कि इस बार लॉकडाउन में तीन महीने से यही रहे। घर से अबकी यही कह कर गए कि बिटिया की शादी करनी है। कुछ रुपये इकट्ठा कर लें, फिर गांव में ही रहेंगे, लेकिन भगवान को यह मंजूर नहीं था।