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बुखार से दो की मौत, 25 मासूम भर्ती
रायबरेली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2015 12:25 AM IST
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जिले में गर्मी के साथ ही संक्रामक रोग का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। बुखार से बच्ची और महिला की मौत हो गई, जबकि 25 मासूमों को डायरिया और बुखार की चपेट में आने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रोगियों की बढ़ती संख्या के बावजूद अस्पताल में इलाज के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है। ग्लूकोज की बोतल और दवाओं की कमी बनी है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी की वजह से लोग बीमार हो रह हैं। सबको सावधानी बरतने की जरूरत है।
चिपचिपी गर्मी और चिलचिलाती धूप के कारण संक्रामक रोग ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। जिला अस्पताल हो या फिर देहात क्षेत्रों की सीएचसी-पीएचसी प्रतिदिन डायरिया, बुखार के रोगी इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
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डीह के शेखाड़ी गांव की पांच वर्षीय खुशी को बुखार आने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार की रात इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। महराजगंज के लोधवामऊ की साजिदा (50) की बुखार की चपेट में आने से सांसें हमेशा के लिए थम गईं।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड की हालत सबसे ज्यादा पतली है। वार्ड में 36 बेड हैं। 24 घंटे के अंदर यहां 33 बच्चे भर्ती किए गए हैं। इनमें 20 बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं, जबकि पांच बच्चे बुखार से पीड़ित हैं।
इसमें कार्मित (7 माह) निवासी निगोही डीह, आदित्य शर्मा (डेढ़ साल) निवासी मलिकमऊ, सीमा (चार माह) निवासी हमीरपुर, प्रांशु (12) निवासी कुंदनगंज हरचंदपुर, रमन गुप्ता (डेढ़ साल) निवासी दीनशाह, चंद्रकांत (छह माह) निवासी थुलावासा, अर्पित कुमार (छह माह), आभाष कुमार (आठ माह) निवासी हींगामऊ डलमऊ, सृष्टी (डेढ़ साल) निवासी अहियारायपुर आदि उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं।
बच्चों के परिवारीजनों का कहना है कि ग्लूकोज की बोतल बाहर से खरीदनी पड़ रही है। दवाएं भी नहीं हैं, उन्हें भी बाहर से खरीदना पड़ रहा है। सीएमएस डॉ. एससी श्रीवास्तव का कहना है कि अस्पताल में दवाओं की कमी नहीं है। यहां भर्ती होने वाले रोगियों का बेहतर इलाज किया जाता है।
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रोगियों की बढ़ती संख्या के बावजूद अस्पताल में इलाज के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है। ग्लूकोज की बोतल और दवाओं की कमी बनी है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी की वजह से लोग बीमार हो रह हैं। सबको सावधानी बरतने की जरूरत है।
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चिपचिपी गर्मी और चिलचिलाती धूप के कारण संक्रामक रोग ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। जिला अस्पताल हो या फिर देहात क्षेत्रों की सीएचसी-पीएचसी प्रतिदिन डायरिया, बुखार के रोगी इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
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डीह के शेखाड़ी गांव की पांच वर्षीय खुशी को बुखार आने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार की रात इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। महराजगंज के लोधवामऊ की साजिदा (50) की बुखार की चपेट में आने से सांसें हमेशा के लिए थम गईं।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड की हालत सबसे ज्यादा पतली है। वार्ड में 36 बेड हैं। 24 घंटे के अंदर यहां 33 बच्चे भर्ती किए गए हैं। इनमें 20 बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं, जबकि पांच बच्चे बुखार से पीड़ित हैं।
इसमें कार्मित (7 माह) निवासी निगोही डीह, आदित्य शर्मा (डेढ़ साल) निवासी मलिकमऊ, सीमा (चार माह) निवासी हमीरपुर, प्रांशु (12) निवासी कुंदनगंज हरचंदपुर, रमन गुप्ता (डेढ़ साल) निवासी दीनशाह, चंद्रकांत (छह माह) निवासी थुलावासा, अर्पित कुमार (छह माह), आभाष कुमार (आठ माह) निवासी हींगामऊ डलमऊ, सृष्टी (डेढ़ साल) निवासी अहियारायपुर आदि उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं।
बच्चों के परिवारीजनों का कहना है कि ग्लूकोज की बोतल बाहर से खरीदनी पड़ रही है। दवाएं भी नहीं हैं, उन्हें भी बाहर से खरीदना पड़ रहा है। सीएमएस डॉ. एससी श्रीवास्तव का कहना है कि अस्पताल में दवाओं की कमी नहीं है। यहां भर्ती होने वाले रोगियों का बेहतर इलाज किया जाता है।