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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   Two million farmers have not received compensation

दो लाख किसानों को नहीं मिला मुआवजा

Wed, 07 Oct 2015 11:21 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 07 Oct 2015 11:21 PM IST
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पंचायत चुनाव के कारण शासन से बजट नहीं आया है। ऐसे में मुआवजा वितरण का कार्य ठप हो गया है। पहले से ही तंगहाली झेल रहे किसानों के लिए धान, उड़द आदि की फसल सूख जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा है।
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कई ऐसे किसान हैं, जिन्होंने ऋण लेकर धान की रोपाई की थी। उन्हें सूझ नहीं रहा कि वह कैसे कर्ज चुकाएंगे।जिले में तीन लाख 85 हजार किसान है। गेहूं की फसल का नुकसान होने पर जिला प्रशासन की ओर से 1.91 अरब की डिमांड शासन को भेजी गई थी।
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इसके सापेक्ष मात्र अब तक 49.35 करोड़ रुपये का बजट ही दिया गया है। इसमें से करीब एक लाख 85 हजार किसानों को मुआवजा मिला है। दो लाख किसानों को अब भी मुआवजा मिलने की दरकार है।
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इनको देने के लिए अभी भी एक अरब 41 करोड़ से ज्यादा धन चाहिए। यह हाल तब है, जब जिले में सूखे के हालात हैं। गेहूं के साथ ही 50 फीसदी धान की फसल बर्बाद हो गई है।

धान, उड़द, अरहर आदि की फसल नष्ट हो गई है। ऐसे में दिन-रात मेहनत करने वाले किसानों के चेहरे पर बेबसी साफ देखी जा सकती है। वे लगातार दो सीजन की फसलों के नुकसान से परेशान हैं।

मुआवजे के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। तहसील पहुंचने पर ही टका सा जवाब मिलता है कि बजट आएगा तो मुआवजा मिलेगा। दर्द ये भी है कि कई किसान ऐसे हैं, जिन्होंने किसान क्रेडिड कार्ड से रुपया लेकर धान की रोपाई की थी।

फसल बर्बाद से लागत निकालने की उम्मीद खत्म हो गई है। ऐसे में उनकी रातों की नींद हराम हो गई है। क्षेत्रीय किसान मुन्नू तिवारी, शिव मोहन, हरिकेश सिंह, राज बहादुर यादव, ओम प्रकाश और शेर बहादुर का कहना है कि शासन से लेकर जिला प्रशासन पंचायत चुनाव कराने में जुटा है, लेकिन किसी का ध्यान किसानों की तरफ नहीं है।

गेहूं के साथ ही धान, उड़द आदि की फसल बर्बाद हो गई है। गेहूं नुकसान का मुआवजा भी अभी तक नहीं मिल पाया है। तहसील जाने पर आज कल की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है।


हाल यही रहा तो परिवार दो वक्त की रोजी-रोटी के लिए लाले पड़ जाएगा। यदि गेहूं की फसल के नुकसान का मुआवजा मिल जाए तो काफी राहत मिल सकती है।

एडीएम वित्त एवं राजस्व शीतला प्रसाद का कहना है कि शासन से 1.91 अरब रुपये की डिमांड की गई थी। इसमें से 49.35 करोड़ रुपये का बजट शासन ने उपलब्ध कराया था।

जिसे तहसीलों में भेज दिया गया है। अभी तक और कोई बजट नहीं भेजा गया है। बजट आने पर किसानों में मुआवजा का वितरण कराया जाएगा।
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