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मॉडर्न रेल कोच फैक्टरी में सुधा सिंह सिखाएंगी खेल की बारीकियां
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रायबरेली। पद्मश्री सुधा सिंह अब इसी जिले में रहकर खिलाड़ियों को खेल की बारीकियां सिखाएंगी। डेढ़ दशक तक सेंट्रल रेलवे मुंबई में बतौर स्पोर्ट्स अफसर अपनी सेवाएं देने वाली सुधा सिंह का स्थानांतरण इसी जिले के लालगंज स्थित मॉडर्न कोच फैक्टरी में हो गया है। वह आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना (आरेडिका) में बतौर स्पोर्ट्स अफसर काम करेंगी।
शहर के शिवाजी नगर निवासी सुधा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्हें ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। इसी साल पद्मश्री से भी नवाजा गया। एथलेटिक्स में सबसे कठिन मानी जाने वाली स्पर्धा स्टीपल चेज में उन्होंने अपना लोहा मनवाया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं। सुधा सिंह का सपना इस जिले में अकादमी खोलने का भी है, ताकि जिले की प्रतिभाओं को निखार कर उन्हें आगे बढ़ाया जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि रायबरेली में रहकर वह अपने सपने को शीघ्र पूरा कर सकेंगी।
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सुधा सिंह के अब इसी जिले के लालगंज स्थित आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में ज्वाइन करने से यहां के खिलाड़ी उत्साहित हैं। फोन पर हुई बातचीत में एथलीट सुधा सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2005 से सेंट्रल रेलवे मुंबई में स्पोर्ट्स अफसर के रूप में कार्य कर रही थी। उन्हें मॉडर्न कोच फैक्टरी लालगंज में स्थानांतरित कर दिया गया है।
सुधा के भाई प्रवेश सिंह ने बताया कि माडर्न कोच फैक्टरी में ज्वाइनिंग के संबंध में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। बस अब सुधा सिंह के ज्वाइन करने की देरी है। एक-दो दिन में वह ज्वाइन कर लेंगी।
कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए बंगलूरू जाएंगी
आरेडिका में ज्वाइन करने के बाद सुुधा सिंह कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी करेंगी। इसके लिए वह बंगलूरू जाएंगी। सुधा सिंह ने बताया कि अगले साल अगस्त-सितंबर में कामनवेल्थ गेम्स होने हैं, जिसके लिए बंगलूरू में लगने वाले कैंप के लिए वह चार-पांच दिन बाद वहां चली जाएंगी।
कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
सुधा सिंह की उपलब्धियों और सफलताओं की लंबी फेहरिस्त है। वर्ष 2003 में स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ ज्वाइन करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2003 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2004 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 2007 में नेशनल गेम्स और 2008 में सीनियर ओपन नेशनल में पहला स्थान बनाया।
वर्ष 2009 में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। इसके बाद 2010 में हुए एशियन खेल की 3000 मीटर स्टीपल चेज स्पर्धा में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। 2013 में एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली सुधा ने 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में रजत पदक जीता। ओलंपिक में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।
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शहर के शिवाजी नगर निवासी सुधा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्हें ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। इसी साल पद्मश्री से भी नवाजा गया। एथलेटिक्स में सबसे कठिन मानी जाने वाली स्पर्धा स्टीपल चेज में उन्होंने अपना लोहा मनवाया है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं। सुधा सिंह का सपना इस जिले में अकादमी खोलने का भी है, ताकि जिले की प्रतिभाओं को निखार कर उन्हें आगे बढ़ाया जा सके। ऐसा माना जा रहा है कि रायबरेली में रहकर वह अपने सपने को शीघ्र पूरा कर सकेंगी।
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सुधा सिंह के अब इसी जिले के लालगंज स्थित आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में ज्वाइन करने से यहां के खिलाड़ी उत्साहित हैं। फोन पर हुई बातचीत में एथलीट सुधा सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2005 से सेंट्रल रेलवे मुंबई में स्पोर्ट्स अफसर के रूप में कार्य कर रही थी। उन्हें मॉडर्न कोच फैक्टरी लालगंज में स्थानांतरित कर दिया गया है।
सुधा के भाई प्रवेश सिंह ने बताया कि माडर्न कोच फैक्टरी में ज्वाइनिंग के संबंध में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। बस अब सुधा सिंह के ज्वाइन करने की देरी है। एक-दो दिन में वह ज्वाइन कर लेंगी।
कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए बंगलूरू जाएंगी
आरेडिका में ज्वाइन करने के बाद सुुधा सिंह कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी करेंगी। इसके लिए वह बंगलूरू जाएंगी। सुधा सिंह ने बताया कि अगले साल अगस्त-सितंबर में कामनवेल्थ गेम्स होने हैं, जिसके लिए बंगलूरू में लगने वाले कैंप के लिए वह चार-पांच दिन बाद वहां चली जाएंगी।
कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
सुधा सिंह की उपलब्धियों और सफलताओं की लंबी फेहरिस्त है। वर्ष 2003 में स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ ज्वाइन करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2003 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2004 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 2007 में नेशनल गेम्स और 2008 में सीनियर ओपन नेशनल में पहला स्थान बनाया।
वर्ष 2009 में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। इसके बाद 2010 में हुए एशियन खेल की 3000 मीटर स्टीपल चेज स्पर्धा में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। 2013 में एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली सुधा ने 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में रजत पदक जीता। ओलंपिक में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।