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अस्पतालों में जरूरी जांचें बंद, बाजार से जांच करा रहे मरीज
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केस एक-
दो साल से नहीं खुला अल्ट्रासाउंड सेंटर का ताला
जिला महिला अस्पताल में करीब दो साल से अल्ट्रासाउंड सेंटर का ताला नहीं खुला है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह जांच सबसे जरूरी होती है। इसके बाद भी यहां जांच की सुविधा नहीं है। ओपीडी में आने वाली महिलाओं को भारी रकम चुकाकर प्राइवेट लैब से जांच करवानी पड़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग समस्या को लेकर संजीदा नहीं है।
केस दो-
ऊंचाहार में धूल खा रही एक्सरे मशीन
लखनऊ-प्रयागराज हाईवे के किनारे बनी ऊंचाहार सीएचसी में एक्सरे की जांच की मशीनें लंबे समय से धूल खा रही हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन को तो डिब्बे से ही बाहर नहीं निकाला गया है। ऐसी स्थिति में मरीजों को बाजार से जांच करवानी पड़ रही है। जांच करने के लिए चिकित्सक न होने के कारण शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
रायबरेली। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जांच के नाम पर ठगा जा रहा है। जिला महिला अस्पताल और सभी सीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांचें बंद हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में सामान्य जांचें ही उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में भी सभी जांचों की सुविधा नहीं मिल रही है। मजबूरन मरीजों को निजी लैब से महंगी जांचें करवानी पड़ रही हैं।
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शासन ने सरकारी अस्पतालों में सारी जांचें मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए हर साल करोड़ रुपये भी खर्च किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। मलेरिया, हीमोग्लोबिन, टीबी सहित ब्लड की कुछ जांचें ही सीएचसी में उपलब्ध हैं।
कई सीएचसी में तो शुगर की जांच भी नहीं हो रही है। अल्ट्रासाउंड जांच जिले की किसी भी सीएचसी में नहीं हो रही है। एक्सरे जांच की सुविधा भी डलमऊ, ऊंचाहार, सलोन, शिवगढ़ में ही उपलब्ध है। अस्पतालों में जांच की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को इलाज की समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सोनोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण जांचें प्रभावित हैं। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड शुरू कराने के लिए सीएमएस की ओर से कई बार पत्र लिखा गया है। जल्द ही विशेषज्ञों की व्यवस्था होने के बाद ही जांच शुरू हो सकेगी।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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दो साल से नहीं खुला अल्ट्रासाउंड सेंटर का ताला
जिला महिला अस्पताल में करीब दो साल से अल्ट्रासाउंड सेंटर का ताला नहीं खुला है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह जांच सबसे जरूरी होती है। इसके बाद भी यहां जांच की सुविधा नहीं है। ओपीडी में आने वाली महिलाओं को भारी रकम चुकाकर प्राइवेट लैब से जांच करवानी पड़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग समस्या को लेकर संजीदा नहीं है।
केस दो-
ऊंचाहार में धूल खा रही एक्सरे मशीन
लखनऊ-प्रयागराज हाईवे के किनारे बनी ऊंचाहार सीएचसी में एक्सरे की जांच की मशीनें लंबे समय से धूल खा रही हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन को तो डिब्बे से ही बाहर नहीं निकाला गया है। ऐसी स्थिति में मरीजों को बाजार से जांच करवानी पड़ रही है। जांच करने के लिए चिकित्सक न होने के कारण शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
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रायबरेली। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जांच के नाम पर ठगा जा रहा है। जिला महिला अस्पताल और सभी सीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांचें बंद हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में सामान्य जांचें ही उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल में भी सभी जांचों की सुविधा नहीं मिल रही है। मजबूरन मरीजों को निजी लैब से महंगी जांचें करवानी पड़ रही हैं।
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शासन ने सरकारी अस्पतालों में सारी जांचें मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए हर साल करोड़ रुपये भी खर्च किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। मलेरिया, हीमोग्लोबिन, टीबी सहित ब्लड की कुछ जांचें ही सीएचसी में उपलब्ध हैं।
कई सीएचसी में तो शुगर की जांच भी नहीं हो रही है। अल्ट्रासाउंड जांच जिले की किसी भी सीएचसी में नहीं हो रही है। एक्सरे जांच की सुविधा भी डलमऊ, ऊंचाहार, सलोन, शिवगढ़ में ही उपलब्ध है। अस्पतालों में जांच की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को इलाज की समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सोनोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण जांचें प्रभावित हैं। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड शुरू कराने के लिए सीएमएस की ओर से कई बार पत्र लिखा गया है। जल्द ही विशेषज्ञों की व्यवस्था होने के बाद ही जांच शुरू हो सकेगी।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ