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रक्षाबंधन से पहले भाई-बहन की मौत: लाचार मां विदेश से नहीं आ सकी पंजाब, वीडियो पर देखा बच्चों का अंतिम संस्कार
Thu, 27 Aug 2026 05:35 PM IST
शाहिल शर्मा
कंवरपाल, हलवारा
कंवरपाल, हलवारा
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Thu, 27 Aug 2026 05:35 PM IST
सार
बीते करीब डेढ़ साल से ओमान में बच्चों की मां एक शेख परिवार के घर नौकरानी के तौर पर काम कर रही है। बच्चों की मौत की खबर मिलने के बाद उसने शेख परिवार से बार-बार गुहार लगाई कि उसे अपने बच्चों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत जाने दिया जाए, लेकिन उसे छुट्टी नहीं दी गई।
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वीडियो कॉल पर मां ने देखा अपने बच्चों का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बिजली चले जाने से आंगन में सो रहे दो मासूम भाई-बहन के लिए जहरीले सांप का डंक मौत का पैगाम बन गया। गांव बस्सियां की उप्पल पत्ती में मंगलवार रात सांप के डसने से गंभीर रूप से घायल सात वर्षीय जसप्रीत कौर की मौत के करीब 18 घंटे बाद उसके आठ वर्षीय भाई जोबनप्रीत सिंह ने भी बुधवार रात लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में दम तोड़ दिया।
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गुरुवार बाद दोपहर बस्सियां के श्मशानघाट में दोनों भाई-बहन का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले दो मासूमों की एक साथ जलती चिताओं का दृश्य देखकर श्मशानघाट में मौजूद हर आंख नम हो गई।
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आधी रात बिस्तर के नीचे बैठा था सांप, भाई ने दादी को जगाया
परिजनों के मुताबिक, रात करीब तीन बजे जोबनप्रीत की नींद खुली। उसने पास सो रही दादी को जगाकर बताया कि उसके हाथ में कुछ हुआ है। परिवार के लोगों ने उठकर देखा तो बिस्तर के नीचे सांप बैठा था। पड़ोसियों की मदद से जोबनप्रीत को तत्काल रायकोट के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे लुधियाना के सीएमसी अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसी दौरान पास ही सो रही सात वर्षीय जसप्रीत कौर को सांप के डसने का पता परिवार को रात में नहीं चल सका। सुबह करीब पांच बजे उसने सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। कुछ ही देर में उसके मुंह से झाग निकलने लगा। परिजन उसे रायकोट सिविल अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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18 घंटे बाद भाई ने भी तोड़ा दम
बेटी की मौत के सदमे से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि करीब 18 घंटे बाद जोबनप्रीत की हालत भी बिगड़ गई। लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके साथ ही परिवार की दोनों उम्मीदें एक ही दिन में खत्म हो गईं। बुधवार रात बच्चे की मौत की खबर गांव पहुंचते ही बस्सियां में मातम पसर गया।
ओमान में थी मां, बर्तन मांजते हुए देखा अंतिम संस्कार
इस दर्दनाक हादसे का सबसे कलेजा चीर देने वाला पहलू बच्चों की मां सरबजीत कौर से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, वह पिछले करीब डेढ़ साल से ओमान में एक शेख परिवार के घर नौकरानी के तौर पर काम कर रही है। बच्चों की मौत की खबर मिलने के बाद सरबजीत कौर ने शेख परिवार से बार-बार गुहार लगाई कि उसे अपने बच्चों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत जाने दिया जाए, लेकिन आरोप है कि उसे छुट्टी नहीं दी गई और उसका पासपोर्ट देने से साफ इंकार कर दिया गया।
विलाप करता पिता
- फोटो : संवाद
परिवार का आरोप है कि सरबजीत कौर को शेख परिवार द्वारा भागने की सूरत में पुलिस के हवाले कर जेल भिजवाने और पिछले तीन महीने की मजदूरी भी नहीं देने की धमकी दी गई । मजबूर मां सरबजीत कौर अपने जिगर के टुकड़ों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सकी। गुरुवार को जब बस्सियां के श्मशानघाट में दोनों बच्चों की चिताएं सजाई जा रही थीं, तब सरबजीत कौर ओमान से वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार देख रही थी। मोबाइल स्क्रीन पर मां एक ओर अपने बच्चों को आखिरी विदाई देती दिखाई दे रही थी, तो दूसरी ओर वह उसी समय शेख के घर में बर्तन मांज रही थी। बर्तन मांजते हुए उसके रोने, चीखने और चिल्लाने की आवाजें सुनकर वीडियो कॉल पर जुड़े परिजनों और श्मशानघाट में मौजूद लोगों के दिल दहल उठे।
बच्चों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते गांव के लोग
- फोटो : संवाद
बच्चों की चिताओं के सामने गिरा पिता
पिता अमनदीप सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों बच्चों की अर्थियां सामने थीं और वह खुद को संभाल नहीं पा रहा था। अंतिम संस्कार के दौरान वह कई बार बेसुध होकर गिर पड़ा। कभी बच्चों की ओर देखता तो कभी आसमान की तरफ हाथ उठाकर फूट-फूटकर रोने लगता। पिता की हालत देखकर श्मशानघाट में मौजूद ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।
परिवार ने लगाया गंभीर आरोप
जोबनप्रीत की मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि बुधवार को रायकोट से जोबनप्रीत को लुधियाना ले जा रही सरकारी एंबुलेंस बेहद धीमी गति से चली। परिवार के मुताबिक, करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एंबुलेंस चलने के कारण बच्चे को लुधियाना पहुंचने और उपचार मिलने में देरी हुई।
पिता अमनदीप सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों बच्चों की अर्थियां सामने थीं और वह खुद को संभाल नहीं पा रहा था। अंतिम संस्कार के दौरान वह कई बार बेसुध होकर गिर पड़ा। कभी बच्चों की ओर देखता तो कभी आसमान की तरफ हाथ उठाकर फूट-फूटकर रोने लगता। पिता की हालत देखकर श्मशानघाट में मौजूद ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।
परिवार ने लगाया गंभीर आरोप
जोबनप्रीत की मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि बुधवार को रायकोट से जोबनप्रीत को लुधियाना ले जा रही सरकारी एंबुलेंस बेहद धीमी गति से चली। परिवार के मुताबिक, करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एंबुलेंस चलने के कारण बच्चे को लुधियाना पहुंचने और उपचार मिलने में देरी हुई।
श्मशान घाट पर भावुक कर देने वाले पल
- फोटो : संवाद
20 हजार रुपये जमा कराने के बाद इलाज शुरू होने का आरोप
परिजनों ने लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में भी कथित तौर पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जोबनप्रीत को आईसीयू में दाखिल करने और इलाज शुरू करने से पहले उसके पिता अमनदीप सिंह से 20 हजार रुपये जमा करवाने को कहा गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इतनी रकम जुटाना मुश्किल था। परिवार के मुताबिक, गांव के एक व्यक्ति को अपनी भैंस बेचकर पैसे जुटाने पड़े, जबकि गांव के युवाओं ने भी आपस में चंदा इकट्ठा कर 20 हजार रुपये अस्पताल में जमा करवाए। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार या प्रशासन की ओर से पूरा दिन बीत जाने के बावजूद परिवार को तत्काल आर्थिक मदद नहीं मिली।
परिजनों ने लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में भी कथित तौर पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जोबनप्रीत को आईसीयू में दाखिल करने और इलाज शुरू करने से पहले उसके पिता अमनदीप सिंह से 20 हजार रुपये जमा करवाने को कहा गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इतनी रकम जुटाना मुश्किल था। परिवार के मुताबिक, गांव के एक व्यक्ति को अपनी भैंस बेचकर पैसे जुटाने पड़े, जबकि गांव के युवाओं ने भी आपस में चंदा इकट्ठा कर 20 हजार रुपये अस्पताल में जमा करवाए। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार या प्रशासन की ओर से पूरा दिन बीत जाने के बावजूद परिवार को तत्काल आर्थिक मदद नहीं मिली।