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डीबीटी में ढिलाई, एडी ने लगाई फटकार, कार्रवाई की चेतावनी

Sun, 09 Jan 2022 12:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 12:18 AM IST
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83 thaousand students  waiting for their DBT
रायबरेली। जिले में कक्षा एक से आठ तक के लगभग 83 हजार छात्र-छात्राओं को अब तक यूनिफार्म, स्वेटर, जूता-मोजा, स्कूल बैग क्रय की धनराशि नहीं मिल सकी है। इसे गंभीरता से लिया गया है। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने आनलाइन मीटिंग कर सभी बीईओ को चेतावनी दी कि अगर समय से काम पूरा नहीं किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में दो लाख 90 हजार 108 बच्चे नामांकित हैं, जिन्हें डीबीटी के माध्यम से 11-11 सौ रुपये भेजे जाने हैं। अब तक दो चरणों में दो लाख सात हजार 986 बच्चों को लाभान्वित कराया जा चुका है। इन बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों के बैंक खातों में रकम भेज दी गई है। अभी भी 83,122 बच्चों को लाभ मिलना बाकी है। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) पीएन सिंह ने दो दिन ऑनलाइन के जरिए समीक्षा बैठक की।
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जिसमें बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह, डीसी एमआईएस अविलय सिंह के साथ ही सभी बीईओ शामिल हुए। इस दौरान ज्यादातर ब्लाकों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। एडी बेसिक ने दो दिन के भीतर लंबित डेटा का निदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीएसए को भेजे पत्र में यह भी कहा कि ऐसा न करने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। एडी बेसिक ने बीएसए को भी चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि पेंडिंग डेटा को समय से पूरा कराएं।
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डीबीटी प्रक्रिया पूरी होने में नान-सीडेड और सस्पेक्टेड डेटा से पेंच फंस रहा है, जिससे प्रगति रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग का पूरा अमला पिछले एक हफ्ते से युद्धस्तर पर जुटा है। शत-प्रतिशत बच्चों को लाभान्वित कराने के लिए उच्चाधिकारी भी समीक्षा कर रहे हैं। जिले में अभी भी 83 हजार बच्चे लाभ पाने से वंचित हैं। इसमें 28,707 बच्चों का डेटा पेमेंट के लिए तैयार कर लिया गया है, जबकि लगभग 22 हजार बच्चों का डेटा भी प्रक्रिया के अंतिम दौर में है।
सबसे ज्यादा दिक्कत 32,042 बच्चों के डेटा से आ रही है, जिस पर ब्रेक लगा हुआ है। इसमें साढ़े छह हजार बच्चों का डेटा अध्यापकों के स्तर पर तो करीब तीन हजार बच्चों का डेटा बीईओ के स्तर पर रुका है। लगभग नौ हजार डेटा सस्पेक्टेड और करीब 12 हजार डेटा नान-सीडेड है।

काफी तेजी से काम पूरा किया जा रहा है। पांच दिन पहले पेंडिंग डाटा लगभग 82 हजार था, जो अब घटकर 32 हजार रह गया है। लगभग 28 हजार बच्चों का डाटा भुगतान के लिए तैयार है, जबकि लगभग 22 हजार डेटा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्दी ही प्रक्रिया पूरी कर बच्चों को लाभान्वित करा दिया जाएगा।
- शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए।
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