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Raebareli News: विद्यालय की लापरवाही से 76 विद्यार्थी हुए फेल
Sun, 26 Apr 2026 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sun, 26 Apr 2026 12:47 AM IST
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सतांव (रायबरेली)। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) की परीक्षा में एक ही स्कूल के 76 बच्चे महज इसलिए अनुत्तीर्ण कर दिए गए, क्योंकि इनके अंकपत्रों में प्रायोगिक परीक्षा में अनुपस्थित दिखाया गया है। रिजल्ट आने के बाद जैसे ही बच्चों ने आनलाइन अंकपत्र देखा तो उनके होश उड़ गए।
अभिभावकों को जब इस बात का पता चला तो वे नाराज होकर विद्यालय भी पहुंचे थे, लेकिन विद्यालय में ताला लटकता मिला था। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ विद्यालय के व्यवस्थापक का कहना है कि समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मामला सर्वोदय इंटर कालेज किलौली का है, जहां हाईस्कूल के सभी 76 परीक्षार्थियों को परीक्षा देने के बाद अनुत्तीर्ण का अंकपत्र जारी हो गया है। बृहस्पतिवार को रिजल्ट आया तो इन सभी ने आनलाइन अंकत्र देखे, जिसमें लिखित परीक्षा में काफी अच्छे अंक मिले हैं।
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प्रैक्टिकल वाले कॉलम में एए अंकित है। यानी कि अनुपस्थित दिखाया गया है। इस वजह से सभी बच्चे फेल हो गए हैं। रिजल्ट वाले दिन ही बच्चों के साथ अभिभावक विद्यालय पहुंचे थे, लेकिन स्कूल में ताला लटकता मिला था। प्रभावित परीक्षार्थियों में 40 बालिकाएं और 36 बालक शामिल हैं। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन से फोन पर बातचीत कर अपनी नाराजगी जताई। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय पर लापरवाही से ऐसा हुआ है।
किलौली गांव निवासी अभिभावक राजेश कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही से छात्रों का भविष्य चौपट हुआ है। उन्होंने विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परीक्षार्थी पायल मौर्या का कहना है कि लिखित और प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होने के बाद भी फेल कर दिया गया। पायल ने बताया कि उनके पिता संतोष मौर्य मजदूरी करके उन्हें पढ़ा रहे हैं। फेल की मार्कशीट देखी तो पूरा परिवार परेशान है। परीक्षार्थी अभिषेक ने बताया कि लिखित परीक्षा में नंबर अच्छे आए हैं, प्रैक्टिकल में अनुपस्थित लिखा होने से फेल हो गए हैं। विद्यालय के व्यवस्थापक मोहनीश त्रिवेदी का कहना है कि स्कूल से कोई लापरवाही नहीं हुई है। समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
अब तक की छानबीन में यह सामने आया है कि आंतरिक मूल्यांकन में ग्रेडिंग सिस्टम के तहत सिर्फ एक बार ए लिखा जाना था, लेकिन विद्यालय स्तर पर डबल ए लिख दिया गया, जिसे अनुपस्थित माना जाता है। अब विद्यालय स्तर से ही इसमें सुधार करने के लिए प्रक्रिया शुरू करनी होगी। प्रयास किया जाएगा कि बच्चों के भविष्य से कोई खिलवाड़ न हो।
-संजीव कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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अभिभावकों को जब इस बात का पता चला तो वे नाराज होकर विद्यालय भी पहुंचे थे, लेकिन विद्यालय में ताला लटकता मिला था। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ विद्यालय के व्यवस्थापक का कहना है कि समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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मामला सर्वोदय इंटर कालेज किलौली का है, जहां हाईस्कूल के सभी 76 परीक्षार्थियों को परीक्षा देने के बाद अनुत्तीर्ण का अंकपत्र जारी हो गया है। बृहस्पतिवार को रिजल्ट आया तो इन सभी ने आनलाइन अंकत्र देखे, जिसमें लिखित परीक्षा में काफी अच्छे अंक मिले हैं।
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प्रैक्टिकल वाले कॉलम में एए अंकित है। यानी कि अनुपस्थित दिखाया गया है। इस वजह से सभी बच्चे फेल हो गए हैं। रिजल्ट वाले दिन ही बच्चों के साथ अभिभावक विद्यालय पहुंचे थे, लेकिन स्कूल में ताला लटकता मिला था। प्रभावित परीक्षार्थियों में 40 बालिकाएं और 36 बालक शामिल हैं। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन से फोन पर बातचीत कर अपनी नाराजगी जताई। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय पर लापरवाही से ऐसा हुआ है।
किलौली गांव निवासी अभिभावक राजेश कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही से छात्रों का भविष्य चौपट हुआ है। उन्होंने विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परीक्षार्थी पायल मौर्या का कहना है कि लिखित और प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होने के बाद भी फेल कर दिया गया। पायल ने बताया कि उनके पिता संतोष मौर्य मजदूरी करके उन्हें पढ़ा रहे हैं। फेल की मार्कशीट देखी तो पूरा परिवार परेशान है। परीक्षार्थी अभिषेक ने बताया कि लिखित परीक्षा में नंबर अच्छे आए हैं, प्रैक्टिकल में अनुपस्थित लिखा होने से फेल हो गए हैं। विद्यालय के व्यवस्थापक मोहनीश त्रिवेदी का कहना है कि स्कूल से कोई लापरवाही नहीं हुई है। समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।
अब तक की छानबीन में यह सामने आया है कि आंतरिक मूल्यांकन में ग्रेडिंग सिस्टम के तहत सिर्फ एक बार ए लिखा जाना था, लेकिन विद्यालय स्तर पर डबल ए लिख दिया गया, जिसे अनुपस्थित माना जाता है। अब विद्यालय स्तर से ही इसमें सुधार करने के लिए प्रक्रिया शुरू करनी होगी। प्रयास किया जाएगा कि बच्चों के भविष्य से कोई खिलवाड़ न हो।
-संजीव कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।