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स्नातक में योग की पढ़ाई अनिवार्य, तैनात होंगे प्रशिक्षक
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Yoga education is mandatory in graduation, instructors will be posted
राज्य विश्वविद्यालय ने स्नातक पाठ्यक्रम में योग की पढ़ाई को अनिवार्य कर दिया है। पढ़ाई के साथ कॉलेजों में योग का प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। इसी सत्र से प्रशिक्षण देने के लिए योग शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी। प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय ने सत्र 2022-23 से स्नातक स्तर पर अनिवार्य सहगामी पाठ्यक्रम को लागू किया है। विद्यार्थियों के लिए सहगामी पाठ्यक्रम का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।
सहगामी पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षिक संसाधनों की व्यवस्था कॉलेजों द्वारा की जाएगी। विश्वविद्यालय ने स्नातक के चतुर्थ सेमेस्टर में शारीरिक शिक्षा और योग के पाठ्यक्रम को लागू किया है। विद्यार्थियों को सेमेस्टर के दौरान पढ़ाई के साथ शारीरिक शिक्षा और योग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। योग कक्षाओं के संचालन के लिए कॉलेजों में योग शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
योग शिक्षक प्रतिदिन प्रशिक्षण देने के साथ कक्षाओं का संचालन करेंगे। विद्यार्थियों को सभी विषयों के साथ शारीरिक शिक्षा और योग की भी परीक्षा देनी होगी। हालांकि सहगामी पाठ्यक्रम की परीक्षा क्वालीफाइंग होगी। 100 अंकों के प्रश्नपत्र में 40 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य होगा।
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कॉलेजों में नहीं हैं योग शिक्षक
राज्य विश्वविद्यालय ने भले ही अनिवार्य सहगामी पाठ्यक्रम के तहत शारीरिक शिक्षा और योग विषय को लागू कर दिया है, लेकिन जिले के अधिकांश कॉलेजों में योग शिक्षक ही नहीं हैं। ऐसे में जुलाई से शुरू होने जा रहे शिक्षण सत्र में योग की कक्षाओं का संचालन करना मुश्किल होगा।
स्नातक के चतुर्थ सेमेस्टर में शारीरिक शिक्षा और योग को अनिवार्य सहगामी पाठ्यक्रम के तहत लागू किया गया है। योग के प्रशिक्षण और पठन-पाठन के लिए कॉलेजों को निर्देश दिया गया है। डॉ. अखिलेश सिंह, कुलपति, राज्य विवि
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सहगामी पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षिक संसाधनों की व्यवस्था कॉलेजों द्वारा की जाएगी। विश्वविद्यालय ने स्नातक के चतुर्थ सेमेस्टर में शारीरिक शिक्षा और योग के पाठ्यक्रम को लागू किया है। विद्यार्थियों को सेमेस्टर के दौरान पढ़ाई के साथ शारीरिक शिक्षा और योग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। योग कक्षाओं के संचालन के लिए कॉलेजों में योग शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
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योग शिक्षक प्रतिदिन प्रशिक्षण देने के साथ कक्षाओं का संचालन करेंगे। विद्यार्थियों को सभी विषयों के साथ शारीरिक शिक्षा और योग की भी परीक्षा देनी होगी। हालांकि सहगामी पाठ्यक्रम की परीक्षा क्वालीफाइंग होगी। 100 अंकों के प्रश्नपत्र में 40 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य होगा।
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कॉलेजों में नहीं हैं योग शिक्षक
राज्य विश्वविद्यालय ने भले ही अनिवार्य सहगामी पाठ्यक्रम के तहत शारीरिक शिक्षा और योग विषय को लागू कर दिया है, लेकिन जिले के अधिकांश कॉलेजों में योग शिक्षक ही नहीं हैं। ऐसे में जुलाई से शुरू होने जा रहे शिक्षण सत्र में योग की कक्षाओं का संचालन करना मुश्किल होगा।
स्नातक के चतुर्थ सेमेस्टर में शारीरिक शिक्षा और योग को अनिवार्य सहगामी पाठ्यक्रम के तहत लागू किया गया है। योग के प्रशिक्षण और पठन-पाठन के लिए कॉलेजों को निर्देश दिया गया है। डॉ. अखिलेश सिंह, कुलपति, राज्य विवि