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सो रही पुलिस, क्यों न बेखौफ हों अपराधी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 09 Jan 2018 11:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
- फोटो : pratapgarah
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हाईवे की सुरक्षा का रियलिटी चेक करने निकली अमर उजाला की टीम सोमवार रात करीब 10.24 बजे भुपियामऊ पुलिस चौकी पहुंची। यहां सन्नाटा था। आसपास कोई नजर नहीं आया। केवल मेज पर चौकी प्रभारी की कैप और डंडा पड़ा था। कमरों का दरवाजा बंद था। चौकी के बाहर वाहन रुका और कैमरे का फ्लैश तस्वीर खींचने के लिए लगातार चमकता रहा, लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि कौन आकर रुका है। उधर भुपियामऊ चौराहे पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अलाव से ठंड दूर कर रहे थे। घने कोहरे के कारण वाहन रुका तो वे कुर्सी से उठे और टार्च जलाकर जानकारी करने लगे। कैमरे का फ्लैश चमकने के बाद वे फिर कुर्सी पर जाकर बैठ गए। कटरा चौराहे पर पुलिस की पिकेट नदारद थी। यही हाल पृथ्वीगंज पुलिस चौकी का भी रहा। पुलिसकर्मी कमरे के भीतर बैठे हुए थे।
जेल में निरुद्ध बंदियों के लिए ही पुलिस प्रशासन की ओर से जेल पुलिस चौकी स्थापित कराई गई है। जहां चौकी प्रभारी से लेकर सिपाहियों तक की तैनाती की गई है। रात करीब 10.53 पर अमर उजाला की टीम पुलिस चौकी पहुंची। कोहरे के बीच चौकी के बाहर की लाइट तो जल रही थी, लेकिन इसका दरवाजा बंद था। जेल की सुरक्षा में लगे पहरेदार ने जागने का अहसास कराया, लेकिन पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी नदारद मिले। तिराहे पर पहुंचने पर होमगार्ड के जवान मिले जो अलाव ताप रहे थे। हालांकि यहां आने-जाने वाले लोगों पर उनकी कोई नजर नहीं थी। वे भी केवल रात में अपनी ड्यूटी का कोरम ही पूरा करते नजर आए। जबकि सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थान पर पुलिस को ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। इस तरह की लापरवाही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाली थी।
इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर रात करीब 10.15 बजे शहर के भंगवाचुंगी चौराहे पर स्थित पुलिस चौकी पर ताला लटकता मिला। चौकी पर न तो होमगार्ड नजर आया और न ही सिपाही। आगे बढने पर निर्मल तिराहे पर भी पुलिस की पिकेट गायब थी। न तो होमगार्ड नजर आए और न ही पुलिसकर्मी। यह पुलिस चौकी हाईवे पर है और एक तरह से कहें तो शहर में प्रवेश का रास्ता भी यहीं से शुरू होता है। इस लिहाज से देखें तो यह पुलिस चौकी बेहद महत्वपूर्ण है।
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इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित मकंद्रूगंज पुलिस चौकी पर रात 11 बजे टीम पहुंची। कमरों की लाइट बुझी हुई थी। बाहर मेज सूनी पड़ी थी। आवाज देने पर भी कोई बाहर नहीं निकला। कैमरे का फ्लैश भी चमकता रहा, लेकिन कोई हलचल नहीं हुई। पुलिस चौकी पर गार्ड तक मौजूद नहीं था। शहर के सबसे ज्यादा व्यापारिक प्रतिष्ठान इसी इलाके में हैं। इसके बाद भी पुलिसकर्मियों की इस तरह की लापरवाही हैरान करने वाली थी
अमर उजाला टीम रात करीब 11.30 पर इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर स्थित चिलबिला पुलिस चौकी पहुंची तो यहां बाहर अलाव जल रहा था। कुछ देर पहले बिहारगंज से होकर लौटा सिपाही ठंड दूर करने के लिए अलाव के आगे बैठा मिला। यहां से टीम कुछ आगे बढ़ी तो चिलबिला चौराहे पर पिकेट की ड्यूटी होमगार्ड के जवानों के हवाले नजर आई। पुलिसकर्मी कहीं नहीं दिखे। महत्वपूर्ण स्थानों पर इस तर की लापरवाही से साफ था कि शहर की सुरक्षा को लेकर पुलिस कितनी गंभीर है।
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जेल में निरुद्ध बंदियों के लिए ही पुलिस प्रशासन की ओर से जेल पुलिस चौकी स्थापित कराई गई है। जहां चौकी प्रभारी से लेकर सिपाहियों तक की तैनाती की गई है। रात करीब 10.53 पर अमर उजाला की टीम पुलिस चौकी पहुंची। कोहरे के बीच चौकी के बाहर की लाइट तो जल रही थी, लेकिन इसका दरवाजा बंद था। जेल की सुरक्षा में लगे पहरेदार ने जागने का अहसास कराया, लेकिन पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी नदारद मिले। तिराहे पर पहुंचने पर होमगार्ड के जवान मिले जो अलाव ताप रहे थे। हालांकि यहां आने-जाने वाले लोगों पर उनकी कोई नजर नहीं थी। वे भी केवल रात में अपनी ड्यूटी का कोरम ही पूरा करते नजर आए। जबकि सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थान पर पुलिस को ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। इस तरह की लापरवाही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाली थी।
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इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर रात करीब 10.15 बजे शहर के भंगवाचुंगी चौराहे पर स्थित पुलिस चौकी पर ताला लटकता मिला। चौकी पर न तो होमगार्ड नजर आया और न ही सिपाही। आगे बढने पर निर्मल तिराहे पर भी पुलिस की पिकेट गायब थी। न तो होमगार्ड नजर आए और न ही पुलिसकर्मी। यह पुलिस चौकी हाईवे पर है और एक तरह से कहें तो शहर में प्रवेश का रास्ता भी यहीं से शुरू होता है। इस लिहाज से देखें तो यह पुलिस चौकी बेहद महत्वपूर्ण है।
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इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित मकंद्रूगंज पुलिस चौकी पर रात 11 बजे टीम पहुंची। कमरों की लाइट बुझी हुई थी। बाहर मेज सूनी पड़ी थी। आवाज देने पर भी कोई बाहर नहीं निकला। कैमरे का फ्लैश भी चमकता रहा, लेकिन कोई हलचल नहीं हुई। पुलिस चौकी पर गार्ड तक मौजूद नहीं था। शहर के सबसे ज्यादा व्यापारिक प्रतिष्ठान इसी इलाके में हैं। इसके बाद भी पुलिसकर्मियों की इस तरह की लापरवाही हैरान करने वाली थी
अमर उजाला टीम रात करीब 11.30 पर इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर स्थित चिलबिला पुलिस चौकी पहुंची तो यहां बाहर अलाव जल रहा था। कुछ देर पहले बिहारगंज से होकर लौटा सिपाही ठंड दूर करने के लिए अलाव के आगे बैठा मिला। यहां से टीम कुछ आगे बढ़ी तो चिलबिला चौराहे पर पिकेट की ड्यूटी होमगार्ड के जवानों के हवाले नजर आई। पुलिसकर्मी कहीं नहीं दिखे। महत्वपूर्ण स्थानों पर इस तर की लापरवाही से साफ था कि शहर की सुरक्षा को लेकर पुलिस कितनी गंभीर है।