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एनआरएमयू के मंत्री को मिली जान से मारने की धमकी
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 08 Aug 2015 12:51 AM IST
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प्रतापगढ़। नार्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के शाखा मंत्री को रेलवे ठेकेदार ने मोबाइल फोन पर जान से मारने की धमकी दी है। शुक्रवार को यूनियन के साथियों के साथ जीआरपी थाने पहुंचे मंत्री राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि सहायक मंडल इंजीनियर(एडीईएन) अर्जुन सिंह और एसएसई डब्ल्यू मुरमुर की शह पर ठेकेदार ने धमकाया है। दोनों के द्वारा कराए जा रहे गलत कार्यों का विरोध करने की वजह से धमकी मिली है। फिलहाल, पुलिस ने तहरीर लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव एडीईएन कार्यालय में कार्यालय अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। साथ में नार्दर्न रेलवे मेंस यूनियन प्रतापगढ़ शाखा के मंत्री भी हैं। इनका आरोप है कि 6 अगस्त को इनके सीयूजी फोन पर एक ठेेकेदार का फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि एडीईएन और एसएसई डब्ल्यू के कार्य का हिसाब लोगे, हिसाब लेना है तो मुझसे लो, मैं तुम्हें जान से मार डालूंगा। प्रतापगढ़ में रहने नहीं दूंगा। मंत्री ने इस घटना की जानकारी यूनियन के मंडल मंत्री के साथ यूनियन के पदाधिकारियों को दी।
धमकी से हड़कंप मच गया। राजेंद्र श्रीवास्तव शुक्रवार को पीडब्ल्यूआई अजय आनंद, संजय डोगरा, ओपी राव और हरिकिशोर को साथ लेकर जीआरपी पहुंचे और पुलिस को घटना से अवगत कराया। उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करने और सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस बारे में उपनिरीक्षक राहुल द्विवेदी का कहना है तहरीर मिली है। जांच करने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में एडीईएन अर्जुन सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी उनको नहीं हैं। राजेंद्र श्रीवास्तव दिन भर कार्यालय में ही रहा। उसने भी मुझसे कुछ नहीं बताया। धमकी जैसी बात मेरी समझ में नहीं आ रही है।
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शाखा मंत्री आरके श्रीवास्तव का कहना है कि 4 अगस्त को एडीईएन के साथ रेल आवास, पानी, आवासों पर बाहरी द्वारा कब्जा इत्यादि समस्याओं पर अनौपचारिक मीटिंग थी। जिसमें ठेकेदार द्वारा आधा अधूरा कार्य व गुणवत्ता पर एडीईएन से बहस हुई। उसी दिन 14 सूत्रीय एजेंडा पेश किया गया था। जिसमें पूर्व में किए गए जोनल व स्पेशल कार्य का ब्यौरा मांगा गया। यह बात अर्जुन सिंह और मुरमुर को नागवार लगी थी। जिसकी वजह से ठेकेदार ने उनको धमकी दी है।
मंत्री राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भले ही धमकी मिलने का दावा कर रहे हैं। मगर तहरीर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन, यूनियन के जिस पैड पर तहरीर दी गई है उसमें वादी का नाम ही नहीं हैं। किसको धमकी दी गई उसका भी नाम नहीं हैं। तहरीर किसको दी जा रही उस पुलिस अधिकारी का भी नाम नहीं हैं। यानि पूरा मामला रहस्य के घेरे में हैं।
चर्चा है कि मेंस के शाखा मंत्री आरके श्रीवास्तव एडीईएन और एसएसई से अपनी सेटिंग करना चाहते थे जो हो नहीं पाई। इसी की वजह से विवाद बढ़ा। कर्मचारियों का आरोप है कि आरके श्रीवास्तव जब से मंत्री बने हैं किसी भी समस्या का निदान नहीं हो सका है। वे समस्या को अधिकारियों तक नहीं पहुंचा पाते हैं। हालांकि आरके श्रीवास्तव ने इससे इंकार किया है। उनका कहना है कि एडीईएन और एसएसई ठेकेदार के साथ मिलकर रेलवे को लूट रहे हैं। कोई बोल नहीं रहा है। जब विरोध किया तो ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
जीआरपी उपनिरीक्षक राहुल द्विवेदी ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया है। मामले का हल बातचीत से निकालने की कोशिश की जाएगी। अगर बात नहीं बनी तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।
यूनियन के मंत्री आरके श्रीवास्तव के ऊपर पहले हमला हो चुका है। रेलवे कॉलोनी स्थित आवास में घुसकर कुछ लोगों ने उनको जमकर मारा-पीटा था। हंगामा होता देख कॉलोनी के लोग पहुंचे थे। मगर उस समय हमलावर भाग चुके थे। खास बात यह है कि खुद आरके श्रीवास्तव इस घटना को पचा ले गए। उन पर हमला क्यों हुआ, हमला करने वाले कौन लोग थे, इसका आज तक पता नहीं चल पाया है। शुक्रवार को जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो बोले कि हमला हुआ था।
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राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव एडीईएन कार्यालय में कार्यालय अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। साथ में नार्दर्न रेलवे मेंस यूनियन प्रतापगढ़ शाखा के मंत्री भी हैं। इनका आरोप है कि 6 अगस्त को इनके सीयूजी फोन पर एक ठेेकेदार का फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि एडीईएन और एसएसई डब्ल्यू के कार्य का हिसाब लोगे, हिसाब लेना है तो मुझसे लो, मैं तुम्हें जान से मार डालूंगा। प्रतापगढ़ में रहने नहीं दूंगा। मंत्री ने इस घटना की जानकारी यूनियन के मंडल मंत्री के साथ यूनियन के पदाधिकारियों को दी।
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धमकी से हड़कंप मच गया। राजेंद्र श्रीवास्तव शुक्रवार को पीडब्ल्यूआई अजय आनंद, संजय डोगरा, ओपी राव और हरिकिशोर को साथ लेकर जीआरपी पहुंचे और पुलिस को घटना से अवगत कराया। उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करने और सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस बारे में उपनिरीक्षक राहुल द्विवेदी का कहना है तहरीर मिली है। जांच करने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में एडीईएन अर्जुन सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी उनको नहीं हैं। राजेंद्र श्रीवास्तव दिन भर कार्यालय में ही रहा। उसने भी मुझसे कुछ नहीं बताया। धमकी जैसी बात मेरी समझ में नहीं आ रही है।
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शाखा मंत्री आरके श्रीवास्तव का कहना है कि 4 अगस्त को एडीईएन के साथ रेल आवास, पानी, आवासों पर बाहरी द्वारा कब्जा इत्यादि समस्याओं पर अनौपचारिक मीटिंग थी। जिसमें ठेकेदार द्वारा आधा अधूरा कार्य व गुणवत्ता पर एडीईएन से बहस हुई। उसी दिन 14 सूत्रीय एजेंडा पेश किया गया था। जिसमें पूर्व में किए गए जोनल व स्पेशल कार्य का ब्यौरा मांगा गया। यह बात अर्जुन सिंह और मुरमुर को नागवार लगी थी। जिसकी वजह से ठेकेदार ने उनको धमकी दी है।
मंत्री राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भले ही धमकी मिलने का दावा कर रहे हैं। मगर तहरीर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन, यूनियन के जिस पैड पर तहरीर दी गई है उसमें वादी का नाम ही नहीं हैं। किसको धमकी दी गई उसका भी नाम नहीं हैं। तहरीर किसको दी जा रही उस पुलिस अधिकारी का भी नाम नहीं हैं। यानि पूरा मामला रहस्य के घेरे में हैं।
चर्चा है कि मेंस के शाखा मंत्री आरके श्रीवास्तव एडीईएन और एसएसई से अपनी सेटिंग करना चाहते थे जो हो नहीं पाई। इसी की वजह से विवाद बढ़ा। कर्मचारियों का आरोप है कि आरके श्रीवास्तव जब से मंत्री बने हैं किसी भी समस्या का निदान नहीं हो सका है। वे समस्या को अधिकारियों तक नहीं पहुंचा पाते हैं। हालांकि आरके श्रीवास्तव ने इससे इंकार किया है। उनका कहना है कि एडीईएन और एसएसई ठेकेदार के साथ मिलकर रेलवे को लूट रहे हैं। कोई बोल नहीं रहा है। जब विरोध किया तो ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
जीआरपी उपनिरीक्षक राहुल द्विवेदी ने बताया कि दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया है। मामले का हल बातचीत से निकालने की कोशिश की जाएगी। अगर बात नहीं बनी तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।
यूनियन के मंत्री आरके श्रीवास्तव के ऊपर पहले हमला हो चुका है। रेलवे कॉलोनी स्थित आवास में घुसकर कुछ लोगों ने उनको जमकर मारा-पीटा था। हंगामा होता देख कॉलोनी के लोग पहुंचे थे। मगर उस समय हमलावर भाग चुके थे। खास बात यह है कि खुद आरके श्रीवास्तव इस घटना को पचा ले गए। उन पर हमला क्यों हुआ, हमला करने वाले कौन लोग थे, इसका आज तक पता नहीं चल पाया है। शुक्रवार को जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो बोले कि हमला हुआ था।