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यहां तो शहर के बीचो-बीच बिकेगा पटाखा

Thu, 12 Oct 2017 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Thu, 12 Oct 2017 11:31 PM IST
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here crackers will be sell  in the miidle of city
पटाखे - फोटो : self
शहर में हर साल शहर के बीचोबीच ही पटाखे की बिक्री होती है। हवाईदार कंपनीबाग, रामलीला मैदान और चिलबिला में ही पटाखें की दुकानें सजाते हैं। छोटी दुकानें तो हर चौराहे पर सज जाती हैं। पिछली बार पटाखा दुकानों के लाइसेंस को लेकर आखिरी समय तक प्रशासन की रस्साकस्सी चलती रही। अंत में प्रशासन को पटाखा बिक्री का लाइसेंस देना पड़ा था। संभावना है कि इस बार भी शहर के बीचोबीच ही पटाखा बिकेगा। पटाखे की दुकान लगाने के लिए आतिशबाज अफसरों के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
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शासन ने भले ही हादसों को रोकने के लिए आबादी के बीच पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई हो, लेकिन जिले में इस आदेश का कोई असर नहीं दिखता। घनी आबादी के बीच पटाखों का निर्माण धड़ल्ले से चल रहा है। इलाकाई पुलिस व राजस्व विभाग की टीम सबकुछ जानते हुए भी अनजान बनी है। आतिशबाजों ने पटाखों की बिक्री का लाइसेंस लेने के लिए अधिकारियों के कार्यालय में आवेदन करना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी अनुमति नहीं दी जा रही है। वैसे संभावना है कि शहर के रामलीला मैदान, कंपनी गार्डेन व चिलबिला में पटाखे की दुकान फिर लगेगी। बता दें कि ये इलाके शहर की आबादी के बीचोबीच हैं।
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जिले में ब्रांडेड पटाखों के बजाए ज्यादातर पटाखा कारोबारी ज्यादा मुनाफे के चक्कर में लोकल पटाखे ही बेचते हैं। इन पटाखों को तैयार करने वाले पूरी तरह से अप्रशिक्षित हैं। वे पटाखों में बारूद और अन्य चीजों का इस्तेमाल अपनी मर्जी के हिसाब से करते हैं। इंसान के लिए घातक 70 डेसीबल से अधिक आवाज के पटाखे भी बाजार में बेचे जाते हैं। पटाखे खरीदते समय ज्यादातर लोग यह नहीं देखते कि वह ब्रांडेड है या लोकल। निरीक्षण न होने के कारण गोदामों में मनमानी तरीके से पटाखे बनाए जाते हैं। कोई भी पटाखा मानक के अनुरूप नहीं बनता। किसी में बारूद की मात्रा अधिक होती है तो किसी में बारूद कम होता है। सभी पटाखों के विस्फोट की गारंटी भी नहीं होती। इसके बावजूद लोगों की पसंद लोकल पटाखा ही रहता है। लोकल पटाखों को बनाने के बाद उसे ब्रांडेड पटाखों से मिलता जुलता नाम से आतिशबाज पैक करते हैं ताकि उसकी आसानी से बिक्री हो सके।जिले की पांचों तहसीलों में पटाखा बनाने का कारोबार होता है। इसके लिए आतिशबाजों को लाइसेंस बनवाना होता है, लेकिन हजारों अप्रशिक्षित लोग भी बिना लाइसेंस के दिवाली के पर्व के पहले ही काम शुरू कर देते हैं। नगर कोतवाली के कटरामेदनीगंज, बेगमवार्ड, जेठवारा के कटरागुलाबसिंह, फतनपुर के सुवंसा, पट्टी कस्बा, देवसरा, कोहंड़ौर, लालगंज व कुंडा तहसील क्षेत्र में आतिशबाज छोटे व बड़े पटाखे तैयार करने में लगे हैं।
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