{"_id":"580a55944f1c1b9f1b705819","slug":"dangerous-of-local-cra","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुशियां छीन न लें लोकल पटाखे","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
खुशियां छीन न लें लोकल पटाखे
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Fri, 21 Oct 2016 11:37 PM IST
विज्ञापन
पटाखे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
दीपावली पर खुशी का इजहार करने के लिए पटाखे लेते समय थोड़ा सावधान हो जाइए। कहीं ऐसा न हो कि आप पटाखों से जख्मी होकर अस्पताल पहुंच जाएं। दरअसल, बेल्हा में दीपावली पर बेचने के लिए करोड़ों रुपये के लोकल पटाखे तैयार किए गए हैं। शहर के साथ ही कटरामेदनीगंज और आसपास के इलाकों में इन्हें बनाया गया है। हवाईदारों के साथ हजारों लोगों ने बिना लाइसेंस के पटाखों को तैयार किया है। ऐसे लोगों ने पटाखा बनाने का प्रशिक्षण भी नहीं लिया है। तेज आवाज वाले पटाखों में मनमाने ढंग से बारूद का इस्तेमाल किया गया है। ब्रांडेड पटाखों के मुकाबले कीमत कम होने और मुनाफा अधिक कमाने के चक्कर में कारोबारियों ने भी ऐसे पटाखों को खपाने की पूरी तैयारी कर रखी है।
दीपावली पर बेल्हा में ब्रांडेड पटाखों के बजाए ज्यादातर पटाखा कारोबारी ज्यादा मुनाफे के चक्कर में लोकल पटाखे ही बेचते हैं। इन पटाखों को तैयार करने वाले पूरी तरह से अप्रशिक्षित हैं। वे पटाखों में बारूद और अन्य चीजों का इस्तेमाल अपनी मर्जी के हिसाब से करते हैं। इंसान के लिए घातक 70 डेसीबल से अधिक आवाज के पटाखे भी बनाकर बाजार में बेचते हैं। उधर पटाखे खरीदते समय ज्यादातर लोग यह नहीं देखते कि वह ब्रांडेड है या लोकल। ऐसे में खतरा बना रहता है। जिले की पांचों तहसीलों में पटाखा बनाने का कारोबार होता है। इसके लिए आतिशबाजों को लाइसेंस बनवाना होता है, लेकिन हजारों अप्रशिक्षित लोग भी बिना लाइसेंस के दिवाली के पर्व के पहले ही काम शुरू कर देते हैं। नगर कोतवाली के कटरामेदनीगंज, बेगमवार्ड, जेठवारा के कटरागुलाबसिंह, फतनपुर के सुवंसा, पट्टी कस्बा, देवसरा, कोहंड़ौर, लालगंज व कुंडा तहसील क्षेत्र में आतिशबाज छोटे व बड़े पटाखे तैयार करने में लगे हैं।
ब्रांडेड पटाखों की अपेक्षा लोकल पटाखे सस्ता व तेज आवाज वाला होने के कारण अधिक बिकते हैं। खास बात यह है कि जिम्मेदारों के निरीक्षण न होने के कारण कई आतिशबाजों के गोदामों में मनमानी तरीके से पटाखे बनाए जाते हैं। यहां कोई भी पटाखा मानक के अनुरूप नहीं बनता। किसी में बारूद की मात्रा अधिक होती है तो किसी में बारूद कम होता है। सभी पटाखों के विस्फोट की गारंटी भी नहीं होती। जानकार बताते हैं कि ऐसे ही पटाखे कई बार घातक भी हो जाते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि पटाखे या तो बहुत देर या बहुत जल्द फट जाते हैं।
विज्ञापन
इसके साथ ही लोकल पटाखों को बनाने के बाद उसे ब्रांडेड पटाखों से मिलता जुलता नाम से आतिशबाज पैक करते हैं ताकि उसकी आसानी से बिक्री हो सके।
सिर्फ 170 लाइसेंसी लेकिन हजारों कर रहे निर्माण
अग्निशमन विभाग की मानें तो जनपद में कुल 170 लाइसेंसी हैं। जो पर्व या शादी ब्याह में पटाखा बनाने का कारोबार करते हैं। हकीकत यह है कि लाइसेंसी की आड़ में पूरा परिवार पटाखा बनाता है। अब तो वे आसपास के लोगों को भी पटाखा बनाने के लिए बुलाते हैं। जो पटाखा बनाने में दक्ष नहीं होते। कटरागुलाबसिंह में हुए हादसे में कई लोगों की जान चली गई थी। छानबीन के बाद यह बात सामने आई थी। आतिशबाज मोहम्मद मूसा की मानें तो शहर के चौक घंटाघर पर तुलसीराम की दुकान पर बारूद व उसका केमिकल मिलता है। लाइसेंस दिखाने पर उसे सीजन में 15 किलो बारूद व केमिकल मिलता है।
दीपावली पर बेल्हा में ब्रांडेड पटाखों के बजाए ज्यादातर पटाखा कारोबारी ज्यादा मुनाफे के चक्कर में लोकल पटाखे ही बेचते हैं। इन पटाखों को तैयार करने वाले पूरी तरह से अप्रशिक्षित हैं। वे पटाखों में बारूद और अन्य चीजों का इस्तेमाल अपनी मर्जी के हिसाब से करते हैं। इंसान के लिए घातक 70 डेसीबल से अधिक आवाज के पटाखे भी बनाकर बाजार में बेचते हैं। उधर पटाखे खरीदते समय ज्यादातर लोग यह नहीं देखते कि वह ब्रांडेड है या लोकल। ऐसे में खतरा बना रहता है। जिले की पांचों तहसीलों में पटाखा बनाने का कारोबार होता है। इसके लिए आतिशबाजों को लाइसेंस बनवाना होता है, लेकिन हजारों अप्रशिक्षित लोग भी बिना लाइसेंस के दिवाली के पर्व के पहले ही काम शुरू कर देते हैं। नगर कोतवाली के कटरामेदनीगंज, बेगमवार्ड, जेठवारा के कटरागुलाबसिंह, फतनपुर के सुवंसा, पट्टी कस्बा, देवसरा, कोहंड़ौर, लालगंज व कुंडा तहसील क्षेत्र में आतिशबाज छोटे व बड़े पटाखे तैयार करने में लगे हैं।
विज्ञापन
ब्रांडेड पटाखों की अपेक्षा लोकल पटाखे सस्ता व तेज आवाज वाला होने के कारण अधिक बिकते हैं। खास बात यह है कि जिम्मेदारों के निरीक्षण न होने के कारण कई आतिशबाजों के गोदामों में मनमानी तरीके से पटाखे बनाए जाते हैं। यहां कोई भी पटाखा मानक के अनुरूप नहीं बनता। किसी में बारूद की मात्रा अधिक होती है तो किसी में बारूद कम होता है। सभी पटाखों के विस्फोट की गारंटी भी नहीं होती। जानकार बताते हैं कि ऐसे ही पटाखे कई बार घातक भी हो जाते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि पटाखे या तो बहुत देर या बहुत जल्द फट जाते हैं।
विज्ञापन
इसके साथ ही लोकल पटाखों को बनाने के बाद उसे ब्रांडेड पटाखों से मिलता जुलता नाम से आतिशबाज पैक करते हैं ताकि उसकी आसानी से बिक्री हो सके।
सिर्फ 170 लाइसेंसी लेकिन हजारों कर रहे निर्माण
अग्निशमन विभाग की मानें तो जनपद में कुल 170 लाइसेंसी हैं। जो पर्व या शादी ब्याह में पटाखा बनाने का कारोबार करते हैं। हकीकत यह है कि लाइसेंसी की आड़ में पूरा परिवार पटाखा बनाता है। अब तो वे आसपास के लोगों को भी पटाखा बनाने के लिए बुलाते हैं। जो पटाखा बनाने में दक्ष नहीं होते। कटरागुलाबसिंह में हुए हादसे में कई लोगों की जान चली गई थी। छानबीन के बाद यह बात सामने आई थी। आतिशबाज मोहम्मद मूसा की मानें तो शहर के चौक घंटाघर पर तुलसीराम की दुकान पर बारूद व उसका केमिकल मिलता है। लाइसेंस दिखाने पर उसे सीजन में 15 किलो बारूद व केमिकल मिलता है।