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शास्त्रीय संगीत से बदली बेल्हा की पहचानः शिवानी
प्रतापगढ़
Updated Sun, 23 Oct 2016 11:44 PM IST
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pratapgarh
अपराध के गढ़ के रूप में चर्चित प्रतापगढ़ को शिवानी मातनहेलिया ने अपने गायन और संगीत से देश में अलग पहचान दिलाई। रविवार को यूपी का सबसे बड़ा यश भारती पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने इसे तीन दिन पहले दिवंगत हुए अपने पिता और जिले के लोगों को समर्पित किया। शिवानी ने कहा कि यह पुरस्कार मेरा नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ का गौरव है।
शास्त्रीय संगीत का नाम आने पर अनायास ही बनारस घराने की याद आ जाती है, लेकिन शिवानी ने अपनी मेधा के दम पर इस मिथक को तोड़ा। शहर के मुनीश्वरदत्त पीजी कालेज में संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष शिवानी ने न सिर्फ गायन के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल कीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। वह म्यूजिक में पीएचडी करने वाली जिले की पहली शख्स थीं। जिले के साथ उन्होंने प्रदेश में कई जगहों पर राष्ट्रीय स्तर के शास्त्रीय संगीत समारोह आयोजित किए।
जनवरी 2016 में उन्हें केंद्र के सांस्कृतिक मंत्रालय की सीनियर फेलोशिप मिली थी। संगीत और कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने के लिए उन्हें 2003 में सांस्कृतिक मंत्रालय से ही जूनियर फेलोशिप भी मिली थी। देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में वह अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। गंगा महोत्सव, आगरा महोत्सव, लखनऊ महोत्सव और उज्जैन महाकुंभ में भी उनकी संगीत प्रस्तुति को लेकर पुरस्कृत किया जा चुका है। शिवानी शास्त्रीय संगीत के अलावा सुगम संगीत, लोकगायन, कजरी, ठुमरी के साथ संगीत की उपशास्त्री विधा में भी पारंगत हैं। देश के साथ ही विदेश भी वह अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। उन्होंने प्रतापगढ़ के ही रहने वाले स्व. राघवमणि पांडेय से संगीत की शिक्षा-दीक्षा ली थी। शास्त्रीय संगीत से संबंधित उनके कई शोध पत्र और आलेख भी कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। शिवानी के पिता और शहर के बड़े कारोबारी जगदीश मातनहेलिया का अभी तीन दिन पहले ही निधन हो गया था। शिवानी ने यह पुरस्कार दिवंगत पिता के साथ जिले की जनता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ में रहकर भी बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।
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शास्त्रीय संगीत का नाम आने पर अनायास ही बनारस घराने की याद आ जाती है, लेकिन शिवानी ने अपनी मेधा के दम पर इस मिथक को तोड़ा। शहर के मुनीश्वरदत्त पीजी कालेज में संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष शिवानी ने न सिर्फ गायन के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल कीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। वह म्यूजिक में पीएचडी करने वाली जिले की पहली शख्स थीं। जिले के साथ उन्होंने प्रदेश में कई जगहों पर राष्ट्रीय स्तर के शास्त्रीय संगीत समारोह आयोजित किए।
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जनवरी 2016 में उन्हें केंद्र के सांस्कृतिक मंत्रालय की सीनियर फेलोशिप मिली थी। संगीत और कला के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने के लिए उन्हें 2003 में सांस्कृतिक मंत्रालय से ही जूनियर फेलोशिप भी मिली थी। देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में वह अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। गंगा महोत्सव, आगरा महोत्सव, लखनऊ महोत्सव और उज्जैन महाकुंभ में भी उनकी संगीत प्रस्तुति को लेकर पुरस्कृत किया जा चुका है। शिवानी शास्त्रीय संगीत के अलावा सुगम संगीत, लोकगायन, कजरी, ठुमरी के साथ संगीत की उपशास्त्री विधा में भी पारंगत हैं। देश के साथ ही विदेश भी वह अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। उन्होंने प्रतापगढ़ के ही रहने वाले स्व. राघवमणि पांडेय से संगीत की शिक्षा-दीक्षा ली थी। शास्त्रीय संगीत से संबंधित उनके कई शोध पत्र और आलेख भी कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। शिवानी के पिता और शहर के बड़े कारोबारी जगदीश मातनहेलिया का अभी तीन दिन पहले ही निधन हो गया था। शिवानी ने यह पुरस्कार दिवंगत पिता के साथ जिले की जनता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ में रहकर भी बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।
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