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10.17 लाख लोगों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड का इंतजार
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जनपद में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जाने की रफ्तार काफी धीमी है। साढ़े तीन साल में केवल सवा तीन लाख लाभार्थियों का ही गोल्डेन कार्ड ही बनाया जा सका है। अभी भी 10.17 लाख लोगों को आयुष्मान गोल्डेन कार्ड का बेसब्री से इंतजार है।
केंद्र सरकार ने सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य गरीब परिवार के लोगों का पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज कराना था। 2011 की जनगणना के आधार पर जिले में 13.42 लाख लोगों को इस योजना के लिए पात्र माना गया। इसमें वर्ष 2019 तक पंजीकृत श्रमिक व अंत्योदय कार्डधारकों को भी शामिल कर लिया गया। कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक चला मगर, बाद में जिम्मेदार अधिकारी उदासीन रवैया अपनाने लगे।
तमाम प्रयासों के बाद भी अब तक केवल 3.25 लाख लोगों के ही गोल्डेन कार्ड बनाए जा सके हैं। अभी भी 10.17 लाख लोगों को गोल्डेन कार्ड का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि आयुष्मान गोल्डेन कार्ड बीआईएस वेबसाइट पर बनाया जाता है। यह काफी दिनों से बहुत धीरे काम कर रही है। एक लाभार्थी को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रह है। पत्राचार के बाद भी वेबसाइट में सुधार नहीं किया जा रहा है।
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कोटेदार व सहज जन सेवा केंद्र संचालक नहीं कर रहे सहयोग
पात्रों का आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने के लिए कोटेदारों व सहज जन सेवा केंद्र संचालकों को निर्देश दिया गया है। अधिकारियों के निर्देश के बाद भी न तो अंत्योदय कार्डधारकों का गोल्डेन कार्ड बनाने के लिए कोटेदार सहयोग कर रहे हैं और न ही सहज जन सेवा केंद्र संचालक। जबकि जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल लगातार ऐसी संस्थाओं के खिलाफ पत्राचार कर रहे हैं। आयुष्मान के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों में आरोग्य मित्र नियुक्त करने की व्यवस्था है मगर, प्राइवेट तो दूर सरकारी अस्पतालों में ही आयुष्मान मित्र के पद खाली हैं।
42 अस्पतालों में है मुफ्त उपचार की व्यवस्था
आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों के इलाज के लिए जिले में 42 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। जिसमें 29 अस्पताल सरकारी हैं। इसके अलावा 13 प्राइवेट अस्पतालों को भी शामिल किया गया है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र के प्राइवेट अस्पतालों को इस योजना में शामिल किया गया है।
शासन के निर्देश पर 4 से 18 मई तक आयुष्मान पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के पात्रों को चिह्नित कर उनका गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डॉ. सुधाकर सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान भारत
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केंद्र सरकार ने सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य गरीब परिवार के लोगों का पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज कराना था। 2011 की जनगणना के आधार पर जिले में 13.42 लाख लोगों को इस योजना के लिए पात्र माना गया। इसमें वर्ष 2019 तक पंजीकृत श्रमिक व अंत्योदय कार्डधारकों को भी शामिल कर लिया गया। कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक चला मगर, बाद में जिम्मेदार अधिकारी उदासीन रवैया अपनाने लगे।
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तमाम प्रयासों के बाद भी अब तक केवल 3.25 लाख लोगों के ही गोल्डेन कार्ड बनाए जा सके हैं। अभी भी 10.17 लाख लोगों को गोल्डेन कार्ड का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि आयुष्मान गोल्डेन कार्ड बीआईएस वेबसाइट पर बनाया जाता है। यह काफी दिनों से बहुत धीरे काम कर रही है। एक लाभार्थी को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रह है। पत्राचार के बाद भी वेबसाइट में सुधार नहीं किया जा रहा है।
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कोटेदार व सहज जन सेवा केंद्र संचालक नहीं कर रहे सहयोग
पात्रों का आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने के लिए कोटेदारों व सहज जन सेवा केंद्र संचालकों को निर्देश दिया गया है। अधिकारियों के निर्देश के बाद भी न तो अंत्योदय कार्डधारकों का गोल्डेन कार्ड बनाने के लिए कोटेदार सहयोग कर रहे हैं और न ही सहज जन सेवा केंद्र संचालक। जबकि जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल लगातार ऐसी संस्थाओं के खिलाफ पत्राचार कर रहे हैं। आयुष्मान के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों में आरोग्य मित्र नियुक्त करने की व्यवस्था है मगर, प्राइवेट तो दूर सरकारी अस्पतालों में ही आयुष्मान मित्र के पद खाली हैं।
42 अस्पतालों में है मुफ्त उपचार की व्यवस्था
आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों के इलाज के लिए जिले में 42 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है। जिसमें 29 अस्पताल सरकारी हैं। इसके अलावा 13 प्राइवेट अस्पतालों को भी शामिल किया गया है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र के प्राइवेट अस्पतालों को इस योजना में शामिल किया गया है।
शासन के निर्देश पर 4 से 18 मई तक आयुष्मान पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के पात्रों को चिह्नित कर उनका गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डॉ. सुधाकर सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान भारत