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तरक्की का आसमान चूमने के इरादे- गांव की महिलाओं के हाथ से बने सेनेटरी पैड की मार्केटिंग अमेजन पर होगी

Thu, 14 Apr 2022 11:13 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 14 Apr 2022 11:13 PM IST
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Village women will sell products on Amazon
गौरी मलिक - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। आत्मनिर्भरता की डगर पर गांव की महिलाओं ने धीरे-धीरे पग भरने शुरू कर दिए हैं। इरादे ऊंची उड़ान के हैं। मरौरी ब्लाक की न्यूरिया कॉलोनी में गांव की महिलाएं हाथ से सेनेटरी पैड तैयार करती हैं। लोकल मार्केट में बिकने वाला यह उत्पाद अब ऑन लाइन मार्केटिंग कंपनी अमेजन पर भी उपलब्ध होगा। इससे उनके उत्पाद को देश-विदेश के बाजार में पहचान मिलेगी।
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महिलाओं ने जीएसटी नंबर ले लिया है। अब सिर्फ जीटीआईएन कोड का इंतजार है। कोड आने पर अमेजन की प्रोडक्ट लिस्ट में सेनेटरी पैड नजर आएगा और जब आप सेनेटरी पैड लिखकर सर्च करेंगे तो ‘नई पहचान सुपर सॉफ्ट सेनेटरी पैड’ भी दिख जाएगा। ऑर्डर करेंगे तो अमेजन का डिलीवरी मैन 27 रुपये में सात सेनेटरी पैड का पैकेट आपके घर पहुंचाएगा। अभी तक इन महिलाओं के उत्पाद आसपास के गांवों और पीलीभीत शहर में ही बिक रहे हैं।
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दस समूहों की 100 महिलाएं करती हैं काम
दस स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एकत्र करके उन्नति प्रेरणा ग्राम संगठन और पहचान प्रेरणा ग्राम संगठन बनाया गया। दोनों संगठनों में शामिल 100 महिलाएं सेनेटरी पैड बनाने का काम कर हैं। साढ़े आठ लाख रुपये खर्च करके आठ महीने पहले सेनेटरी पैड बनाने की मशीन लगाई गई थी। पैड बनाने के लिए गांव की महिलाओं ने ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया। गौरी मलिक, पिंकी विश्वास, सरस्वती, अनीता ने पहले खुद पैड बनाना सीखा। इन्होंने समूह की अन्य महिलाओं को सिखाया। अब काम बंट गए हैं। कोई पैड बनाता है तो कोई पैकिंग और मार्केटिंग का काम संभालता है। इस काम को उत्तर प्रदेश रोजगार आजीविका मिशन की ब्लॉक मिशन प्रबंधक वर्षा गंगवार की मदद मिल रही है।
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अधिकतर महिलाएं पांचवीं और आठवीं तक हैं पढ़ी लिखी
समूह में एक दो महिलाएं ग्रेजुएट हैं पर अधिकतर महिलाएं पांचवीं से आठवीं तक पढ़ी हैं। ब्लॉक मिशन मैनेजर वर्षा गंगवार ने बताया कि जब ग्रामीण क्षेत्र जरूरत का सर्वे किया तो पता लगा था कि सेनेटरी पैड बनाने और बेचने में महिलाओं को सफलता मिल सकती है। इसके बाद समूहों की पूंजी से मशीन खरीदी गई और ऑनलाइन ट्रेनिंग की प्रक्रिया शुरू हुई। अब महिलाओं को उम्मीद का नया रास्ता मिल गया है।
ब्राडेंड के मुकाबले कम दाम पर हैं सेनेटरी पैड
महिलाओं की ओर से बनाए गए सेनेटरी पैड 27 रुपये प्रति पैकेट हैं। एक पैकेट में सात पैड होते हैं। अगर इतने ही पैड किसी बड़ी कंपनी के खरीदे जाएं तो 30-45 रुपये तक खर्च होंगे। गांव की महिलाओं और खासकर युवा छात्राओं को यह पैड कीमत में किफायती लगते हैं। गांव की अपनी महिलाएं ही इन्हें बेच रही हैं। विकास भवन में सरस शॉप खोली गई है। यहां से कोई भी यह पैकेट को खरीद सकता है।
न्यूरिया कॉलोनी बंगाली बहुल गांव है। गांव की अधिकतर महिलाएं पहले बीड़ी बनाने का काम करती थीं। जब से मशीन लगी है, तब से सेनेटरी पैड बनाने के काम में भी महिलाओं को रोजगार मिला है।
- सरस्वती, जय गिरधारी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष
महिलाओं को सबसे ज्यादा जरूरत सेहत ठीक बनाए रखने की होती है। सेनेटरी पैड सेहत से जुड़ा ऐसा ही प्रोडक्ट है। जिले का पहला समूह है जिसने अमेजन पर अपना प्रोडक्ट सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की है।

- गौरी मलिक, जय श्रीराम स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष
महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए विकास विभाग ने अमेजन और फ्लिपकार्ट पर प्रक्रिया पूरी कराई है। आने वाले दिनों में इसका फायदा मिलेगा। - प्रशांत श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी

सरस्वती

सरस्वती- फोटो : PILIBHIT

 

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