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Pilibhit News: गोआश्रय स्थल में तड़प कर मर गए पशु, नहीं लगी भनक
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पीलीभीत। खाईखेड़ा गोआश्रय स्थल में एक बार फिर बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां पर पांच पशु मृत पाए गए और तीन पशुओं की खालें पड़ी देखी गईं। जानकारी होने पर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और हंगामा शुरु कर दिया। सूचना पर पहुंचे अधिकारियों ने पशुओं के शव का परीक्षण कराया। लापरवाही मानते हुए सीडीओ ने सचिव को निलंबित कर दिया है।
मरौरी ब्लॉक के गांव खाईखेड़ा में हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को पशुओं के मरे होने की जानकारी मिली थी। जानकारी पर मंच के पदाधिकारी यशवंत सिंह अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंच गए। देखा तो गोआश्रय स्थल में पांच पशुओं के शव पड़े थे और दो मरणासन्न हालत में थीं। यही नहीं तीन पशुओं की खालें पड़ी हुईं मिलीं। इस पर कार्यकर्ताओं ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर मुख्य विकास अधिकारी, एडीएम और सीवीओ भी पहुंच गए। मृत पशुओं के शव को कब्जे में ले लिया गया। मामले को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
गोशालाओं का हाल बद से बदतर, जिम्मेदार हर बार बचते रहे
जिले में गोशालाओं का हाल बद से बदतर है। हाल यह है कि पशुओं को खाने के लिए ठीक से चारा तक नहीं मिल पा रहा है। उनका इलाज तक नहीं हो पा रहा है। इससे पहले माधोटांडा की परशुरामपुर के गोआश्रय स्थल में करीब एक दर्जन से ज्यादा गोवंश मर गए थे। तब भी जिम्मेदार अधिकारियों ने शासन को फर्जी रिपोर्ट भेजकर गुमराह कर दिया। नोडल अफसर फर्जी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजकर गुमराह करते रहे। पूर्व डीएम भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाते नजर आए। गोआश्रय स्थलों को देखने के लिए पिछले दिनों शासन से सचिव भी आए थे उन्हें भी सब कुछ ठीक ठाक दिखा दिया गया।
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प्रथम दृष्टया जांच में सचिव को दोषी पाते हुए निलंबित किया गया है। प्रधान को हटाते हुए समिति का गठन किया जाएगा। पूर्व में भी प्रधान पर भूसा चोरी को लेकर कार्रवाई की गई थी।- धर्मेंद्र प्रताप सिंह, सीडीओ
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मरौरी ब्लॉक के गांव खाईखेड़ा में हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को पशुओं के मरे होने की जानकारी मिली थी। जानकारी पर मंच के पदाधिकारी यशवंत सिंह अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंच गए। देखा तो गोआश्रय स्थल में पांच पशुओं के शव पड़े थे और दो मरणासन्न हालत में थीं। यही नहीं तीन पशुओं की खालें पड़ी हुईं मिलीं। इस पर कार्यकर्ताओं ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर मुख्य विकास अधिकारी, एडीएम और सीवीओ भी पहुंच गए। मृत पशुओं के शव को कब्जे में ले लिया गया। मामले को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
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गोशालाओं का हाल बद से बदतर, जिम्मेदार हर बार बचते रहे
जिले में गोशालाओं का हाल बद से बदतर है। हाल यह है कि पशुओं को खाने के लिए ठीक से चारा तक नहीं मिल पा रहा है। उनका इलाज तक नहीं हो पा रहा है। इससे पहले माधोटांडा की परशुरामपुर के गोआश्रय स्थल में करीब एक दर्जन से ज्यादा गोवंश मर गए थे। तब भी जिम्मेदार अधिकारियों ने शासन को फर्जी रिपोर्ट भेजकर गुमराह कर दिया। नोडल अफसर फर्जी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजकर गुमराह करते रहे। पूर्व डीएम भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाते नजर आए। गोआश्रय स्थलों को देखने के लिए पिछले दिनों शासन से सचिव भी आए थे उन्हें भी सब कुछ ठीक ठाक दिखा दिया गया।
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प्रथम दृष्टया जांच में सचिव को दोषी पाते हुए निलंबित किया गया है। प्रधान को हटाते हुए समिति का गठन किया जाएगा। पूर्व में भी प्रधान पर भूसा चोरी को लेकर कार्रवाई की गई थी।- धर्मेंद्र प्रताप सिंह, सीडीओ