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Pilibhit News: आयोग के आदेश पर भी नहीं मिला मुआवजा, पीड़ित ने फिर लगाई गुहार
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पीलीभीत। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान प्रसूता और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग द्वारा प्रतिकर राशि दिए जाने के आदेश के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। इसपर पीड़ित पक्ष की ओर से आयोग को दोबारा पत्र भेजा गया है।
सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम अलीगंज देशनगर निवासी देवेंद्र पुत्र छत्रपाल ने मानवाधिकार आयोग को भेजे पत्र में बताया कि उनकी पत्नी पूनम और गर्भस्थ शिशु की 15 मई 2024 को जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। घटना के बाद मामले की जांच जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, एक सीनियर रेजीडेंट, एक जूनियर रेजीडेंट और दो स्टाफ नर्सों को लापरवाही का दोषी माना गया था।
पत्र में बताया कि मामले की सुनवाई के बाद मानवाधिकार आयोग ने नौ जनवरी 2025 को आदेश पारित करते हुए मृतका के परिजनों को 2.50 लाख रुपये प्रतिकर राशि दिए जाने की संस्तुति की थी। आयोग ने शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए थे, लेकिन आदेश के कई माह बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक कोई धनराशि नहीं मिल सकी है। इस पर उन्होंने दोबारा आयोग को प्रार्थना पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। संवाद
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सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम अलीगंज देशनगर निवासी देवेंद्र पुत्र छत्रपाल ने मानवाधिकार आयोग को भेजे पत्र में बताया कि उनकी पत्नी पूनम और गर्भस्थ शिशु की 15 मई 2024 को जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। घटना के बाद मामले की जांच जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, एक सीनियर रेजीडेंट, एक जूनियर रेजीडेंट और दो स्टाफ नर्सों को लापरवाही का दोषी माना गया था।
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पत्र में बताया कि मामले की सुनवाई के बाद मानवाधिकार आयोग ने नौ जनवरी 2025 को आदेश पारित करते हुए मृतका के परिजनों को 2.50 लाख रुपये प्रतिकर राशि दिए जाने की संस्तुति की थी। आयोग ने शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए थे, लेकिन आदेश के कई माह बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक कोई धनराशि नहीं मिल सकी है। इस पर उन्होंने दोबारा आयोग को प्रार्थना पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। संवाद
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