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Pilibhit News: आदि गंगा गोमती की सिसकी...पुनर्जीवन की उम्मीद पर ठिठकी

Mon, 30 Mar 2026 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2026 12:53 AM IST
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The sobs of the ancient Ganga, Gomti... lingered on the hope of revival.
गोमती उद्गम स्थल की मुख्य झील के आगे विलुप्त होती जा रही गोमती नदी। संवाद
उद्गम स्थल से लखनऊ तक हर साल उठती मांग, करोड़ों खर्च के बाद भी नतीजा शून्य, अतिक्रमण और विभागीय उदासीनता बनी बड़ी बाधा
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पीलीभीत। मैं..आदि गंगा गोमती हूं। मुझे गिना तो सदानीरा नदियाें में जाता है, लेकिन अविरल धार और कल-कल की आवाज अब खुद मुझे ही मुश्किल से सुनाई देती है। मेरा यह हाल अपने ही घर में है..आदि गंगा गोमती की यह अव्यक्त पीड़ा उद्गम के जिले में नदी की हालत देखकर समझी जा सकती है। पानी की कमी, गंदगी, अतिक्रमण और कब्जे से कराहती नदी की सिसकी पुनर्जीवन की उम्मीद पर ठिठकी है। उद्गम स्थल माधोटांडा की फुलहर झील और गोमती नदी आज भी अपनी अविरल धारा के इंतजार में है। नदी का पुराना स्वरूप और वैभव लौटाने के प्रयास भी खूब हुए, लेकिन तस्वीर बदलनी अभी बाकी है।

सरकारें बदलीं, योजनाएं बनीं, गंगा यात्राएं निकाली गईं और करोड़ों रुपये खर्च हुए। इसके बावजूद नदी अपने मूल स्वरूप में नहीं लौट सकी है। अब एक बार फिर गोमती उद्गम स्थल से लखनऊ तक यात्रा निकालकर नदी का पुराना वैभव लौटाने, आमजन और जिम्मेदारों को जगाने की मुहिम छेड़ी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि मेहनत रंग लाएगी।
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माधोटांडा क्षेत्र में गोमती का उद्गम स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां योगी बाबा दुर्गा नाथ जी का प्राचीन मंदिर है। वर्षों से दशहरा व कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है। इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, मुगल काल और उससे पहले भी गोमती के दोनों किनारों पर आबादी के प्रमाण मिलते रहे हैं। खेती के दौरान किसानों को पुराने सिक्के और ऐतिहासिक वस्तुएं मिलना इस बात की पुष्टि करता है कि नदी कभी अपने पूरे विस्तार में बहती थी। समय के साथ नदी का स्वरूप लगातार सिकुड़ता गया। नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ और खेतों में तब्दील कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि गोमती की धारा कमजोर पड़ती चली गई और कई हिस्सों में तो लगभग विलुप्त हो गई। संवाद
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अविरल धारा के लिए हो चुके हैं प्रयास
- गोमती को पुनर्जीवित करने के लिए हरदोई ब्रांच नहर और माधोटांडा रजवाहा के जरिए उद्गम स्थल तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई गईं।
- करोड़ों रुपये खर्च किए गए। खुदाई और निर्माण कार्य कराए गए, लेकिन जमीन पर कोई स्थाई परिणाम नजर नहीं आया।
- जलपुरुष राजेंद्र, वाटर वूमेन के नाम से जानी जाने वाली सुप्रिया ने भी गोमती का वैभव लौटाने की मुहिम छेड़ी थी।
- तत्कालीन जिलाधिकारी अखिलेश मिश्रा व उनके बाद आए पुलकित खरे ने भी गोमती के उद्धार पर काम किया।
- प्रदेश व केंद्रीय टीम भी उद्गम स्थल का भ्रमण कर चुकी हैं। नदी के प्राकृतिक जल स्रोतों की स्थिति और सुधार पर जानकारी जुटाई है।

यह है जिले में नदी की स्थिति
गोमती नदी की लंबाई करीब 960 किमी है। रास्ते में कई छोटी नदियां भी इसमें मिलती हैं। पीलीभीत में नदी करीब 42 किलोमीटर के दायरे में बहती है। नदी का उद्गम तीन झीलों से माना जाता है। पीलीभीत के बाद नदी शाहजहांपुर, लखीमपुर, सीतापुर और फिर लखनऊ में प्रवेेश करती है। जिले में नदी की हालत यह है कि कई स्थानों पर पानी नजर नहीं आता है। कुछ स्थानों पर इसका स्वरूप नाले के जैसा हो गया है। नदी में घास और जलकुंभी नजर आती है। गंदगी और अतिक्रमण से हाल-बेहाल है।

इन प्रयासों से पुनर्जीवन की आस
- नदी में रजवहा नहर पानी पहुंचाने में की व्यवस्था की जाए। पूर्व के प्रस्ताव पर सक्रियता से अमल हो।
- नदी के प्राकृतिक जलस्रोतों की जांच और उनका संरक्षण भी जरूरी है।
- खारजा नहर से भी इसे रजवहा के जरिए जोड़ा जाए
- नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ ही सफाई पर ध्यान देना जरूरी है।
- नदी में गिरने वाले नाले, औद्योगिक अपशिष्ट पर पूरी तरह से रोकथाम हो।
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