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Pilibhit News: पीटीआर का अनुकूल वातावरण बाघों के लिए मुफीद

Mon, 29 Jul 2024 03:32 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2024 03:32 AM IST
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The favorable environment of PTR is suitable for tigers
वन कटी मार्ग पर बना टाईगर रिजर्व का गेट। फाइल फोटो
पीलीभीत। हरियाली के बीच फैला नहरों का जाल और उसमें विचरण करते बाघों की मौजूदगी से पीलीभीत टाइगर रिजर्व लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक प्रयास होने से बाघों की संख्या बढ़ रही है। बीते आठ सालों की बात करें तो बाघों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। इससे पीटीआर के पर्यटन को भी नई ऊंचाई मिली है।
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पीलीभीत के जंगलों को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला, लेकिन इससे पहले ब्रिटिशकाल में भी पीलीभीत के जंगल की अलग पहचान रही। टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां बाघों के संरक्षण के प्रयास शुरू किए गए। ग्रासलैंड बनाए गए। पानी के लिए जंगल में जगह-जगह जलाशय बनाए गए। इससे जंगल की सुंदरता भी बढ़ी। जिसका सकारात्मक असर पर्यटन पर पड़ा।
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बाघ देखने के शौकीन सैलानियों की आमद हर साल बढ़ती गई। इधर, वर्ष 2022 तक आठ साल में बाघों की संख्या 24 से बढ़कर 72 पहुंच गई। फिलहाल जंगल के बाहर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रोकने के लिए जाल फेंसिंग का कार्य कराया जा रहा है। बाघ मित्रों को भी सक्रिय किया गया है।
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संख्या के आगे कम पड़ने लगा जंगल
बाघों की संख्या बढ़ने से कई तरह की चुनौतियां भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक बाघ दिनभर में करीब 40 किलोमीटर चलता है। इसके अलावा चार किलोमीटर के दायरे में किसी दूसरे नर बाघ को डेरा नहीं जमाने देता। ऐसे में लगातार बढ़ रही संख्या के चलते जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि जंगल का दायरा बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाने चाहिए।




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बेहतर प्रबंधन और कार्यों के चलते टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ रही है। देश दुनिया में टाइगर रिजर्व की ख्याति बाघों और यहां की खूबसूरती को लेकर है।
- मनीष सिंह, डीएफओ टाइगर रिजर्व
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