UP: करोड़ों की ठगी करने वाले जालसाज रामशंकर की कहानी, मंत्रियों का पीए बनकर करता था फोन
बीसलपुर के मोहल्ला दुबे निवासी इंटरमीडिएट पास रामशंकर पिछले करीब दो दशकों से धोखाधड़ी और जालसाजी करता आ रहा है। वह मंत्रियों का पीए बनकर लोगों को कॉल कर जाल में फंसाता था। लखनऊ एसटीएफ ने उसे और उसके साथी को गिरफ्तार किया है।
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लखनऊ एसटीएफ ने जिस रामशंकर गुप्ता उर्फ आशीष गुप्ता को लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया है, वह पीलीभीत के बीसलपुर का रहने वाला है। धन्ना सेठ और लोकप्रिय बनने की तमन्ना ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। रामशंकर कभी पेशकार तो कभी मंत्रियों का पीए बनकर लोगों को हड़काता था।
मोहल्ला दुबे निवासी इंटरमीडिएट पास 45 वर्षीय रामशंकर पिछले करीब दो दशकों से धोखाधड़ी और जालसाजी करता आ रहा है। उसने काफी समय पहले मोहल्ला दुबे में स्थित एक मढ़ी के नाम से फर्जी रसीद बुक छपवाकर लोगों से काफी चंदा वसूला था। मामले की जानकारी मढ़ी के महंत पर पहुंची तो उसने महंत से माफी मांग कर मामला निपटा लिया। कई साल पहले तक वह रोजाना बाइक से शाहजहांपुर आता-जाता था।
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तब लोगों को बताया कि शाहजहांपुर में एक अधिकारी का पेशकार है। उसकी बाइक पर काफी दिनों तक कलक्ट्रेट लिखा रहा। कुछ दिन तक जिलाधिकारी कार्यालय शाहजहांपुर लिखा रहा। बीसलपुर में लोग उसे रामशंकर कम आशीष गुप्ता नाम से ज्यादा जानते हैं। कुछ दिनों से वह अपने नाम के आगे डॉक्टर भी लगाने लगा था। पूछने पर कहता था कि उसने पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली है।
फाइनेंस कंपनी खोल हड़पे रुपये
रामशंकर नगर के स्टेशन रोड पर काफी दिनों तक फाइनेंस कंपनी चलाकर लोगों के रुपये भी हड़प चुका है। इसके अलावा उसने नगर के वृद्धाश्रम का शिलान्यास कराने के नाम पर कई बार कई वीआईपी को बीसलपुर बुलवाया। इससे उसका रुतबा क्षेत्र में बढ़ता गया। समय-समय पर अपने घर पर धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धर्मगुरुओं को भी बुलाता था, जिससे लोग समझते थे कि उसकी साधु-संतों में भी अच्छी पकड़ है।
बहराइच के एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी का उसके घर काफी आना-जाना था। बताते हैं कि रामशंकर पूर्वांचल की भाषा बोलने में माहिर था। अक्सर वह लोगों के काम कराने के लिए विभिन्न विभागों के मंत्रियों का पीए बनकर पूर्वांचल की भाषा में संबंधित अधिकारियों से फोन पर बात करता था।
रामशंकर को सम्मानित होने का बहुत शौक है। विभिन्न स्थानों पर होने वाले कार्यक्रमों के आयोजकों से मिलकर वह उन्हें कुछ चंदा दे देता था। इसकी एवज में आयोजक उसे सम्मानित कर देते थे। कवि सम्मेलनों में भी वह चंदा देकर सम्मान हासिल करता था। रामशंकर द्वारा फेसबुक पर डाले गए अपने विवरण में उसने स्वयं को कई संस्थाओं का पदाधिकारी दर्शाया हुआ है।
वह विद्यालयों में जाकर शिक्षकों से उनके काम कराने की बात करता था और इसकी एवज में उनसे पैसा लेता था। विद्यालयों में वह गरीब बच्चों को पेन, पेंसिल और कापियां बांटकर विद्यालयों के स्टाफ का दिल जीत लेता था। उसके पीलीभीत में कम शाहजहांपुर जिले के लोगों से ज्यादा संबंध बताए जाते हैं।