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पीटीआर : न बाघों ने निराश किया, न सैलानियों ने
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जंगल सफारी के दौरान मार्ग पर चहलकदमी करता बाघ। स्त्रोत: सैलानी
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के अंतर्गत चूका बीच और जंगल सफारी के दौरान बाघों के अधिक दीदार इस बार सैलानियों को खूब भाए। इससे पीटीआर को पर्यटन के रूप में देश में अलग पहचान मिली। मंगलवार को 223 दिन गुलजार रहने के बाद पर्यटन स्थल के द्वार 15 नवंबर तक के लिए बंद कर दिए गए। इस बार यहां आने वाले सैलानियों की संख्या 54378 दर्ज की गई जो पिछले सत्र की अपेक्षा दोगुनी से भी अधिक रही।
पर्यटन सत्र के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से आने वाले सैलानियों को चूका बीच का नजारा मिनी गोवा का एहसास करता रहा। इसके अलावा महोफ और बराही रेंज में सांभर ताल, मगरमच्छ ताल, सायफन और सप्तसरोवर भी खास बना रहा। इसके साथ ही शुरुआत से ही जंगल सफारी के दौरान बाघों के दीदार होने और इस संबंध में फोटो और वीडियो वायरल होने से सैलानियों का आकर्षण पीटीआर की ओर अधिक बढ़ गया।
15 नवंबर से शुरू होने के बाद छह माह तक चलने वाले सत्र को इस बार 25 जून तक बढ़ा दिया गया। पूरे सत्र के दौरान सैलानियों की संख्या के सामने आंकड़ों ने पीटीआर को नई ऊर्जा दी। विभाग की ओर से जारी आकड़ों के अनुसार इस बार 54378 सैलानी घूमने पहुंचे, जबकि पिछले सत्र में यह संख्या 23525 थी। ऐसे में संख्या दोगुनी से अधिक बढ़ गई।
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अंतिम दिन भी तीन सौ से अधिक सैलानी पहुंचे। मंगलवार देर शाम समापन समारोह का आयोजन कर पर्यटन सत्र का समापन किया गया। जिसमें एएसपी विक्रम दहिया, डीएफओ मनीष सिंह, रेंजर सहेंद्र यादव भी मौजूद रहे।
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189 विदेशी सैलानियों ने भी की सैर
इस बार पीटीआर के पर्यटन को देश ही नहीं बल्कि विदेशों के सैलानियों ने भी पसंद किया। जिसके चलते इस बार 189 विदेशी सैलानी भी पीटीआर की खूबसूरती को निहारने पहुंचे। वहीं पिछले सत्र की बात करें तो यह संख्या सिर्फ 54 थी। इसमें जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के सैलानी शामिल रहे।
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पिछले सत्र की अपेक्षा 84,64,304 रुपये से अधिक आया राजस्व
पीटीआर ने इस सत्र में हर मामले में नया रिकॉर्ड बनाया। सैलानियों की बेहतर संख्या के चलते राजस्व आमदनी में भी अच्छा खासा उछाल आया। विभागीय आंकड़ाें पर नजर डालें तो इस बार 1,35,68354 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। जबकि पिछले सत्र में 51,04050 रुपये का ही राजस्व प्राप्त हुआ था। ऐसे में पिछले सत्र की अपेक्षा इस बार 84,64,304 की अधिक आय हुई।
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सुल्तान के परिवार और त्रिशूल बाघ ने दिलाई अलग पहचान
इस सत्र में सैलानियों की संख्या अधिक बढ़ने के पीछे पीटीआर के कुछ बाघों की लोकप्रियता अधिक रही। इसमें सुल्तान बाघ का परिवार और त्रिशूल बाघ शामिल रहे। इन बाघों का नाम गाइड और चालकों के अलावा सैलानियों ने ही रखा था। पूरे सत्र में इन बाघों के अधिक दीदार हुए। सोशल मीडिया पर भी यह सुर्खियां बटोरते रहे। आम सैलानियों के अलावा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर भी इन बाघों के प्रति आकर्षित हुए।
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जंगल से बाहर भी व्यापार को मिला बढ़ावा
पीटीआर के पर्यटन से इस बार जंगल से बाहर भी व्यापार को लाभ हुआ। दो होम स्टे बढ़ गए। शहर के होटलों में भी सैलानी रुके। इसके अलावा दूरदराज के लोगों का भी पीटीआर के प्रति आकर्षण बढ़ा तो उन्होंने जंगल से सटे इलाके में जमीनें खरीदना शुरू कर दीं।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व का पर्यटन मंगलवार को 15 नवंबर तक के लिए बंद कर दिया गया। इस बार सकारात्मक प्रयासों के जरिये पीटीआर के पर्यटन ने कई नए रिकॉर्ड बनाए। आगे भी प्रयास जारी रहेगा।
- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर
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पर्यटन सत्र के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से आने वाले सैलानियों को चूका बीच का नजारा मिनी गोवा का एहसास करता रहा। इसके अलावा महोफ और बराही रेंज में सांभर ताल, मगरमच्छ ताल, सायफन और सप्तसरोवर भी खास बना रहा। इसके साथ ही शुरुआत से ही जंगल सफारी के दौरान बाघों के दीदार होने और इस संबंध में फोटो और वीडियो वायरल होने से सैलानियों का आकर्षण पीटीआर की ओर अधिक बढ़ गया।
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15 नवंबर से शुरू होने के बाद छह माह तक चलने वाले सत्र को इस बार 25 जून तक बढ़ा दिया गया। पूरे सत्र के दौरान सैलानियों की संख्या के सामने आंकड़ों ने पीटीआर को नई ऊर्जा दी। विभाग की ओर से जारी आकड़ों के अनुसार इस बार 54378 सैलानी घूमने पहुंचे, जबकि पिछले सत्र में यह संख्या 23525 थी। ऐसे में संख्या दोगुनी से अधिक बढ़ गई।
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अंतिम दिन भी तीन सौ से अधिक सैलानी पहुंचे। मंगलवार देर शाम समापन समारोह का आयोजन कर पर्यटन सत्र का समापन किया गया। जिसमें एएसपी विक्रम दहिया, डीएफओ मनीष सिंह, रेंजर सहेंद्र यादव भी मौजूद रहे।
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189 विदेशी सैलानियों ने भी की सैर
इस बार पीटीआर के पर्यटन को देश ही नहीं बल्कि विदेशों के सैलानियों ने भी पसंद किया। जिसके चलते इस बार 189 विदेशी सैलानी भी पीटीआर की खूबसूरती को निहारने पहुंचे। वहीं पिछले सत्र की बात करें तो यह संख्या सिर्फ 54 थी। इसमें जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के सैलानी शामिल रहे।
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पिछले सत्र की अपेक्षा 84,64,304 रुपये से अधिक आया राजस्व
पीटीआर ने इस सत्र में हर मामले में नया रिकॉर्ड बनाया। सैलानियों की बेहतर संख्या के चलते राजस्व आमदनी में भी अच्छा खासा उछाल आया। विभागीय आंकड़ाें पर नजर डालें तो इस बार 1,35,68354 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। जबकि पिछले सत्र में 51,04050 रुपये का ही राजस्व प्राप्त हुआ था। ऐसे में पिछले सत्र की अपेक्षा इस बार 84,64,304 की अधिक आय हुई।
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सुल्तान के परिवार और त्रिशूल बाघ ने दिलाई अलग पहचान
इस सत्र में सैलानियों की संख्या अधिक बढ़ने के पीछे पीटीआर के कुछ बाघों की लोकप्रियता अधिक रही। इसमें सुल्तान बाघ का परिवार और त्रिशूल बाघ शामिल रहे। इन बाघों का नाम गाइड और चालकों के अलावा सैलानियों ने ही रखा था। पूरे सत्र में इन बाघों के अधिक दीदार हुए। सोशल मीडिया पर भी यह सुर्खियां बटोरते रहे। आम सैलानियों के अलावा वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर भी इन बाघों के प्रति आकर्षित हुए।
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जंगल से बाहर भी व्यापार को मिला बढ़ावा
पीटीआर के पर्यटन से इस बार जंगल से बाहर भी व्यापार को लाभ हुआ। दो होम स्टे बढ़ गए। शहर के होटलों में भी सैलानी रुके। इसके अलावा दूरदराज के लोगों का भी पीटीआर के प्रति आकर्षण बढ़ा तो उन्होंने जंगल से सटे इलाके में जमीनें खरीदना शुरू कर दीं।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व का पर्यटन मंगलवार को 15 नवंबर तक के लिए बंद कर दिया गया। इस बार सकारात्मक प्रयासों के जरिये पीटीआर के पर्यटन ने कई नए रिकॉर्ड बनाए। आगे भी प्रयास जारी रहेगा।
- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर

जंगल सफारी के दौरान मार्ग पर चहलकदमी करता बाघ। स्त्रोत: सैलानी